बी के झा
NSK


आबूधाबी/ न ई दिल्ली,15 मई
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत और संतुलित कूटनीति का परिचय दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पांच देशों के विदेश दौरे के पहले चरण में संयुक्त अरब अमीरात यानी संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी पहुंचकर न केवल रणनीतिक साझेदारी को नई धार दी, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश भी दिया कि भारत अपने मित्र देशों के साथ हर संकट की घड़ी में मजबूती से खड़ा है।
अबू धाबी एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया। यूएई सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका अभिनंदन किया और उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान किया गया। इसके बाद पीएम मोदी की मुलाकात यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से हुई। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत केवल औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि बदलते वैश्विक हालातों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई पर हाल में हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए साफ शब्दों में कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र की सुरक्षा और स्थिरता पर हमला स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी यूएई ने जिस संयम और धैर्य का परिचय दिया, वह पूरी दुनिया के लिए उदाहरण है।पीएम मोदी ने कहा कि भारत हर परिस्थिति में यूएई के साथ खड़ा रहेगा।
उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत शांति, स्थिरता और सहयोग की नीति पर विश्वास करता है तथा पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल होनी चाहिए।इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” का विशेष उल्लेख किया।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी माना जाता है। भारत सहित दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक इसी मार्ग से होने वाली तेल और गैस आपूर्ति पर निर्भर करती है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इस मार्ग का खुला और सुरक्षित रहना वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने यूएई सरकार का विशेष आभार जताते हुए कहा कि संकट की घड़ी में वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की जिस तरह देखभाल की गई, उसने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि यूएई ने भारतीय समुदाय को अपने परिवार का हिस्सा मानकर सुरक्षा और सहयोग दिया, जिसके लिए पूरा भारत आभारी है।इस यात्रा के दौरान भारत और यूएई के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर भी मुहर लगी। दोनों देशों ने “सामरिक रक्षा साझेदारी” को और मजबूत करने का फैसला लिया, जिससे रक्षा और सुरक्षा सहयोग को नई गति मिलेगी।
इसके अलावा रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी अहम सहमति बनी।गुजरात के वाडिनार में “शिप रिपेयर क्लस्टर” स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना भारत को समुद्री व्यापार और जहाज मरम्मत के क्षेत्र में नई ताकत देने वाली मानी जा रही है। साथ ही यूएई की ओर से भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर तथा निजी वित्तीय संस्थानों में लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा ने आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई दे दी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूएई के राष्ट्रपति के साथ तस्वीर साझा करते हुए उन्हें “भाई” संबोधित किया। यह केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि दोनों नेताओं के बीच गहरे व्यक्तिगत और राजनीतिक विश्वास का संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया संघर्ष और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, भारत की यह सक्रिय कूटनीति उसे वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और प्रभावशाली शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और रणनीतिक संतुलन का सक्रिय साझेदार बन चुका है।
