चिकन नेक पर अभेद्य कवच: भारत–बांग्लादेश सीमा पर 12 फीट ऊंची स्मार्ट फेंसिंग, पूर्वोत्तर की ‘लाइफलाइन’ की नई सुरक्षा-रेखा

बी के झा

NSK News

नई दिल्ली/सिलीगुड़ी, 6 जनवरी

पड़ोसी देश बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता और सीमा-पार अपराधों की पृष्ठभूमि में भारत ने अपनी रणनीतिक चेतावनी को ठोस कार्रवाई में बदलते हुए भारत–बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा का नया अध्याय शुरू कर दिया है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक)—जो देश के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाली संकरी लेकिन जीवनरेखा समान पट्टी है—वहां सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र में 12 फीट ऊंची नई डिजाइन फेंसिंग (NDF) स्थापित कर दी है।

बीएसएफ इसे केवल बाड़ नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की दिशा में निर्णायक कदम मान रहा है।नई फेंसिंग: ऊंचाई, मजबूती और तकनीक का त्रिकोण बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार, नई डिजाइन की यह बाड़ काटने में समय लेने वाली, पार करना अत्यंत कठिन और संवेदनशील इलाकों के अनुरूप विशेष रूप से डिजाइन की गई है।इसके साथ लगाए गए पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे रियल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करते हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नियंत्रण कक्ष को तुरंत अलर्ट मिलता है, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया (Rapid Response) संभव हो पाती है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के शब्दों में,“चिकन नेक भारत के लिए सिर्फ भौगोलिक गलियारा नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से रीढ़ है। यहां सुरक्षा में कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”एरिया डोमिनेशन प्लान: तस्करी की जड़ पर प्रहार बीएसएफ ने अपने एरिया डोमिनेशन प्लान में भी बड़ा बदलाव किया है। अब बल केवल सीमा रेखा तक सीमित नहीं, बल्कि उन आंतरिक इलाकों को भी चिन्हित कर रहा है जहां से मवेशियों और अन्य प्रतिबंधित सामान को तस्करी नेटवर्क के जरिए सीमा तक पहुंचाया जाता है।आवश्यकता पड़ने पर टीमें भारतीय क्षेत्र के भीतर कई किलोमीटर तक जाकर छापेमारी कर रही हैं—ताकि तस्करी की श्रृंखला को जड़ से तोड़ा जा सके।

समुदाय आधारित पहल: भरोसे से सुरक्षा तक सीमा अपराधों पर लगाम लगाने के लिए बीएसएफ ने समुदाय-केंद्रित रणनीति भी अपनाई है। संदिग्ध तस्करों और टाउट्स के परिवारों से सीधे संवाद कर उन्हें अवैध गतिविधियों के कानूनी और सामाजिक दुष्परिणाम समझाए जा रहे हैं।अधिकारियों का दावा है कि इस भरोसा-निर्माण मॉडल से पिछले एक वर्ष में मवेशी और मानव तस्करी में उल्लेखनीय गिरावट आई है।आंकड़े बोलते हैं जनवरी 2025 से अब तक:₹8.5 करोड़ मूल्य की तस्करी सामग्री जब्त440 बांग्लादेशी, 152 भारतीय और 11 अन्य गिरफ्तार187 बांग्लादेशी नागरिकों को प्रक्रिया के बाद BGB को सौंपा गया जब्त सामग्री में मवेशी, सोना-चांदी, हथियार, गोला-बारूद और वन्यजीव उत्पाद शामिल हैं।

रक्षा विशेषज्ञ: पूर्वोत्तर सुरक्षा में गेम-चेंजररक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चिकन नेक में स्मार्ट फेंसिंग रणनीतिक गेम-चेंजर है।एक पूर्व सैन्य अधिकारी के अनुसार,“यह गलियारा अगर असुरक्षित हुआ, तो पूरा पूर्वोत्तर दबाव में आ सकता है। तकनीक और मानव बल का यह संयोजन दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

”राजनीतिक विश्लेषक: सुरक्षा के साथ कूटनीति भी जरूरी राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे सुरक्षा-सचेत लेकिन संतुलित कदम बताया।उनका कहना है कि“फेंसिंग जरूरी है, लेकिन इसके समानांतर भारत–बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संवाद और सीमा प्रबंधन सहयोग भी मजबूत होना चाहिए।

”हिंदू संगठन: अवैध घुसपैठ पर सख्ती का स्वागतकई हिंदू संगठनों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि सीमा पर अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय दबाव लंबे समय से चिंता का विषय रहा है।एक संगठन के प्रवक्ता ने कहा,“यह सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक स्थिरता की रक्षा का भी कदम है।

”विपक्षी दल: सुरक्षा जरूरी, पारदर्शिता भीविपक्षी दलों ने फेंसिंग को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते हुए सरकार से निरंतर संसदीय निगरानी और पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की।एक विपक्षी नेता बोले,“सुरक्षा के नाम पर नागरिक अधिकारों और स्थानीय समुदायों की आवाज़ अनसुनी न हो।

निष्कर्ष

चिकन नेक में 12 फीट ऊंची स्मार्ट फेंसिंग सिर्फ लोहे की दीवार नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है। बांग्लादेश में अस्थिरता के दौर में यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि पूर्वोत्तर की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा—चाहे वह तस्करी हो, घुसपैठ या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां।यह सुरक्षा, तकनीक और समुदाय—

तीनों के संतुलन से गढ़ी गई नई सीमा-नीति है, जो आने वाले वर्षों में भारत की सीमाई रणनीति की दिशा तय कर सकती है।

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