हम भाड़े के सिपाही नहीं”—ईरान में उबाल के बीच खामेनेई की ट्रंप को दो-टूक चेतावनी, इतिहास के आईने में अमेरिकी घमंड

बी के झा

NSK

तेहरान/वॉशिंगटन / न ई दिल्ली , ,9 जनवरी

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और पश्चिमी दबावों के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तीखे शब्दों में जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ईरान न तो दबेगा और न ही किसी विदेशी ताकत के इशारे पर चलेगा। शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद दिए गए अपने संबोधन में खामेनेई ने कहा कि ईरान को लेकर अमेरिका का आकलन पहले भी गलत था और आज भी गलत साबित हो रहा है।यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और अमेरिका ने कथित तौर पर ईरानी सरकार को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया तो वह “जवाबी कार्रवाई” करेगा।“देश भाड़े के सिपाहियों को माफ नहीं करता”

खामेनेई ने बिना लाग-लपेट के अमेरिका और इज़रायल की ओर इशारा करते हुए कहा—“आप चाहे जो भी हों, जैसे ही आप किसी विदेशी के लिए भाड़े के सिपाही बनते हैं या किसी विदेशी ताकत के हित में काम करते हैं, देश उस हालत में आपको माफ नहीं करेगा।”उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान का इतिहास विदेशी दखल के खिलाफ संघर्ष का इतिहास रहा है, और आज भी ईरानी जनता किसी बाहरी दबाव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

ट्रंप को इतिहास की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया धमकियों पर प्रतिक्रिया देते हुए खामेनेई ने इतिहास का उदाहरण सामने रखा। उन्होंने कहा—“वह शख्स, जो वहां बैठकर घमंड और अहंकार में डूबकर पूरी दुनिया पर फैसले सुनाता है, उसे यह जान लेना चाहिए कि दुनिया के तानाशाह और अहंकारी शासक—चाहे वे फ़िरौन हों, नमरूद हों, रज़ा ख़ान हों या मोहम्मद रज़ा पहलवी—ठीक उसी समय गिराए गए, जब उनका अहंकार चरम पर था।”खामेनेई के इस बयान को ईरान के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी अमेरिकी वर्चस्व को सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों पर भी सख्त रुख

अपने भाषण में ईरान के सर्वोच्च नेता ने देश के भीतर हो रहे विरोध प्रदर्शनों की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि“कुछ लोग किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं।”सरकारी टीवी पर प्रसारित इस बयान का सीधा निशाना अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप थे, जिन पर ईरान लंबे समय से आंतरिक अस्थिरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है।

अमेरिका की धमकी और ईरान की जिद

गौरतलब है कि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करती है, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।ईरान इस बयान को सीधे तौर पर संप्रभुता में हस्तक्षेप मानता है।खामेनेई ने स्पष्ट किया कि“ईरान किसी भी सूरत में विदेशियों की धमकियों के आगे झुकने वाला देश नहीं है। यह मुल्क भाड़े के सिपाही बनने को न कभी बर्दाश्त करता है और न करेगा।

”अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई का यह भाषण केवल घरेलू दर्शकों के लिए नहीं था, बल्कि यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए रणनीतिक संदेश भी है।एक ओर ईरान आंतरिक असंतोष से जूझ रहा है,दूसरी ओर वह यह दिखाना चाहता है कि राष्ट्रीय संप्रभुता और वैचारिक आत्मनिर्भरता पर कोई समझौता नहीं होगा।विशेषज्ञों के अनुसार, खामेनेई द्वारा ऐतिहासिक उदाहरणों का उपयोग करना ईरानी नेतृत्व की पुरानी रणनीति है—जिसके जरिए वह यह संदेश देता है कि महाशक्तियों का घमंड क्षणिक होता है, जबकि राष्ट्रों की चेतना दीर्घकालिक।

निष्कर्ष

ईरान में विरोध प्रदर्शन, अमेरिका की धमकियां और खामेनेई की तीखी प्रतिक्रिया—

इन सबके बीच यह स्पष्ट है कि तेहरान और वॉशिंगटन के रिश्तों में तनाव और गहराने वाला है।

खामेनेई का यह बयान केवल ट्रंप को ललकार नहीं, बल्कि ईरानी राष्ट्रवाद, धार्मिक नेतृत्व और पश्चिमी हस्तक्षेप के खिलाफ दशकों पुराने संघर्ष का नया अध्याय है—

जहां इतिहास, धर्म और राजनीति एक बार फिर आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं।

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