बी के झा
NSK

कोप्पल (कर्नाटक) 24 दिसंबर
जिस अंजनाद्री पहाड़ी को सनातन परंपरा में पवनपुत्र हनुमान की जन्मभूमि माना जाता है, वहीं स्थित आंजनेय (हनुमान) मंदिर उस समय विवाद के केंद्र में आ गया, जब दो संतों के बीच कथित रूप से हाथापाई की स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना इतनी बढ़ी कि मंदिर परिसर में तनाव फैल गया और अंततः पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।यह विवाद केवल दो व्यक्तियों का आपसी झगड़ा नहीं रह गया, बल्कि इसके साथ मंदिर प्रबंधन, धार्मिक अधिकार, परंपरागत मर्यादा और संत समाज की गरिमा जैसे गंभीर प्रश्न भी जुड़ते चले गए हैं।क्या है पूरा विवाद?मंदिर के प्रधान पुजारी और संचालक बाबा विद्यादास का आरोप है कि स्वामी गोविंदानंद अपने समर्थकों के साथ अंजनाद्री पहाड़ी पर पहुंचे और मंदिर संचालन अपने हाथ में लेने की कोशिश की।
विद्यादास बाबा के अनुसार—पूजा-पाठ में बाधा डाली गईअपशब्दों का प्रयोग हुआमंदिर पर कब्जे की कोशिश की गईइस संबंध में उन्होंने ग्रामीण पुलिस थाने में ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई है।वहीं दूसरी ओर, स्वामी गोविंदानंद का दावा है कि—“शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा उन्हें किष्किंधा भूमि के धार्मिक कार्यों का दायित्व सौंपा गया है, लेकिन महंत विद्यादास बाबा आदेश मानने को तैयार नहीं हैं।
”पूजा व्यवस्था और प्रतिमा स्थापना से भड़का विवादस्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ समय पहले स्वामी गोविंदानंद की ओर से विशाल हनुमान प्रतिमा की स्थापना को लेकर रथयात्रा निकाली गई थी। उसी के बाद से पूजा-पद्धति, अधिकार और नियंत्रण को लेकर मतभेद गहराते चले गए।यही मतभेद अंततः सार्वजनिक टकराव में बदल गया।
हिन्दू धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया घटना पर देशभर के संत समाज में चिंता देखी जा रही है।एक वरिष्ठ धर्माचार्य ने कहा—“जहां हनुमान जी का जन्म माना जाता है, वहां क्रोध, अहंकार और हाथापाई होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। संतों को विवाद का समाधान संवाद से करना चाहिए, न कि शक्ति प्रदर्शन से।”अखिल भारतीय संत समिति से जुड़े एक संत ने कहा—“मंदिर किसी व्यक्ति की जागीर नहीं, यह समाज और परंपरा की धरोहर है।
प्रशासनिक और धार्मिक सीमाएं स्पष्ट होनी चाहिए।”
हिन्दू संगठनों की राय की हिन्दू संगठनों ने इस घटना पर नाराज़गी जताई है।विश्व हिंदू परिषद (VHP) के स्थानीय पदाधिकारियों ने कहा कि“ऐसे विवाद सनातन की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता और परंपरा दोनों जरूरी हैं।”बजरंग दल के एक पदाधिकारी ने कहा कि“हनुमान जी शक्ति, संयम और सेवा के प्रतीक हैं। उनके धाम पर हिंसा होना श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।”
स्थानीय प्रशासन का पक्ष
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि—दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं फोर्जरी और अव्यवस्था के आरोपों की जांच चल रही है स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा—“यह धार्मिक स्थल है, यहां कानून-व्यवस्था भंग नहीं होने दी जाएगी। जांच के बाद विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।”भक्तों में चिंता, मर्यादा पर प्रश्नस्थानीय श्रद्धालुओं और देशभर से आने वाले भक्तों में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी और पीड़ा देखी जा रही है।कई भक्तों का कहना है कि—
“अंजनाद्री जैसे पवित्र स्थल पर सत्ता और नियंत्रण की लड़ाई नहीं होनी चाहिए। यहां केवल भक्ति और सेवा का भाव होना चाहिए।”
निष्कर्ष:
आस्था के केंद्र में अहंकार का संकटअंजनाद्री का यह विवाद एक चेतावनी की तरह है—यदि धर्म के केंद्रों पर भी सत्ता, अधिकार और व्यक्तिगत वर्चस्व की राजनीति हावी होगी, तो उससे न केवल संत समाज की गरिमा प्रभावित होगी, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था भी आहत होगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक जांच, संत समाज की पहल और परंपरागत संवाद के माध्यम से यह विवाद सुलझता है या नहीं।हनुमान जन्मस्थली की मर्यादा बनी रहे—यही इस पूरे प्रकरण से उभरती सबसे बड़ी अपेक्षा है।
