B K Jha

बांग्लादेश भारत से चाहता क्या है? चुनाव से पहले उफनता असंतोष, भारत-विरोध की राजनीति और अस्थिर भविष्य की आशंका

बी के झा नई दिल्ली/ढाका, 20 दिसंबर बांग्लादेश और भारत के संबंध एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां कूटनीति, राजनीति और सड़क की भावनाएं आपस में टकरा रही हैं। अगस्त 2024 में शेख़ हसीना के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद जिस अस्थिरता की आशंका जताई जा रही थी, वह अब फरवरी…

हिजाब विवाद की नई कड़ी: डॉक्टर नुसरत परवीन ने नहीं की जॉइनिंग, नीतीश सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला — सियासत, समाज और सिस्टम आमने-सामने

बी के झा पटना, 20 दिसंबर हिजाब को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल एक महिला डॉक्टर की नौकरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बिहार की प्रशासनिक संवेदनशीलता, धर्मनिरपेक्षता, सेवा शर्तों और राजनीतिक विमर्श का बड़ा प्रतीक बन गया है। आयुष चिकित्सक डॉक्टर नुसरत परवीन ने जॉइनिंग की अंतिम तिथि तक भी अपने पद…

यूक्रेन युद्ध के निर्णायक मोड़ पर पुतिन का ऐलान: शांति से पहले शक्ति प्रदर्शन, दुनिया अलर्ट — वैश्विक राजनीति, सैन्य रणनीति और कूटनीतिक टकराव पर विशेष विश्लेषण

बी के झा मास्को/ न ई दिल्ली, 19 दिसंबर रूस–यूक्रेन युद्ध एक बार फिर ऐसे चौराहे पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहां शांति की संभावनाओं और युद्ध के विस्तार—दोनों की परछाइयाँ एक साथ गहराती नजर आ रही हैं। इसी बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन का यह बयान कि रूसी सेना यूक्रेन में अपने “रणनीतिक…

संसदीय मर्यादा, विरोध की सीमा और उत्पादकता का संतुलन: पहले सत्र में सभापति सी.पी. राधाकृष्णन का स्पष्ट संदेश

बी के झा नई दिल्ली, 19 दिसंबर राज्यसभा के 269वें सत्र का समापन केवल विधायी आंकड़ों के साथ नहीं, बल्कि संसदीय गरिमा और विरोध की मर्यादा पर एक गंभीर बहस छोड़ गया। शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने विपक्षी सदस्यों के आचरण पर खुली और सख्त टिप्पणी करते हुए साफ शब्दों…

ग्रेटर बांग्लादेश का खतरनाक स्वप्न: उस्मान हादी की सोच, भारत की सीमाएं और दक्षिण एशिया की उथल-पुथल

बी के झा नई दिल्ली, 19 दिसंबर पड़ोसी देश बांग्लादेश में विद्रोही नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा केवल आंतरिक अस्थिरता की कहानी नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया की सुरक्षा, भारत की क्षेत्रीय अखंडता और कट्टरपंथी विचारधाराओं के उभार से जुड़ा एक गंभीर संकेत भी है। ढाका से चटगांव तक…

संसद के शोर के बाद मुस्कान की चाय: जब प्रियंका गांधी की बात पर हंस पड़े प्रधानमंत्री और राजनाथ सिंह— शीतकालीन सत्र की ‘इनसाइड स्टोरी’,

बी के झा नई दिल्ली, 19 दिसंबर चुनाव सुधार और ‘वंदे मातरम्’ पर तीखी बहस, नारेबाजी और आरोप–प्रत्यारोप के बीच जब संसद का शीतकालीन सत्र अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचा, तो लोकतंत्र का एक अपेक्षाकृत सौम्य और मानवीय दृश्य भी सामने आया। शुक्रवार, 19 दिसंबर को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित…

बांग्लादेश में भीड़तंत्र का उभार और सत्ता की वैधता पर सवाल: पूर्व राजनयिकों की चेतावनी, क्षेत्रीय स्थिरता पर संकट— ढाका से चटगांव तक फैली हिंसा, यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप

बी के झा ढ़ाका/ नई दिल्ली, 19 दिसंबर बांग्लादेश एक बार फिर गंभीर अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। इंकलाब मंच के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा ने ढाका से लेकर चटगांव तक कानून-व्यवस्था को झकझोर दिया है। मीडिया संस्थानों पर हमले, आगजनी, भारत विरोधी नारेबाजी और राजनयिक…

बुर्का विवाद से सियासी भूचाल: नीतीश कुमार के खिलाफ FIR, इल्तिजा मुफ्ती की पहल और राष्ट्रीय बहस — अधिकार, आस्था, कानून और राजनीति के टकराव पर विशेष रिपोर्ट

बी के झा नई दिल्ली/ श्रीनगर/ पटना, 19 दिसंबर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा कथित “बुर्का खींचने” का मामला अब केवल एक वीडियो या बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देशव्यापी राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म दे दिया है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी और पीडीपी नेता इल्तिजा…

समुदाय से बाहर विवाह, संपत्ति से बाहर बेटी: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला और निजी इच्छा की संवैधानिक सीमा

बी के झा नई दिल्ली, 19 दिसंबर यह समुदाय से बाहर विवाह करने पर पिता द्वारा बेटी को संपत्ति से वंचित करने का मामला जब सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा, तो वहां से भी बेटी को राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति के बंटवारे को लेकर उसकी…

तीन मिनट की लोकसभा, 111% उत्पादकता और लोकतंत्र का विरोधाभास* — शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन संसद के भीतर शोर, बाहर सवाल

बी के झा नई दिल्ली, 19 दिसंबर संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया, लेकिन इसका अंतिम दिन भारतीय संसदीय इतिहास में एक गहरे प्रतीक के रूप में दर्ज हो गया। लोकसभा मात्र तीन मिनट चली, राज्यसभा करीब बीस मिनट, और इसके बावजूद लोकसभा अध्यक्ष ने पूरे सत्र की उत्पादकता…