“है ना मोदी–नीतीश का जादू?” दीपक प्रकाश के मंत्री बनने पर तेज प्रताप का तंज, वायरल फोटो से गरमाई बिहार की सियासत

बी के झा

NSK News

पटना, 24 नवंबर

बिहार की राजनीति में “जादू”, “परिवारवाद” और “पावर इक्वेशन” का तड़का एक बार फिर लग गया है। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश, जिन्होंने न चुनाव लड़ा, न एमएलसी हैं—फिर भी सीधे नीतीश कैबिनेट में मंत्री बन जाने से सियासी गलियारों में भूचाल मचा हुआ है। अब इस विवाद में जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के अध्यक्ष और आरजेडी नेता तेज प्रताप यादव ने प्रवेश कर बयानबाजी को और तेज कर दिया है।तेज प्रताप ने आधी रात को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर कर पीएम नरेंद्र मोदी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला।

उन्होंने लिखा—“सासाराम में जमानत जब्त कराने वाले निर्दलीय उम्मीदवार के काउंटिंग एजेंट दीपक प्रकाश अब बिना चुनाव लड़े मंत्री बन गए। है ना मोदी–नीतीश का जादू?”उनके इस कटाक्ष भरे पोस्ट के बाद कमेंट्स की झड़ी लग गई और मामला तेजी से वायरल हो गया।वायरल फोटो और ‘जादू’ की राजनीति जिस फोटो का तेज प्रताप ने जिक्र किया है, वह दीपक प्रकाश की वही छवि है जिसमें वे निर्दलीय उम्मीदवार रामनारायण पासवान के काउंटिंग एजेंट के तौर पर नजर आते हैं।यह फोटो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि—जो व्यक्ति खुद अपनी मां के खिलाफ लड़ रहे उम्मीदवार का काउंटिंग एजेंट हो, वह आखिर मंत्री कैसे बन गया?

क्या यह ‘योग्यता’ है या ‘परिवारवाद’ का चरम रूप?तेज प्रताप ने इसी तथ्य को आधार बनाकर “जादूगर” शब्द का इस्तेमाल किया और नीतीश–मोदी पर आरोप मढ़ दिया कि यह सब राजनीतिक गणित का चमत्कार है, लोकतांत्रिक परंपरा नहीं।दीपक प्रकाश का उदय—बिना चुनाव, सीधे मंत्री!आमतौर पर बिहार की राजनीति में मंत्री वही बनता है जो— चुनाव जीते

या एमएलसी हो लेकिन इस पैटर्न से हटकर दीपक प्रकाश का मंत्री पद की शपथ लेना चौतरफा विवाद में बदल गया है।जब नीतीश कैबिनेट में रालोमो को एक सीट मिली, तो पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पत्नी स्नेहलता या चार विधायकों में से किसी को न चुनकर अपने बेटे को मंत्री पद के लिए आगे कर दिया।यही फैसला उनके लिए राजनीतिक संकट बन गया है—

विरोधी उन्हें “परिवारवाद का नया पोस्टर बॉय” बता रहे है।

तेज प्रताप का वार—“यह जनादेश का नहीं, जादू का असर”तेज प्रताप यादव का ट्वीट सिर्फ एक तंज नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है।

उन्होंने लिखा—“एक तरफ जमानत जब्त, दूसरी तरफ मंत्री की कुर्सी… इसे ही जादू कहते हैं।”उनके समर्थकों का कहना है कि यह नीतीश–मोदी गठबंधन की “बैकडोर पॉलिटिक्स” का उदाहरण है, जबकि विरोधी दलों ने भी कहा कि इससे लोकतंत्र की गरिमा पर सवाल उठता है।विपक्ष के हमले—‘परिवारवाद का चरम’, ‘नीतीश का दोहरा मानदंड’आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों ने इस मुद्दे को तुरंत लपक लिया। विपक्ष का तर्क—“जिस सरकार में 4 विधायकों को नजरअंदाज कर बेटे को मंत्री बनाया जाए, वहां परिवारवाद की पराकाष्ठा दिखती है।”“नीतीश कुमार हमेशा पारदर्शिता की बात करते हैं, लेकिन इस मंत्रिमंडल विस्तार में पारदर्शिता गायब दिखती है।”“मंत्री पद अब योग्यता से नहीं, रिश्तेदारी से मिल रहा है।

एनडीए खेमे की सफाई—‘योग्यता और विश्वास के आधार पर मिले पद’एनडीए नेताओं ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा—“

दीपक प्रकाश शिक्षित और व्यवहारिक नेता हैं।”“रालोमो कोटे का मंत्री चुनना पार्टी अध्यक्ष का अधिकार है।”“विपक्ष सिर्फ मुद्दे खोज रहा है।”हालांकि अंदरखाने सवाल उठ रहे हैं कि रालोमो के चार विधायकों को किन वजहों से नजरअंदाज किया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय—‘यह बिहार का नया पावर समीकरण’विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद तीन संकेत देता है—

1. एनडीए दलों के भीतर सत्ता-संतुलन के समीकरण बदल रहे हैं।

2. नीतीश कुमार अपने सहयोगियों को खुश रखने के लिए जोखिम भरे फैसले भी ले रहे हैं।

3. विपक्ष को एक बड़ा नैरेटिव मिल गया है—‘परिवारवाद बनाम जनादेश’।निष्कर्ष : बिहार की राजनीति में ‘जादू’ का नया दौर?

बिहार में राजनीतिक समीकरण अक्सर जादू, ड्रामा और अचानक होने वाले बदलावों से भरे रहते हैं।दीपक प्रकाश के मंत्री बनने की कथा भी ऐसी ही एक नई कड़ी है—जहां एक काउंटिंग एजेंट से सीधे मंत्री पद तक का सफर सवालों, आरोपों और तंजों से घिरा हुआ है।अब देखना होगा कि तेज प्रताप का यह हमला सिर्फ वायरल बयान साबित होता है या आने वाले दिनों में बिहार की सियासत में बड़ा मुद्दा बनता है।

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