बी के झा
NSK

पटना , 1 मई
भर्ती परीक्षाओं में नया नियम, नई चुनौतीबिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने अपनी भर्ती परीक्षाओं के पैटर्न में बड़ा बदलाव करते हुए अभ्यर्थियों के सामने एक नई परीक्षा चुनौती खड़ी कर दी है। अब तक चार विकल्पों (A, B, C, D) वाली पारंपरिक प्रणाली को बदलते हुए आयोग ने पांचवें विकल्प ‘E’ को शामिल किया है, जिसे “प्रयास नहीं किया गया” (Not Attempted) के रूप में परिभाषित किया गया है।यह बदलाव देखने में छोटा लग सकता है, लेकिन इसका असर सीधे परीक्षा की रणनीति, समय प्रबंधन और अभ्यर्थियों के मानसिक दबाव पर पड़ेगा।
क्या बदला है?
समझिए नया नियम आसान भाषा मेंअब हर प्रश्न के लिए अभ्यर्थी को एक विकल्प चुनना अनिवार्य होगा:A, B, C, D: यदि प्रश्न का उत्तर देना हैE: यदि प्रश्न छोड़ना हैयानि अब “कुछ भी न भरकर छोड़ देना” संभव नहीं होगा।अगर किसी प्रश्न में कोई विकल्प नहीं चुना गया, तो उसे “त्रुटि” माना जाएगा और उस पर 1/3 अंक की कटौती (नेगेटिव मार्किंग) लागू होगी।
राजस्थान मॉडल की नकल, लेकिन अधूरी तैयारी?यह प्रणाली पहले से ही राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) में लागू है।लेकिन यहां एक अहम फर्क है—RPSC अभ्यर्थियों को अंत में 10 मिनट का अतिरिक्त समय देता है, ताकि वे सुनिश्चित कर सकें कि कोई प्रश्न बिना विकल्प के न रह जाएBPSC ने फिलहाल ऐसा कोई अतिरिक्त समय देने की घोषणा नहीं की हैयही वजह है कि सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों के बीच असंतोष और सवाल दोनों बढ़ रहे हैं।
छात्रों की चिंता: “गलती से भी छूटा तो नुकसान”
अभ्यर्थियों का कहना है कि:परीक्षा के दबाव में अक्सर कुछ प्रश्न छूट जाते हैंOMR शीट भरते समय छोटी सी चूक भी भारी पड़ सकती हैअतिरिक्त समय न मिलने से जोखिम और बढ़ गया हैकई छात्रों का मानना है कि “नियम तो सख्त कर दिया गया, लेकिन सुविधा नहीं दी गई।”
शिक्षाविदों की राय: सुधार या दबाव?
शिक्षाविद इस बदलाव को दो नजरियों से देख रहे हैं:सकारात्मक पक्ष:हर प्रश्न का स्पष्ट उत्तर या ‘नॉट अटेम्प्टेड’ दर्ज होगामूल्यांकन अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगाOMR शीट में अस्पष्टता खत्म होगीनकारात्मक पक्ष:छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ेगासमय प्रबंधन की चुनौती और कठिन होगीछोटी तकनीकी गलती से अनावश्यक अंक कट सकते हैं
रणनीति में बदलाव: अब कैसे करें तैयारी?
विशेषज्ञों के अनुसार, अब अभ्यर्थियों को अपनी परीक्षा रणनीति बदलनी होगी:हर प्रश्न पर निर्णय लेना जरूरी होगा—Attempt या SkipOMR शीट भरने में विशेष सावधानी बरतनी होगीअंत के 5-10 मिनट केवल रिव्यू के लिए बचाकर रखना होगा
आयोग का तर्क: “पारदर्शिता और अनुशासन
”BPSC का कहना है कि यह बदलाव परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए किया गया है।आयोग के अनुसार:इससे मूल्यांकन में स्पष्टता आएगीअभ्यर्थियों की जवाबदेही बढ़ेगीपरीक्षा में अनुशासन सुनिश्चित होगा
विवाद का केंद्र: नियम बनाम सुविधा
पूरा विवाद इस बात पर केंद्रित है कि:“क्या सख्त नियम लागू करते समय समान स्तर की सुविधा भी दी जानी चाहिए?”छात्रों का तर्क है कि अगर RPSC मॉडल अपनाया गया है, तो उसकी सभी सुविधाएं भी लागू होनी चाहिए।
निष्कर्ष:
सुधार का इरादा, लेकिन क्रियान्वयन पर सवाल
BPSC का यह कदम निश्चित रूप से परीक्षा प्रणाली को अधिक संगठित बनाने की दिशा में एक प्रयास है, लेकिन इसके साथ जुड़े व्यावहारिक पहलुओं—खासकर अतिरिक्त समय—पर पुनर्विचार की जरूरत महसूस की जा रही है।
अंतिम शब्द:
अब परीक्षा केवल ज्ञान की नहीं, बल्कि “सटीकता और सतर्कता” की भी हो गई है।सवाल यही है—
क्या यह बदलाव प्रतिभा को निखारेगा या छात्रों पर अनावश्यक दबाव बढ़ाएगा?
