बी के झा
NSK

मैक्सिको सिटी / नई दिल्ली, 2 जनवरी
अमेरिका के पड़ोसी देश मेक्सिको में शुक्रवार को आए 6.5 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने एक बार फिर दुनिया को यह एहसास करा दिया कि धरती के भीतर चल रही हलचल कितनी भयावह रूप ले सकती है। इस भूकंप के झटके इतने तीव्र थे कि दक्षिणी और मध्य मेक्सिको के कई शहरों में लोग घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। राजधानी मैक्सिको सिटी से लेकर प्रसिद्ध पर्यटन नगरी अकापुल्को तक दहशत का माहौल देखने को मिला।प्रशांत तट के पास था भूकंप का केंद्र मेक्सिको की राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान एजेंसी (SSN) के अनुसार, भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.5 मापी गई। यह भूकंप भारतीय समयानुसार शाम 7 बजकर 28 मिनट पर दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र देश के दक्षिणी प्रांत गुरेरो में सैन मार्कोस शहर के निकट स्थित था, जो प्रशांत महासागर के तट और अकापुल्को रिसॉर्ट क्षेत्र के बेहद करीब है।भूकंप की गहराई लगभग 40 किलोमीटर बताई गई है, जिसके कारण झटके दूर-दूर तक महसूस किए गए।
राष्ट्रपति की प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में रोकनी पड़ी इस अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा का असर सत्ता के गलियारों तक भी पहुंचा। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम की नए साल की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस भूकंप के झटकों के कारण बीच में ही रोकनी पड़ी। कुछ समय बाद स्थिति सामान्य होने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस दोबारा शुरू की गई।
राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने तत्काल गुरेरो प्रांत की गवर्नर से संपर्क किया है और राहत एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन हालात पर करीबी निगरानी बनाए हुए है।
भूवैज्ञानिकों की राय:
‘रिंग ऑफ फायर’ में बढ़ रहा दबाव भूविज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, मेक्सिको का यह क्षेत्र प्रशांत रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है, जहां पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें लगातार एक-दूसरे से टकराती रहती हैं।प्रख्यात भूवैज्ञानिक डॉ. कार्लोस मेंडोज़ा का कहना है,“यह भूकंप कोकोस प्लेट और नॉर्थ अमेरिकन प्लेट के बीच तनाव का परिणाम है। इस क्षेत्र में ऊर्जा का संचय लगातार बढ़ रहा है, जिससे आने वाले समय में भी मध्यम से तीव्र भूकंपों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”
वहीं अंतरराष्ट्रीय भूकंप विश्लेषक डॉ. अंजलि वर्मा बताती हैं,“हाल के महीनों में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों—तुर्की, जापान, इंडोनेशिया और अब मेक्सिको—में भूकंपीय गतिविधियों में जो तेजी दिख रही है, वह वैश्विक टेक्टोनिक असंतुलन की ओर संकेत करती है। यह किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए चेतावनी है।”दुनिया के अन्य हिस्सों में भी धरती डोलीमेक्सिको से पहले भारत के पड़ोसी देशों में भी भूकंप की गतिविधियां दर्ज की गईं।नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार—भूटान में गुरुवार रात 9:52 बजे 3.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई मात्र 5 किलोमीटर थी।म्यांमार में भी 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसका केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में था।हालांकि इन भूकंपों से किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ इसे “लगातार बढ़ती भूकंपीय श्रृंखला” का हिस्सा मान रहे हैं।क्या बढ़ रहा है
भूकंप का खतरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंपों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी रिपोर्टिंग और तीव्रता पर अब ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। आधुनिक सिस्मोग्राफ और त्वरित सूचना तंत्र के कारण अब हर हलचल दर्ज हो रही है।फिर भी, यह सच है कि प्लेट सीमाओं वाले क्षेत्रों में रहने वाले देशों को आपदा प्रबंधन, मजबूत निर्माण तकनीक और जन-जागरूकता पर पहले से कहीं अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
