बी के झा
नई दिल्ली, 26 नवंबर
कर्नाटक की राजनीतिक गहमागहमी बुधवार को तब और तेज हो गई, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहली बार यह स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता संतुलन को लेकर खींचतान जारी है।खरगे ने संकेत दिए कि यह विवाद जल्दी सुलझ जाएगा—“सोनिया जी और राहुल जी से चर्चा करूंगा… फिर इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा।”उन्होंने साफ कहा कि वे अगले 48 घंटे के भीतर राहुल गांधी से मुलाकात कर कर्नाटक संकट पर अंतिम निर्णय लेंगे और कोशिश होगी कि 1 दिसंबर, संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले स्थिति साफ कर दी जाए।
ढाई साल पूरे होते ही सत्ता साझेदारी का ‘पुराना समझौता’ फिर चर्चा में20 नवंबर को कांग्रेस सरकार के 5 साल के कार्यकाल का ढाई साल पूरा होते ही यह विवाद फिर सुर्खियों में आ गया।पार्टी के भीतर यह दावा लंबे समय से किया जाता रहा है कि 2023 में सरकार बनने से पहले सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच 2.5-2.5 साल का ‘‘पावर-शेयरिंग फॉर्मूला’’ तय हुआ था।हालांकि सिद्धारमैया इस दावे से इनकार करते रहे हैं।
उन्होंने दो दिन पहले ही कहा—“मैं पूरे 5 वर्ष मुख्यमंत्री रहूंगा, किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। मैं आगे भी बजट प्रस्तुत करता रहूंगा।”दिल्ली में डीके शिवकुमार गुट की सक्रियता—‘200% वह सीएम बनेंगे’दूसरी ओर, डीके शिवकुमार खेमे की हलचल अचानक बढ़ गई है।कर्नाटक के कई कांग्रेस विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।उनका कहना है कि 2.5 साल का करार खत्म हो चुका है, इसलिए अब सत्ता परिवर्तन होना चाहिए।डीके समर्थक विधायक इकबाल हुसैन ने दावा किया—“200 प्रतिशत, डीके शिवकुमार जल्द ही मुख्यमंत्री बनेंगे। खरगे जी ने हमारी बात ध्यान से सुनी है।”इसी गुट ने कांग्रेस आलाकमान के पास औपचारिक लिखित अर्जी भी दी है।सिद्धा गुट की मांग—“अटकलों पर तुरंत विराम लगाया जाए”सिद्धारमैया गुट भी अब खुलकर सामने आ गया है।लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा—
“पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री ने भी आलाकमान से कहा है कि जल्द स्थिति स्पष्ट की जाए।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तमाम अटकलों का समाधान अब सिर्फ दिल्ली में होगा।तीसरे चेहरे की एंट्री—गृह मंत्री परमेश्वर भी मैदान में स्थिति को और पेचीदा करते हुए राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने भी स्वयं को मुख्यमंत्री का दावेदार बताया है।
उन्होंने कहा—“मैंने पांच साल पार्टी अध्यक्ष के रूप में काम किया है, मुझे भी मौका मिलना चाहिए।”सतीश जारकीहोली ने इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“मांग करना गलत नहीं है… पर फैसला दिल्ली ही करेगी। हम सिर्फ दावेदार हो सकते हैं, निर्णायक नहीं।”खरगे का बयान और राजनीतिक संकेत
खरगे का ‘‘सोनिया जी, राहुल जी और मैं…’’ वाला बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।इससे यह स्पष्ट हुआ है कि शीर्ष नेतृत्व खुद इस मुद्दे में सीधे हस्तक्षेप करेगा।सूत्र बताते हैं कि—अगले 48 घंटे में खरगे–राहुल मुलाकात,उसके बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को दिल्ली तलब किए जाने की पूरी संभावना है।राजनीतिक विश्लेषकों की राय: “यह सिर्फ सीएम पद का संकट नहीं, 2028 की लड़ाई की शुरुआत है
”1. सत्ता संतुलन का ‘मायनिंग पॉइंट’राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कर्नाटक कांग्रेस का यह संकट केवल सीएम पद बदलने की बात नहीं है।यह 2028 के भावी नेतृत्व, जातीय गणित और संगठन की दिशा तय करने वाली लड़ाई है।एक वरिष्ठ विश्लेषक के शब्दों में—“कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया ओबीसी नेता हैं, जबकि डीके शिवकुमार वोक्कालिगा वर्ग के सबसे बड़े चेहरा हैं। दोनों की महत्वाकांक्षा स्वाभाविक है, टकराव अवश्यंभावी था।”
2. आलाकमान की परीक्षादूसरे विश्लेषक ने कहा—“यह संकट कांग्रेस हाईकमान की भी परीक्षा है। अगर वे स्थिति नहीं संभाल पाए, तो कर्नाटक में सरकार अस्थिर हो सकती है।”
3. राहुल–खरगे के लिए यह ‘प्रतिष्ठा का सवाल’दिलचस्प बात यह है कि कर्नाटक एकमात्र बड़ा राज्य है जहाँ कांग्रेस सत्तारूढ़ है।एक रणनीतिक विशेषज्ञ ने टिप्पणी की—“अगर यह सरकार डstabilize होती है, तो कांग्रेस की राष्ट्रीय छवि को बड़ा नुकसान होगा। इसलिए राहुल-कांग्रेस नेतृत्व इसे किसी कीमत पर टूटने नहीं देंगे।
”4. डीके शिवकुमार का जोखिमकुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं—“डीके शिवकुमार को सीएम बनाने पर भ्रष्टाचार मामलों और प्रवर्तन एजेंसियों की फाइलें बड़ा मुद्दा बन सकती हैं। पार्टी इस जोखिम को उठाने में झिझक सकती है।”अगले 48 घंटे होंगे निर्णायक
कर्नाटक का राजनीतिक तंत्र अगले 48 घंटों पर टिका है।आलाकमान किसके पक्ष में झुकता है—सिद्धारमैया?डीके शिवकुमार?या फिर तीसरा नाम?इस पर राज्य की राजनीति की दिशा तय होगी।एक राजनीतिक विश्लेषक ने बिलकुल स्पष्ट शब्दों में कहा—“कर्नाटक कांग्रेस इस समय अपने सबसे संवेदनशील मोड़ पर है। जो निर्णय लिया जाएगा, वह आने वाले पांच सालों की राजनीति ही नहीं, 2029 चुनावों में दक्षिण भारत में कांग्रेस की स्थिति निर्धारित करेगा।
NSK
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