202 सीटों की ऐतिहासिक जीत के बाद पटना में सियासी हलचल तेज, सरकार गठन पर मंथन शुरू, एनडीए में उत्साह—विपक्ष में हताशा

बी के झा

NSK

पटना, 15 नवंबर

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पूरा पटना राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। जनता ने इस बार एनडीए को 202 सीटों के ऐतिहासिक बहुमत के साथ सत्ता की बागडोर सौंप दी है, जबकि विपक्ष को 35 सीटों पर रोककर यह साफ संदेश दिया है कि वह स्थिरता और शासन की निरंतरता को प्राथमिकता दे रही है।

2020 में सबसे बड़ी पार्टी बनने वाली राजद इस बार सिर्फ 25 सीटों पर सिमट गई है। तेजस्वी यादव का मुख्यमंत्री बनने का सपना धराशायी हो गया है और महागठबंधन अब तक की सबसे कमजोर स्थिति में दिख रहा है।चुनाव खत्म होते ही सत्ता के गलियारों में सरकार गठन की उठापटक, बैठकों का दौर और समीकरणों का गणित एक बार फिर सक्रिय हो चुका है।

नीतीश आवास पर नेताओं का हुजूम एनडीए में सरकार गठन पर तेजी से मंथन

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 7, सर्कुलर रोड स्थित आवास पर पूरे दिन नेताओं का आना-जाना लगा रहा। जदयू के वरिष्ठ नेता, भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी, लोजपा (RV) और हम पार्टी के प्रतिनिधि—सभी सरकार गठन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

सूत्रों के अनुसार—कैबिनेट के आकार और सीट वितरण पर चर्चाएं जारी हैं भाजपा के पहली बार “बड़े भाई” बनने के बाद विभागों के बंटवारे में नए समीकरण बनेंगे अगले 24–48 घंटे में एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाए जाने की संभावना है शपथग्रहण की तिथि पर भी मंथन चल रहा है नीतीश

कुमार पर एक बार फिर स्थिर, अनुभवी नेतृत्व देने की जिम्मेदारी होगी। एनडीए खेमे में उत्साह है और अगले कार्यकाल के एजेंडे पर एकजुटता दिखाई दे रही है।

बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी—

पहली बार बड़े भाई की भूमिका

इस चुनाव ने बिहार की राजनीति में एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव दर्ज किया है।बीजेपी 89 सीटों के साथ राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यह पहली बार है जब भाजपा विधानसभा में “बड़े भाई” की भूमिका में है, जबकि जदयू 85 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर आ गई है।

एनडीए के अन्य घटक दलों का प्रदर्शन—लोजपा (RV): 19 सीटेंहम पार्टी: 5 सीटेंरालोमो (उपेंद्र कुशवाहा): 4 सीटेंइन परिणामों ने एनडीए को ऐतिहासिक बढ़त दी है और सरकार गठन के लिए पर्याप्त स्थिरता सुनिश्चित की है।

विपक्ष में मायूसी—

तेजस्वी का सपना टूटा महागठबंधन के खेमे में गहरा सदमा और निराशा है।

राजद, जिसने 2020 में 75 सीटों का आंकड़ा छुआ था, इस बार केवल 25 पर अटक गई। कांग्रेस और वाम दल भी इस बार जनता को साधने में विफल रहे।

सूत्रों का कहना है कि राजद कैंप इस बात की समीक्षा में जुटा है कि—मुस्लिम–यादव वोट बैंक में सेंध कैसे लगी?

पिछड़े वर्गों में भाजपा–जदयू की वापसी क्यों हुई?युवा वोटर क्यों दूर चला गया?तेजस्वी यादव को अब अपनी भूमिका विपक्ष में मजबूती से तय करनी होगी।

जन सुराज की सक्रियता—कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंसइधर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी चुनावी नतीजों के बाद तत्काल बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया है। पार्टी भले सीटें न जीत सकी हो, लेकिन उसके बढ़ते प्रभाव और संगठनात्मक ताकत को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा जारी है।

जन सुराज के दफ्तर में—समीक्षा बैठक

भविष्य की रणनीति

2029 चुनाव की तैयारी पर विस्तार से मंथन हुआ।ऐतिहासिक है 202 सीटों का बहुमत

बिहार की चुनावी राजनीति के इतिहास में किसी गठबंधन द्वारा इतनी भारी जीत बेहद कम देखने को मिली है।इस जीत के मायने हैं—जनता ने स्थिरता चुनी जातीय गोलबंदी कमजोर पड़ती दिखी विकास आधारित राजनीति की स्वीकृति बढ़ी एनडीए नेतृत्व पर भरोसा कायम रहाअब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनडीए अपनी ऐतिहासिक जीत को किस तरह ठोस शासन में बदलता है।

निष्कर्ष:

पटना में सियासत का पारा चढ़ा, जल्द बनेगी नई सरकार चुनावी समर खत्म होते ही राजनीति की असली जंग अब शुरू हुई है—

कैबिनेट कैसे बनेगी?कौन होंगे नए चेहरे?क्या नए समीकरण बनेंगे?इन सभी सवालों के जवाब आने वाले कुछ दिनों में साफ़ होने वाले हैं।फिलहाल पटना में सियासत अपने चरम पर है और हर पल नया अपडेट सामने आ रहा है।

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