100 शहाबुद्दीन आ जाएं… किसी का बाल बाँका नहीं कर सकते” — सीवान में गरजे अमित शाह, बोले ‘अब बिहार में जंगलराज नहीं, एनडीए का राज है’,गृहमंत्री ने लालू परिवार, कांग्रेस और शहाबुद्दीन पर साधा निशाना, तो बुद्धिजीवियों ने उठाया सवाल — “20 साल के राज में कितने घुसपैठिए निकाले?

बी के झा

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सीवान ( बिहार ) / नई दिल्ली, 24 अक्टूबर—

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीवान की धरती से ऐसी गर्जना की जिसने पूरे बिहार के राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया।

राजेन्द्र बाबू की पवित्र भूमि से शाह ने लालू-राबड़ी के शासनकाल, बाहुबली राजनीति, घुसपैठ और आतंकवाद तक पर कड़ा हमला बोला — और कहा कि “सौ शहाबुद्दीन भी आ जाएं तो किसी का बाल बाँका नहीं कर सकते।”

राजेंद्र बाबू की भूमि को प्रणाम” — शुरुआत में भावनात्मक जुड़ाव अमित शाह ने अपने भाषण की शुरुआत सीवान की गौरवशाली ऐतिहासिक पहचान से की।

उन्होंने कहा —यह सिवान की भूमि महान राजेन्द्र बाबू की भूमि है, जिन्होंने आजादी के आंदोलन का नेतृत्व किया और भारत के पहले राष्ट्रपति बने। मैं इस पवित्र धरती को नमन करता हूं।

गांधीजी और मालवीय जी की यात्रा के दौरान भी यह भूमि प्रेरणा का स्रोत रही है।शाह ने लोगों को याद दिलाया कि यह वही धरती है जिसने बाहुबली राजनीति और लालू-राबड़ी के “जंगलराज” के खिलाफ आवाज़ उठाई थी।

“सौ शहाबुद्दीन आ जाएं… किसी का बाल बाँका नहीं कर सकते” —

लालू परिवार पर सीधा निशाना

शाह ने कहा —लालू यादव ने खुद शहाबुद्दीन के बेटे को टिकट दिया है। यह वही सिवान है जिसने कभी उसके अत्याचारों को सहा था। लेकिन अब मोदी जी और नीतीश जी का राज है — अब सौ शहाबुद्दीन भी आ जाएं, किसी का बाल बाँका नहीं कर सकते।

”उन्होंने कहा कि “हम शहाबुद्दीन की विचारधारा को जीतने नहीं देंगे, जंगलराज खत्म हो चुका है और विकास का युग शुरू हो चुका है।”

14 नवंबर को ‘सच्ची दीपावली’ — लालू के बेटे का ‘सुपड़ा साफ’ होगा:

शाह गृहमंत्री ने लोगों से कहा —आपने दीपावली मनाई है, छठ भी मनाएंगे, लेकिन सच्ची दीपावली 14 नवंबर को होगी जब लालू के बेटे का सुपड़ा साफ हो जाएगा।

उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार ने बिहार को जंगलराज से मुक्त कराया और बिहार अब विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सरकार की उपलब्धियों का बखान

अमित शाह ने केन्द्र सरकार की उपलब्धियों का पूरा ब्यौरा गिनाया —80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन आयुष्मान भारत से 5 लाख तक मुफ्त इलाज 13 करोड़ किसानों को सालाना ₹6,000 सहायता 12 करोड़ शौचालय, 10 करोड़ गैस सिलेंडर4 करोड़ गरीबों को पक्के घरऔर 15 करोड़ घरों में नल का पानी उन्होंने कहा कि “मोदी सरकार ने सेवा, सुरक्षा और स्वाभिमान की राजनीति की है, जबकि विपक्ष ने केवल सत्ता और परिवार की राजनीति की।”

“सोनिया-लालू की सरकार में आतंकियों को बिरयानी, अब ऑपरेशन सिंदूर”अमित शाह ने कहा कि जब केंद्र में “सोनिया-लालू की सरकार” थी, तब आतंकियों को बिरयानी खिलाई जाती थी।

उन्होंने कहा —अब मोदी जी की सरकार में पाकिस्तान के घर में घुसकर ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकियों का सफाया किया गया है।”

