बी के झा
NSK

पटना, 13 अप्रैल
बिहार की राजनीति में एक बार फिर कानून, सत्ता और सियासत आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं। कुचायकोट से Amrendra Kumar Pandey उर्फ पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और सीए राहुल तिवारी के खिलाफ एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी किया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन कब्जाने की साजिश रची गई, ताले तोड़े गए और विरोध करने पर फायरिंग तक की गई।
वारंट जारी होते ही पुलिस सक्रिय हो गई है, जबकि सूत्रों के अनुसार आरोपी भूमिगत बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। अब मामला केवल एक विधायक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्ष ने इसे सीधे केंद्र की राजनीति और Amit Shah से जोड़ दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला गोपालगंज जिले के बेलवा गांव की 16 एकड़ 93 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। शिकायतकर्ता जितेंद्र राय ने प्राथमिकी में आरोप लगाया कि जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई, कमरों के ताले तोड़े गए और जानलेवा फायरिंग की गई।पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि मुख्य नामजद लोगों की तलाश जारी है। अब कोर्ट के गैरजमानती वारंट के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
गैरजमानती वारंट क्यों अहम है? कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार,
गैरजमानती वारंट तब जारी होता है जब अदालत को लगे कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा, अनुपस्थित है या गिरफ्तारी आवश्यक है।यह दोष सिद्धि नहीं है, लेकिन अदालत द्वारा मामले को गंभीर मानने का स्पष्ट संकेत है।
विपक्ष का बड़ा हमला: अमित शाह पर क्या आरोप?
इस पूरे प्रकरण पर विपक्षी दलों, खासकर Rashtriya Janata Dal ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक आरजेडी नेता ने बयान देते हुए कहा:“
जिस तरह बिहार में जदयू के नेताओं पर लगातार आरोप सामने आ रहे हैं, उसी तरह एक दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बिहार से जदयू का समूल नाश कर देंगे। अभी तो यह शुरुआत है।”इस बयान के कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं:
1. भाजपा-जदयू रिश्तों में अविश्वास का संकेतविपक्ष यह संदेश देना चाहता है कि भाजपा और जदयू की दोस्ती मजबूरी है, स्थायी भरोसे पर नहीं टिकी।
2. जदयू के कमजोर होते जनाधार पर हमलाआरजेडी का संकेत है कि जदयू अब अपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत खो रही है और भाजपा पर निर्भर होती जा रही है।
3. अमित शाह को रणनीतिक खिलाड़ी बताने की कोशिश विपक्ष यह धारणा बनाना चाहता है कि बिहार की राजनीति में अंतिम चाल भाजपा नेतृत्व ही चलता है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष ने इस मामले को केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सत्ता समीकरण से जोड़ दिया है।
उनके अनुसार:
विधायक पर कार्रवाई से जदयू की छवि पर असर पड़ेगा।विपक्ष भाजपा-जदयू संबंधों में दरार का नैरेटिव बनाना चाहता है।
अमित शाह का नाम लेकर विपक्ष राष्ट्रीय बनाम क्षेत्रीय दल की बहस खड़ी कर रहा है।
एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा:
“बिहार में हर कानूनी मामला जल्दी ही राजनीतिक कथा बन जाता है।”
जदयू की संभावित प्रतिक्रिया
Janata Dal (United) की ओर से संभावित रुख यह हो सकता है कि मामला न्यायालय में है और कानून अपना काम कर रहा है।
साथ ही पार्टी विपक्ष के अमित शाह संबंधी बयान को राजनीतिक उकसावा और भ्रामक प्रचार बता सकती है।
भाजपा क्या कह सकती है?
Bharatiya Janata Party की ओर से यह कहा जा सकता है कि:कानून अपना काम कर रहा है।
किसी आरोपी को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलेगा।
विपक्ष मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अनर्गल बयान दे रहा है।
कानूनविदों की राय
कानूनविदों का कहना है कि किसी विधायक पर मामला दर्ज होना और वारंट जारी होना न्यायिक प्रक्रिया है, इसे राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए।हालांकि, जब आरोपी जनप्रतिनिधि हो, तो मामला स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक बहस का विषय बन जाता है।
जनता क्या देख रही है?
जनता के सामने दो सवाल सबसे बड़े हैं:क्या कानून सब पर समान रूप से लागू होगा?क्या राजनीतिक दल आरोपों पर नैतिक जवाबदेही तय करेंगे?
निष्कर्ष
कुचायकोट विधायक पर गैरजमानती वारंट अब सिर्फ अदालत का मामला नहीं रहा। विपक्ष ने इसे अमित शाह, भाजपा-जदयू संबंध और बिहार के भविष्य से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।
अब लड़ाई केवल अदालत में नहीं, बल्कि जनमत, गठबंधन और सियासी भरोसे की अदालत में भी लड़ी जाएगी।
