बी के झा
NSK

बेतिया, (बिहार ) 21 नवंबर —
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने शुक्रवार को बेतिया में अपनी एक दिन की भूख हड़ताल समाप्त करते हुए बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी। मीडिया के सामने उनकी भाषा, तर्क और तेवर—तीनों में असाधारण आक्रामकता और विश्वास झलक रहा था।
PK ने दावा किया कि “देश के इतिहास में पहली बार सरकार ने खुलेआम वोट खरीदे हैं”, और इसके लिए एक करोड़ से अधिक महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे गए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा—“अगर मैं गलत हूं तो बिहार सरकार मुझे जेल भेज दे।”वोट खरीदने का सनसनीखेज आरोप
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि:सरकार के पास फंड नहीं था, इसलिए राज्य की आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) का इस्तेमाल किया गया।इसके अलावा विश्व बैंक के अनुदान का भी उपयोग किया गया, जो नियमों के खिलाफ है।उनका कहना था कि एनडीए ने दो लाख रुपये देने का चुनावी वादा किया था लेकिन उसका बड़ा हिस्सा केवल छलावा साबित हुआ।
PK ने कहा,“मोदी, अमित शाह और नीतीश कुमार—तीनों अब बिहार की चिंता नहीं कर रहे। क्योंकि वोट खरीद लिए गए, इसलिए जनता की जरूरतें उनके लिए मायने नहीं रखतीं।घर-घर अभियान: 15 जनवरी से शुरू होगा ‘बिहार नव निर्माण संकल्प’प्रशांत किशोर ने ऐलान किया कि:15 जनवरी के बाद जन सुराज कार्यकर्ता राज्य के 1.18 लाख वार्डों में घर-घर जाकर बताएंगे कि वोट कैसे खरीदे गए।
वे खुद अगले 15–18 महीनों में बिहार के हर घर तक पहुंचेंगे।वे महिलाओं को वादा किए गए 2 लाख रुपये दिलाने के लिए आंदोलनकारी तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा—“हम बिहार की जनता को जागरूक करेंगे कि उनकी गरिमा और वोट की ताकत कैसे बेची गई।‘मैं किसी से नहीं मिलूंगा जो 1,000 रुपये चंदा नहीं देगा’अपनी राजनीति में ‘सहभागिता’ को जरूरी बताते हुए PK ने कहा:वे अगले पांच वर्षों तक अपनी 90% आय पार्टी को दान करेंगे।
दिल्ली में स्थित एक घर को छोड़कर अपनी 20 वर्षों में अर्जित लगभग सारी संपत्ति जन सुराज को देंगे।उन्होंने जनता और समर्थकों से 1,000 रुपये पार्टी को चंदा देने की अपील की और दृढ़ स्वर में कहा:“जो व्यक्ति 1,000 रुपये का चंदा नहीं देगा, मैं उससे नहीं मिलूंगा।”यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा और विवाद दोनों का कारण बना है।
कैबिनेट पर तीखा हमला — “यह बिहार की जनता के मुंह पर तमाचा है
”नीतीश कुमार की नई कैबिनेट पर बोलते हुए PK ने कहा:“कई मंत्रियों को सिर्फ इसलिए पद मिला क्योंकि उनके पिता राजनीति में थे।”“भ्रष्ट और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को शामिल किया गया।”“यह बिहार की जनता के घाव पर नमक छिड़कने जैसा है।”PK ने इसे सत्ता की “परिवारवाद और सौदेबाजी वाली राजनीति का चरम रूप” करार दिया।“
हम गांधी के रास्ते पर”— PK का आत्मविश्वासी ऐलानअपनी आंदोलन शैली का बचाव करते हुए PK ने कहा:“मेरी राजनीति महात्मा गांधी की धैर्य और दृढ़ता की विचारधारा पर आधारित है।”“
भाजपा ने हमारा मनोबल तोड़ने की लाख कोशिश की, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।”“हम सरकार बदलकर रहेंगे। यह लड़ाई लंबी होगी, लेकिन निर्णायक होगी।”
राजनीतिक जानकारों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:PK का यह बयानबाजी अभियान उन्हें तेजस्वी यादव के विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।उनके आरोपों ने बिहार की राजनीति का तापमान अचानक बढ़ा दिया है।लेकिन 1,000 रुपये चंदा अनिवार्य करने वाला बयान उन्हें आलोचनाओं के कठघरे में भी खड़ा कर सकता है, क्योंकि यह जनता के लिए एक तरह की ‘शर्त आधारित राजनीति’ जैसा दिखता है।फिर भी PK का जमीनी अभियान उन्हें बिहार के राजनीतिक समीकरणों में एक अनोखी और चुनौतीपूर्ण स्थिति में खड़ा करता है।
निष्कर्ष:
PK की राजनीति में नया मोड़, बिहार में गर्माई सियासत प्रशांत किशोर की भूख हड़ताल भले एक दिन चली हो, लेकिन उसके बाद निकले राजनीतिक बाण ने बिहार की राजनीति को झकझोर दिया है।
वोट खरीदने, विश्व बैंक फंड के दुरुपयोग और परिवारवाद के आरोपों ने राज्य सरकार को सीधे सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।अब देखने वाली बात यह है कि—
क्या PK का घर-घर अभियान बिहार की राजनीति में एक नई लहर पैदा करेगा?या यह केवल चुनावी सीजन के लिए उठा एक उत्तेजक मुद्दा साबित होगी।
