बी के झा
NSK


कोलकाता / नई दिल्ली, 1 मई
पश्चिम बंगाल में मतगणना से ठीक पहले EVM की सुरक्षा को लेकर उठा विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक और कानूनी टकराव का रूप ले चुका है। एक ओर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरना देकर EVM से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए, तो दूसरी ओर चुनाव आयोग और न्यायपालिका ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर मुहर लगा दी है।
TMC का धरना: “सिस्टम पर शक या सियासी रणनीति?
”कोलकाता में EVM स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर TMC नेताओं कुणाल घोष और शशि पांजा के नेतृत्व में करीब चार घंटे तक चला धरना इस बात का संकेत देता है कि पार्टी चुनाव परिणामों से पहले ही सतर्कता का संदेश देना चाहती है।पार्टी का आरोप था कि स्ट्रॉन्ग रूम के भीतर संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं और काउंटिंग से पहले गड़बड़ी की कोशिश की जा रही है।हालांकि, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद धरना समाप्त कर दिया गया—लेकिन सवाल बाकी रह गया: क्या यह वास्तविक चिंता थी या राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश?
चुनाव आयोग का जवाब: “EVM पूरी तरह सुरक्षित, आरोप बेबुनियाद”पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि:EVM स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सील और सुरक्षित हैं सभी प्रक्रिया राजनीतिक दलों के एजेंट्स की मौजूदगी में पूरी हुई किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश की कोई संभावना नहीं उन्होंने दो टूक कहा—“EVM में छेड़छाड़ का कोई स्कोप नहीं है।”
हाई कोर्ट का सख्त रुख: “बिना सबूत आरोप सिर्फ अटकलें”
कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी TMC को बड़ा झटका देते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा:काउंटिंग प्रक्रिया में दखल नहीं दिया जा सकताकेंद्र/PSU कर्मचारियों की नियुक्ति पूरी तरह वैध हैCCTV, माइक्रो ऑब्जर्वर और एजेंट्स की मौजूदगी पारदर्शिता सुनिश्चित करती हैअदालत ने साफ किया कि बिना ठोस सबूत के लगाए गए आरोप केवल “आशंकाएं” हैं और चल रही चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप उचित नहीं।
विश्लेषण: “नतीजों से पहले नैरेटिव सेट करने की कोशिश?”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम “प्री-रिजल्ट नैरेटिव” बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।अगर परिणाम उम्मीद के विपरीत आते हैं, तो पहले से ही EVM पर सवाल उठाकर राजनीतिक जमीन तैयार की जा सकती है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: आरोप-प्रत्यारोप तेज
BJP ने TMC पर “हार के डर से ड्रामा” करने का आरोप लगायाकांग्रेस और वाम दल ने पारदर्शिता की मांग दोहराई, लेकिन चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भरोसा भी जताया
निष्कर्ष:
लोकतंत्र की असली परीक्षा भरोसे की
बंगाल का यह विवाद सिर्फ एक चुनावी झगड़ा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसे की परीक्षा है।अगर हर चुनाव से पहले EVM पर सवाल उठेंगे, तो इसका असर सिर्फ नतीजों पर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास पर भी पड़ेगा।
अब सबकी नजरें मतगणना पर टिकी हैं।क्योंकि वही तय करेगा—यह विवाद “राजनीतिक शोर” था या “लोकतांत्रिक चिंता”।
