बी के झा
NSK


नई दिल्ली/वॉशिंगटन/बीजिंग/तेहरान, 8 अप्रैल
पश्चिम एशिया में छाए युद्ध के बादलों के बीच अचानक घोषित दो सप्ताह का सीजफायर अब केवल अमेरिका और ईरान के बीच का समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का नया संकेत बनकर उभरा है।जहां एक ओर Donald Trump ने संघर्ष विराम की घोषणा कर दुनिया को राहत दी, वहीं अब सामने आ रही रिपोर्ट्स यह इशारा करती हैं कि इस पूरी कूटनीतिक कवायद के पीछे असली भूमिका चीन की थी, न कि केवल पाकिस्तान की।
पर्दे के पीछे की कूटनीति: “ड्रैगन” का दखल
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने पर्दे के पीछे सक्रिय भूमिका निभाते हुए ईरान को युद्धविराम के लिए मनाने में अहम भूमिका निभाई।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है:“चीन ने इस संकट को केवल कूटनीतिक अवसर नहीं, बल्कि अपनी वैश्विक ताकत दिखाने के मंच के रूप में देखा।”
पाकिस्तान की भूमिका: मध्यस्थ या संदेशवाहक?
हालांकि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के नाम सामने आए, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि
: पाकिस्तान ने संवाद की कड़ी जोड़ी
लेकिन असली दबाव और भरोसा चीन ने बनायाएक वरिष्ठ विश्लेषक के अनुसार:“पाकिस्तान मंच पर दिखा, लेकिन पटकथा कहीं और लिखी गई थी।”
सीजफायर की शर्त:
होर्मुज स्ट्रेटइस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है
: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना यही वह जलमार्ग है जहां से:दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता हैभारत की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा निर्भर करता है
भारत के लिए क्यों है “गुड न्यूज”?
भारत के लिए यह सीजफायर किसी राहत से कम नहीं:40% कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है50% से ज्यादा LNG सप्लाई प्रभावित थी90% LPG आयात पश्चिम एशिया से जुड़ाहालात इतने गंभीर थे कि कई भारतीय जहाज फारस की खाड़ी में फंस गए थे।अब:
टैंकर “ग्रीन सानवी” और “ग्रीन आशा” भारत पहुंच रहे हैं
सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य हो रही है
रक्षा विशेषज्ञों की राय: “यह अस्थायी शांति है
”रक्षा विशेषज्ञों का मानना है:यह स्थायी समाधान नहीं, बल्कि रणनीतिक विराम हैअमेरिका और ईरान दोनों अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैंभविष्य में फिर तनाव बढ़ सकता हैएक रक्षा विशेषज्ञ ने कहा:“यह युद्ध का अंत नहीं, बल्कि अगली चाल से पहले की शांति है।”
कानूनविदों और शिक्षाविदों की दृष्टि
कानून विशेषज्ञों का मानना है:अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्गों को बाधित करना गंभीर मुद्दा हैहोर्मुज का खुलना वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरीशिक्षाविदों के अनुसार:यह घटना “नए शीत युद्ध” की ओर संकेत करती हैजहां अमेरिका और चीन परोक्ष रूप से टकरा रहे हैं
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
विभिन्न देशों के विपक्षी दलों और आलोचकों ने सवाल उठाए हैं:क्या अमेरिका ने दबाव में आकर कदम पीछे खींचा?क्या चीन वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है?एक आलोचक ने कहा:“अगर युद्ध रोकने का श्रेय चीन को जाता है, तो यह वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव है।
आगे की राह: 14 दिन निर्णायकअब सबकी नजर अगले दो हफ्तों पर है:
क्या ईरान पूरी तरह सहयोग करेगा?
क्या स्थायी समझौता बनेगा?
या यह केवल अस्थायी राहत है?
निष्कर्ष
:ईरान-अमेरिका सीजफायर केवल एक कूटनीतिक घटना नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति के बदलते स्वरूप का आईना है।चीन की सक्रियता, अमेरिका की रणनीति और भारत की ऊर्जा निर्भरता—इन सबके बीच यह स्पष्ट हो गया है कि अब दुनिया एकध्रुवीय नहीं रही।यह शांति भले ही अस्थायी हो, लेकिन इसके संकेत दूरगामी हैं—
जहां युद्ध केवल मैदान में नहीं, बल्कि कूटनीति के बंद कमरों में भी लड़े जाते हैं।