हर घुसपैठिए को देश से बाहर करेंगे” —

एनडीए की चुनावी प्रतिज्ञा अमित शाह ने घुसपैठ और NRC का मुद्दा उठाते हुए कहा —

राहुल बाबा कहते हैं कि घुसपैठियों को बिहार में रहने दो। मैं कहता हूं — अबकी बार एनडीए की सरकार बनाओ, हर एक घुसपैठिए को देश से बाहर करेंगे।”उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और आरजेडी की सरकारें रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की “संरक्षक” रही हैं।

लेकिन अमित शाह के बयान पर उठे सवाल शिक्षाविदों ने कहा — “घिसा-पिटा भाषण, अब जनता उब चुकी है

”सीवान के एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने अमित शाह के भाषण पर टिप्पणी करते हुए कहा —अमित शाह हर चुनाव में यही घिसा-पिटा जुमला बोलते हैं — ‘इस बार जिताओ, घुसपैठियों को निकाल दूंगा’।

लेकिन सवाल यह है कि 11 साल से केंद्र में उनकी सरकार है और बिहार में लगभग 20 साल से गठबंधन की सरकार — तो अब तक कितने घुसपैठियों को निकाला गया?उन्होंने आगे कहा कि “अब बिहार की जनता हिंदू-मुसलमान वाली राजनीति से ऊब चुकी है, उसे रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य चाहिए।”

लालू का जंगलराज याद दिलाते हैं, पर पटना में दिनदहाड़े हत्या होती है

”शिक्षाविद ने सवाल उठाया —अमित शाह लालू का जंगलराज याद दिलाते हैं, लेकिन अपने गठबंधन की सरकार में क्या हो रहा है? राजधानी पटना में अस्पताल के अंदर गोली मारकर अपराधी फरार हो जाते हैं।

बिहार में हत्याओं की संख्या बढ़ी है — क्या यह कानून-व्यवस्था है?”

वरिष्ठ पत्रकार बोले — “पत्रकारों की जमीन कब्जाई गई, शिकायतें रद्दी में फेंकी गईं”

एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —कोविड के समय जब एक पत्रकार ने केंद्र सरकार की लूट का सच उजागर करने की कोशिश की, तो उसी सरकार के संरक्षण में उसके साथ बर्बरता की गई।‌वहीं शाह के इशारे पर बीजेपी के स्थानीय एमएलसी और उनके गुर्गों ने उसकी जमीन तक कब्जा कर ली।”

उन्होंने कहा कि “पत्रकार द्वारा दी गई शिकायत को स्थानीय प्रशासन ने कूड़ेदान में फेंक दिया, और उल्टा उस अधिकारी को पदोन्नति दे दी गई।

प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह दोनों को इसकी जानकारी थी और है— फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।”पत्रकार ने सवाल उठाया —जब खुद पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं, तब यह सरकार किस नैतिकता से ‘सुरक्षा’ और ‘स्वाभिमान’ की बात करती है?”

राजनीतिक विश्लेषक बोले — “अब सिर्फ हिंदू-मुसलमान से वोट नहीं मिलेंगे

”राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि अमित शाह और एनडीए गठबंधन बार-बार “जंगलराज” और “धर्म की राजनीति” का सहारा ले रहे हैं, लेकिन बिहार का मतदाता अब विकास, रोजगार और भ्रष्टाचार पर वोट करेगा।वर्तमान बिहार में जिस तरह हत्या, लूट और दहशत की घटनाएं बढ़ी हैं, वह शायद लालू राज के दौर को भी पीछे छोड़ दे रही हैं।”

निष्कर्ष:

बिहार बदलाव के मुहाने पर

सीवान की यह सभा सिर्फ एक चुनावी रैली नहीं थी, बल्कि बिहार की राजनीति के दो चेहरों का आमना-सामना थी —एक तरफ अमित शाह का आत्मविश्वासी “सुशासन बनाम जंगलराज” का तर्क, और दूसरी तरफ बुद्धिजीवियों का सवाल — “20 साल से सत्ता में रहकर अब तक क्या बदला?”अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 14 नवंबर को “सच्ची दीपावली” अमित शाह के कहे अनुसार एनडीए के नाम होती है या जनता किसी नई दिशा की मशाल जलाती है।

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