12 वर्षों में भारत की तस्वीर बदल दी’: शशि थरूर ने मोदी नेतृत्व को बताया ऐतिहासिक, उपलब्धियों के साथ चुनौतियों का भी किया उल्लेख

बी के झा

NSK News

‘ नई दिल्ली , 2 जुलाई

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद डॉ. शशि थरूर एक बार फिर अपने बेबाक राजनीतिक आकलन को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर लिखे अपने ताजा लेख में उन्होंने पिछले 12 वर्षों के शासनकाल का व्यापक मूल्यांकन करते हुए कहा है कि इस अवधि में भारत ने आर्थिक आधुनिकीकरण, प्रशासनिक दक्षता और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही संस्थागत स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की भागीदारी जैसे विषयों पर गंभीर चिंताएं भी व्यक्त की हैं।

डॉ. थरूर का यह लेख अंतरराष्ट्रीय मंच Project Syndicate में प्रकाशित हुआ, जिसे उनके कार्यालय ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया। लेख में उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियों और चुनौतियों—दोनों का संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए भारत की लोकतांत्रिक यात्रा पर अपने विचार रखे हैं।

भारत में बुनियादी परिवर्तन का दौर

थरूर ने अपने लेख में लिखा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारत ने आर्थिक सुधारों, डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढांचे के विस्तार और सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उनके अनुसार, इन प्रयासों ने देश की प्रशासनिक क्षमता को मजबूत किया है और भारत की वैश्विक छवि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।उन्होंने कहा कि यह दौर केवल नीतिगत बदलावों का नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन का भी रहा है, जिसने 21वीं सदी में भारत की दिशा और दशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उपलब्धियों के साथ जताई गंभीर चिंताएं

जहां थरूर ने मोदी सरकार की विकास यात्रा की सराहना की, वहीं उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और समाज के सभी वर्गों की समान भागीदारी को लेकर चिंता भी व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि आर्थिक और प्रशासनिक उपलब्धियों के समानांतर संस्थागत स्वतंत्रता तथा अल्पसंख्यकों के समावेशन के क्षेत्र में गिरावट देखने को मिली है, जो भविष्य के लिए गंभीर विमर्श का विषय है।उनके अनुसार, किसी भी लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि मजबूत संस्थाओं और सामाजिक समावेशिता से भी तय होती है।

नेहरू और इंदिरा गांधी के साथ मोदी का नाम

अपने लेख में डॉ. थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आजादी के बाद भारत के तीन सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में उनका स्थान निस्संदेह बन चुका है। उन्होंने लिखा कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद मोदी ऐसे नेता हैं, जिनकी नीतियां और निर्णय आने वाले दशकों तक भारत की दिशा तय करेंगे।थरूर ने उल्लेख किया कि 10 जून को नरेंद्र मोदी लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के लगातार कार्यकाल का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेहरू ने स्वतंत्रता के बाद पहले आम चुनाव से पूर्व भी लगभग पांच वर्षों तक देश का नेतृत्व किया था, जबकि इंदिरा गांधी का कुल कार्यकाल मोदी से अधिक रहा, लेकिन वह लगातार नहीं था।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

डॉ. शशि थरूर का यह लेख ऐसे समय सामने आया है, जब वह समय-समय पर प्रधानमंत्री मोदी की कुछ नीतियों और विदेश नीति की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करते रहे हैं। उनके इन बयानों को लेकर कांग्रेस के भीतर भी कई बार मतभेद सामने आए हैं। ऐसे में यह नया लेख एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि थरूर ने अपने लेख में न तो केवल प्रशंसा की है और न ही केवल आलोचना, बल्कि मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल का संतुलित मूल्यांकन प्रस्तुत करते हुए उपलब्धियों और चुनौतियों—दोनों को समान महत्व दिया है। यही कारण है कि उनका यह विश्लेषण राजनीतिक और बौद्धिक दोनों स्तरों पर व्यापक बहस का विषय बन गया है।

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