बी के झा
NSK

पटना, 18 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी के जीत का सपना बिखर गया। न एक सीट मिली, न कोई आशा बाकी रही। लाखों किलोमीटर की पदयात्रा, वर्षों की मेहनत और जनता से सीधी बातचीत—
सब कुछ चुनावी नतीजों के सामने ध्वस्त हो गया।लेकिन इन नतीजों के बाद अब पहली बार प्रशांत किशोर सामने आए हैं। और इस बार वो चुनावी रणनीतिकार वाले अंदाज़ में नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेते, हार स्वीकार करते और जनता के सामने सिर झुकाते दिखे।“
मैं माफी मांगता हूं…
जनता का विश्वास नहीं जीत पाया—यह मेरी 100% गलती है”मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने साफ शब्दों में कहा—
व्यवस्था परिवर्तन की तो बात ही छोड़िए, सत्ता परिवर्तन भी नहीं ला पाए।हमारी कोशिशें ईमानदार थीं लेकिन नाकाम रहीं।जनता ने हमें नहीं चुना, इसमें कमी मेरी रही होगी।इसकी पूरी ज़िम्मेदारी 100% मेरी है—और मैं इसे स्वीकार करता हूँ।
भारत की राजनीति में शायद ही कोई नेता इतनी स्पष्टता से अपनी हार स्वीकार करता दिखाई देता हो।लेकिन प्रशांत किशोर ने आत्मालोचना की राह चुनी।
20 नवंबर को सामूहिक मौन उपवास—
भीतरहरवा आश्रम में प्रायश्चित
प्रशांत किशोर ने अपनी बात को और विनम्र बनाते हुए कहा कि वे 20 नवंबर को पश्चिम चंपारण के भीतरहरवा आश्रम में एक दिन का सामूहिक मौन उपवास रखेंगे।
उन्होंने कहा—> “हमसे गलती हुई है, गुनाह नहीं।वोट नहीं मिलना कोई अपराध नहीं है।मैंने जाति और धर्म के नाम पर बिहार को बाँटने का गुनाह नहीं किया।”उनका कहना था कि राजनीति की भीड़ में उन्होंने एक वैकल्पिक रास्ता दिखाने की कोशिश की, लेकिन जनता को यह भरोसा नहीं दिला पाए कि जन सुराज बदलाव ला सकता है।“
मैं बिहार नहीं छोड़ूंगा…दोगुनी ताकत से लड़ेंगे”
कुछ लोग यह मान रहे थे कि भारी हार के बाद प्रशांत किशोर शायद बिहार छोड़कर फिर राजनीतिक रणनीति की दुनिया में लौट जाएँ।
लेकिन PK ने इसे साफ़ तौर पर नकार दिया—
जो सोच रहे हैं कि मैं बिहार छोड़ दूंगा, वो गलत हैं।मैं यहीं रहूंगा और दोगुनी ताकत से लड़ूंगा।पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।”उनके शब्दों में वही पुराना आत्मविश्वास था जिसने कभी उन्हें देश के सबसे सफल चुनावी रणनीतिकारों की सूची में शामिल किया था।‘
बिहार में चुनाव खरीदा गया’—60,000 लोगों को 10,000 रुपये दिए गए:
PKअपनी प्रेसवार्ता में प्रशांत किशोर ने चुनावी अनियमितताओं पर बड़ा आरोप लगाया। उनका दावा था कि—हर विधानसभा में लगभग 60,000 लोगों को 10,000 रुपये दिए गए जीविका दीदियों की पूरी मशीनरी लगाई गई1 लाख से अधिक आशा, आंगनबाड़ी, टोला सेवक और प्रवासी मजदूरों में लगभग 29,000 करोड़ रुपये बांटे गए
PK ने कहा—यह पहली बार हुआ कि 40,000 करोड़ जनता के पैसे के इस्तेमाल की खुली घोषणा हुई।चुनाव आयोग इस पर चुप रहा।इतना बड़ा पैसा राजनीतिक फायदे के लिए बांटा गया।”इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
“हम ईमानदार कोशिश में नाकाम रहे—इसे स्वीकार करना भी राजनीति का हिस्सा है”PK ने कहा कि उनकी:नीयत मेहनतऔर सोच सब कुछ सही था, लेकिन जनता ने उन्हें मौका नहीं दिया।
उन्होंने कहा—यह मानने में कोई बुराई नहीं कि हम नाकाम रहे।लेकिन बिहार की राजनीति बदलने में हमारी भूमिका जरूर रही।अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है।”PK का बड़ा एलान:“ढाई करोड़ महिलाओं को 2-2 लाख रुपये 6 महीने में दे दो—
मैं राजनीति छोड़ दूंगा”
प्रशांत किशोर ने सरकार के सामने एक बड़ा चुनौतीपूर्ण प्रस्ताव रखा—> “
अगर यह वोट खरीदा नहीं गया है,तो अगले 6 महीने में 1.5 से 2 करोड़ महिलाओं को 2-2 लाख रुपये दे दीजिए।अगर ऐसा हो जाए तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा।”उन्होंने इसके लिए एक नंबर भी जारी करने की घोषणा की, जिस पर महिलाएँ संपर्क कर सकेंगी।
अंततः… PK की राजनीति में यह ‘हार’ है या अगली लड़ाई की तैयारी?
एक ओर प्रशांत किशोर ने हार को स्वीकार किया,तो दूसरी ओर वही PK आज फिर एक लड़ाकू नेता की तरह दिखे—
जनता से माफी,आत्मचिंतन,बड़े आरोप,और नई चुनौती—
यह संयोजन बताता है कि PK फिलहाल मैदान छोड़ने वाले नहीं हैं।
प्रशांत किशोर की यह प्रेसवार्ता न सिर्फ चुनाव के बाद की प्रतिक्रिया थी, बल्कि यह संकेत भी थी कि बिहार की राजनीति में उनकी कहानी अभी खत्म नहीं हुई—
बल्कि एक नया अध्याय शुरू हो रहा है।
