61 की उम्र में 20 पुश-अप: IMA में आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी का प्रेरक संदेश

बी के झा

NSK

देहरादून / नई दिल्ली, 14 दिसंबर

भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के ऐतिहासिक चेटवुड ड्रिल स्क्वायर पर शनिवार को अनुशासन, शौर्य और संकल्प का अद्भुत संगम देखने को मिला। पासिंग आउट परेड (पीओपी) में जब 491 युवा अफसर भारतीय सेना में कमीशन पाए, तो माहौल देशभक्ति के गर्व से सराबोर था। इस अवसर पर 14 मित्र देशों के 34 अफसर भी पासआउट हुए, जो अपने-अपने देशों की सेनाओं में सेवाएं देंगे। परेड की सलामी सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ली—और इसके बाद जो हुआ, उसने इस समारोह को इतिहास के पन्नों में दर्ज कर दिया।अनुशासन के साथ आत्मीयता का संदेश पीकिंग सेरेमनी के बाद सेना प्रमुख सीधे मैदान में उतरे।

औपचारिकताओं की दीवार तोड़ते हुए उन्होंने नए कमीशन प्राप्त अफसरों से अनौपचारिक बातचीत की, उनके परिवारजनों से मिले और उन्हें बधाइयाँ दीं। इसी बीच वह क्षण आया, जिसने हर कैडेट और अधिकारी में नया जोश भर दिया

61 वर्षीय आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने युवा अफसरों के साथ 20 पुश-अप लगाए।यह केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं था; यह नेतृत्व का वह जीवंत पाठ था, जो शब्दों से नहीं, कर्म से पढ़ाया जाता है। फिटनेस, अनुशासन और टीमवर्क—तीनों का एक साथ सजीव प्रदर्शन।‘लीड फ्रॉम द फ्रंट’ की मिसाल

सेना के सबसे वरिष्ठ अधिकारी का यह अंदाज़ ‘लीड फ्रॉम द फ्रंट’ की परंपरा को सशक्त करता दिखा। 61 वर्ष की उम्र में भी उनकी फुर्ती, संतुलन और उत्साह ने साबित कर दिया कि भारतीय सेना में नेतृत्व उम्र का मोहताज नहीं, समर्पण और अनुशासन का परिणाम होता है। युवा अफसरों के लिए यह संदेश साफ था—

सेवा में श्रेष्ठता, फिटनेस और मानवीय जुड़ाव साथ-साथ चलते हैं।परिवारों के साथ साझा किए यादगार पलजनरल द्विवेदी ने फोटो सेशन के दौरान कई कैडेट्स के परिवारजनों को अपने पास बुलाया, उनसे संवाद किया और उनके त्याग को नमन किया। अलग-अलग कंपनियों के जवानों को समूहों में इकट्ठा कर उन्होंने हर यूनिट के साथ समय बिताया। यह क्षण उन परिवारों के लिए अविस्मरणीय बन गया, जिन्होंने अपने बेटों को देश सेवा के लिए समर्पित किया है।

वैश्विक मैत्री का मंचआईएमए की इस पीओपी ने भारत की सैन्य कूटनीति की भी झलक दिखाई। 14 मित्र देशों के 34 अफसरों की मौजूदगी ने भारत को प्रशिक्षण और पेशेवर उत्कृष्टता के वैश्विक केंद्र के रूप में रेखांकित किया। यह मंच साझा मूल्यों, आपसी विश्वास और सहयोग का प्रतीक बना।

नई पीढ़ी के नाम संदेश समारोह का समापन गर्व और प्रेरणा के साथ हुआ।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी का संदेश स्पष्ट था—देश की आन, बान और शान की रक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि चरित्र, फिटनेस और मानवीय नेतृत्व से होती है।आईएमए से निकले ये 491 युवा अफसर जब अपनी-अपनी यूनिट्स में तैनाती पाएंगे, तो उनके साथ वह दृश्य भी जाएगा

जहाँ देश का सबसे वरिष्ठ सैनिक, मैदान में उतरकर, उनके साथ पसीना बहाता दिखा। यही भारतीय सेना की आत्मा है।

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