Year: 2025
नक़ाब खींचने से तरक़्क़ी नहीं रुकती, सोच खींचने से रुकती है एक महिला, एक मुख्यमंत्री और वह सवाल जो लोकतंत्र को आईना दिखाता है
बी के झा पटना/नई दिल्ली, 20 दिसंबर लोकतंत्र में सत्ता की सबसे बड़ी परीक्षा उसके शिष्टाचार से होती है।और जब सत्ता सार्वजनिक मंच पर किसी महिला के शरीर, कपड़े या व्यक्तिगत चुनाव को छूती है—तो सवाल केवल शालीनता का नहीं, संवैधानिक गरिमा और स्त्री की आज़ादी का बन जाता है।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का…
संसद के शोर के बाद मुस्कान की चाय: जब प्रियंका गांधी की बात पर हंस पड़े प्रधानमंत्री और राजनाथ सिंह— शीतकालीन सत्र की ‘इनसाइड स्टोरी’,
बी के झा नई दिल्ली, 19 दिसंबर चुनाव सुधार और ‘वंदे मातरम्’ पर तीखी बहस, नारेबाजी और आरोप–प्रत्यारोप के बीच जब संसद का शीतकालीन सत्र अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचा, तो लोकतंत्र का एक अपेक्षाकृत सौम्य और मानवीय दृश्य भी सामने आया। शुक्रवार, 19 दिसंबर को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित…
