बी के झा
NSK

काहिरा/तेल अवीव/वॉशिंगटन / नई दिल्ली, 25 जनवरी
गाजा युद्धविराम को लेकर मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष दूत शनिवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात कर उनके लिए एक “खास संदेश” लेकर पहुंचे—जिसका सार साफ है: गाजा में सीजफायर के दूसरे चरण की ओर बढ़ा जाए।प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार यह मुलाकात ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद एवं मध्य पूर्व मामलों के प्रभावशाली सलाहकार जेरेड कुश्नर के साथ हुई। हालांकि बातचीत का आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन अमेरिकी प्रशासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया कि चर्चा का केंद्र अंतिम बंधक के अवशेषों की बरामदगी, गाजा का निरस्त्रीकरण (डिमिलिटराइजेशन) और भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था रहा।
अमेरिका का दबाव: युद्धविराम को स्थायित्व की ओर ले जाने की कोशिश
अमेरिका ट्रंप-मध्यस्थता वाले समझौते को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट रूप से सक्रिय है। व्हाइट हाउस के करीबी सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन चाहता है कि सीजफायर केवल अस्थायी विराम न रहे, बल्कि उसे स्थायी सुरक्षा ढांचे की ओर ले जाया जाए।
अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वे खुद को “डील मेकर इन चीफ” के रूप में स्थापित करना चाहते हैं—खासकर चुनावी वर्ष में।
नेतन्याहू की दुविधा: सुरक्षा, राजनीति और दबाव हालांकि नेतन्याहू की स्थिति आसान नहीं है। एक ओर अमेरिका का कूटनीतिक दबाव है, तो दूसरी ओर घरेलू राजनीति और बंधकों के परिवारों का आक्रोश।इजरायली मीडिया के अनुसार, नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि जब तक हमास अंतिम बंधक के अवशेष नहीं लौटाता, तब तक दूसरे चरण पर आगे बढ़ना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा होगा।रान ग्विली के परिवार—जिनका शव अब भी गाजा में बताया जाता है—ने हमास पर “जानबूझकर देरी” का आरोप लगाते हुए इजरायली सरकार से सख्त रुख अपनाने की मांग की है।
रफाह क्रॉसिंग: दूसरे चरण का सबसे बड़ा संकेत
विश्लेषकों के मुताबिक, सीजफायर के दूसरे चरण की सबसे ठोस पहचान होगी—गाजा और मिस्र के बीच रफाह बॉर्डर क्रॉसिंग का दोबारा खुलना।गाजा की प्रस्तावित तकनीकी सरकार के प्रमुख अली शाथ ने दावा किया है कि क्रॉसिंग अगले सप्ताह दोनों दिशाओं में खोल दी जाएगी। हालांकि इजरायल ने इस पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगाई है और कहा है कि इस मुद्दे पर कैबिनेट स्तर पर विचार होगा।फिलहाल, रफाह क्रॉसिंग का गाजा पक्ष इजरायली सेना के नियंत्रण में है, जो इसे केवल मानवीय मुद्दा नहीं बल्कि रणनीतिक सुरक्षा प्रश्न मानती है।हमास बनाम इजरायल: अवशेषों पर आरोप-प्रत्यारोप
हमास का कहना है कि उसने ग्विली के अवशेषों से जुड़ी “सारी उपलब्ध जानकारी” मध्यस्थों को दे दी है और आरोप लगाया है कि इजरायल खुद खोज अभियानों में बाधा डाल रहा है।वहीं इजरायल इस दावे को “भ्रामक” बताते हुए हमास पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहा है।
मिस्र की भूमिका: क्षेत्रीय स्थिरता का दांवमिस्र इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम क्षेत्रीय खिलाड़ी बनकर उभरा है। काहिरा रफाह क्रॉसिंग के तत्काल और पूर्ण रूप से खुलने के लिए जोर दे रहा है।मिस्र के विदेश मंत्री बदेर अब्देलअत्ती ने ट्रंप की नई गाजा शांति पहल से जुड़े अधिकारियों और गाजा के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि निकोलाय म्लादेनोव से बातचीत कर यह स्पष्ट किया कि—
“सीजफायर का दूसरा चरण ही गाजा के पुनर्निर्माण का मुख्य प्रवेश द्वार है।”मिस्र चाहता है कि इसमें—अंतरराष्ट्रीय निगरानी बल ़इजरायली सेनाओं की चरणबद्ध वापसीऔर नागरिक आवाजाही की बहाली शामिल हो।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की राय: ‘निर्णय की घड़ी’
यूरोपीय और अमेरिकी थिंक टैंकों से जुड़े विश्लेषकों का मानना है कि—यदि दूसरा चरण सफल होता है, तो यह गाजा युद्ध का वास्तविक टर्निंग पॉइंट हो सकता है।असफलता की स्थिति में संघर्ष फिर भड़कने का खतरा रहेगा।एक वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक के शब्दों में,“यह केवल सीजफायर नहीं, बल्कि युद्ध के बाद के गाजा की रूपरेखा तय करने की प्रक्रिया है—जहां अमेरिका, इजरायल, मिस्र और फिलिस्तीनी नेतृत्व सभी की साख दांव पर है।”
इजरायल का अगला कदम क्या होगा?
अब सवाल यही है कि नेतन्याहू किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं—क्या वे अमेरिकी दबाव के तहत दूसरे चरण को हरी झंडी देंगे?
या बंधकों के मुद्दे पर कठोर रुख अपनाकर प्रक्रिया को धीमा करेंगे?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले कुछ दिन निर्णायक होंगे।
क्योंकि गाजा का भविष्य अब केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता से जुड़ चुका है।
