बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 19 नवंबर
भारत वर्षों से जिस बात को दुनिया के सामने कहता रहा है—आज वही बात पाकिस्तान की संसद में खुलेआम स्वीकार कर ली गई।पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी अनवारुल हक ने स्वीकार किया कि भारत में लाल किले से लेकर कश्मीर तक जो आतंकवादी हमले हुए, वे पाकिस्तान समर्थित संगठनों ने ही अंजाम दिए।
यह बयान उस देश से आया है जो हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर “हम आतंकवाद के खिलाफ हैं” की रट लगाता है।परंतु अब स्वयं उसके नेता ने पाकिस्तान को राज्य-प्रायोजित आतंकवाद का केंद्र बताया है।
लाल किले से कश्मीर तक—आतंकी हमलों का खुला बयानPoJK विधानसभा में अविश्वास मत हारने के बाद अपने भाषण में अनवारुल हक ने कहा—
अगर तुम (भारत) बलूचिस्तान को खून से लथपथ करते रहोगे, तो हम लाल किले से लेकर कश्मीर के जंगलों तक हमला करेंगे… और हमारे शाहीन ने ऐसा कर दिखाया है। भारत अभी भी लाशें नहीं गिन पा रहा।इस “शाहीन” शब्द का प्रयोग पाकिस्तान अक्सर अपने आतंकवादी मॉड्यूल और कट्टरपंथी गुटों के लिए करता रहा है।
यह बयान केवल उकसावे वाला नहीं है—यह आतंक को सरकारी नीति के रूप में स्वीकार करने का लिखित सबूत है।दिल्ली कार ब्लास्ट—
कबूलनामे ने खोला असली मास्टरमाइंड का चेहरा10 नवंबर को दिल्ली में हुए कार धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी।भारत की खुफिया एजेंसियाँ पहले से ही इसे जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मॉड्यूल की कार्रवाई बता चुकी थीं।हमले का मास्टरमाइंड डॉ. उमर-उन-नबी पाकिस्तान में बैठकर हमले ऑपरेट कर रहा था।हक के कबूलनामे ने अब इस शक को और बल दिया कि यह हमला भी सीमा पार से संचालित था।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार—यह पहली बार है जब पाकिस्तान के किसी शीर्ष पद से इतने स्पष्ट शब्दों में स्वीकारोक्ति आई है।
”कश्मीर के ‘जंगलों’ का जिक्र—पहलगाम में हुई 26 पर्यटकों की निर्मम हत्या हक का “कश्मीर के जंगलों” वाला बयान 22 अप्रैल के पहलगाम-बैसरन हमले का स्पष्ट संदर्भ था, जिसमें पाकिस्तानी आतंकियों ने पर्यटकों से धर्म पूछ-पूछकर उन पर गोलियाँ बरसा दी थीं।
26 निर्दोष पर्यटकों की मौत से पूरा देश स्तब्ध था।भारत ने इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और PoJK में कई आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई कर उन्हें ध्वस्त किया था।पाकिस्तान तब भी “हमारा हाथ नहीं” कह रहा था—
लेकिन आज उनके अपने नेता ने सारी परतें खोल दीं।भारत की खुफिया एजेंसियों की प्रतिक्रिया—“
अब दुनिया को और सबूत चाहिए?”
भारतीय खुफिया अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से कहा—यह बयान पाकिस्तान द्वारा दशकों से चलाए जा रहे ‘प्रॉक्सी वॉर’ की आधिकारिक मुहर है।अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समझना होगा कि यह सिर्फ भारत का मुद्दा नहीं—
यह वैश्विक आतंकवाद की फेक्ट्री है।”रक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण—“
पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था में आतंकवाद ही बचा बिजनेस है
”मेजर जनरल (से.नि.) एस.के. सिन्हा यह कबूलनामा पाकिस्तान की मजबूरी की उपज है। घरेलू राजनीति में हार के बाद नेता वहाँ कट्टरपंथी समूहों को खुश करने के लिए ऐसे बयान देते हैं। परंतु यह दुनिया के सामने सच्चाई उजागर कर देता है
।एयर वाइस मार्शल (से.नि.) मनोज ठाकुर लाल किले का जिक्र सीधे-सीधे भारत के प्रतीकात्मक दिल पर हमला करने का दावा है।
यह बेहद गंभीर है। दुनिया को समझना चाहिए कि पाकिस्तान अब भी आतंकवाद को अपनी ‘स्ट्रैटेजिक डेप्थ’ मानता है।”
राजनयिकों की प्रतिक्रिया—“पाकिस्तान की पोल खुली, FATF को संज्ञान लेना चाहिए”
भारतीय विदेश नीति विशेषज्ञों ने कहा—यह बयान FATF के लिए एक रेड-फ्लैग है। हक की स्वीकारोक्ति साबित करती है कि पाकिस्तान आतंकवाद को सीमापार लड़ाई का साधन मानता है। इससे पाकिस्तान पर प्रतिबंधों की संभावना बढ़ती है।
सोशल मीडिया पर हंगामा—क्लिप वायरल, पाकिस्तान में भी हड़कंप
हक के भाषण का वीडियो वायरल होते ही पाकिस्तान के भीतर भी आलोचनाओं की बाढ़ आ गई।
विपक्ष का कहना है—यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को फिर से शर्मिंदा कर देगा। IMF और विश्व समुदाय में हमारी छवि और बदतर होगी।”वहीं कट्टरपंथी धड़े इस बयान को “साहसिक” बता रहे हैं।
निष्कर्ष—
आतंकवाद पर पाकिस्तान की सबसे बड़ी पोल खुल गई भारत ने दशकों से जिस बात का दावा किया—आज पाकिस्तान ने खुद अपने मुँह से कह दिया।यह सिर्फ एक बयान नहीं—
यह आतंकवाद की स्वीकारोक्ति है।अब यह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, FATF और वैश्विक समुदाय की जिम्मेदारी है कि वे पाकिस्तान पर कठोर कदम उठाएँ।और भारत के लिए यह एक बार फिर याद दिलाने वाला क्षण है कि—
सीमा पार से आने वाला खतरा खत्म नहीं हुआ है,बल्कि पाकिस्तान के नेताओं के शब्द बता रहे हैं कि यह कितनी गहरी जड़ों में जकड़ा हुआ है।
