बी के झा
NSK

पटना /नई दिल्ली, 15 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) में टिकट बंटवारे को लेकर जबरदस्त बवाल मच गया है। बुधवार को पटना स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में उस वक्त हंगामा मच गया जब औराई विधानसभा सीट से टिकट कटने के विरोध में पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक रामसूरत राय के समर्थक जमकर नारेबाजी करने लगे।
“6 करोड़ में टिकट बेचा गया”—समर्थकों का आरोप रामसूरत राय के समर्थकों ने पार्टी दफ्तर में पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी ने औराई विधानसभा सीट का टिकट 6 करोड़ रुपए में बेचा है। उनका कहना था कि रामसूरत राय ने 2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन प्रत्याशी को 48 हजार से अधिक वोटों से हराया था, फिर भी इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया गया।
प्रदर्शनकारियों ने पार्टी के शीर्ष नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “रामसूरत राय ने क्षेत्र में सड़क, बिजली, पुल और अन्य विकास कार्यों की झड़ी लगा दी थी, लेकिन टिकट काटकर उनके साथ अन्याय किया गया है।”उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पार्टी अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करती, तो वे ‘बीजेपी उम्मीदवार रमा निषाद को हराने का अभियान चलाएंगे।’
कौन हैं रमा निषाद?
इस बार औराई सीट से रमा निषाद को बीजेपी ने प्रत्याशी बनाया है। रमा निषाद, पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी हैं। अजय निषाद पहले बीजेपी में थे, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने पर वे कांग्रेस में शामिल हो गए और वहीं से चुनाव लड़े थे, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा।अब वे दोबारा बीजेपी में लौटे हैं, और इसी दौरान उनकी पत्नी रमा निषाद को टिकट मिल गया।
रामसूरत राय के समर्थक इसे “राजनीतिक सौदा” बता रहे हैं। उनका सवाल है—“जो नेता कुछ महीने पहले तक बीजेपी की आलोचना कर रहे थे, उनकी पत्नी को अचानक टिकट कैसे मिल गया?”
रामसूरत राय की नाराजगी सोशल मीडिया पर भी झलकी बीजेपी विधायक रामसूरत राय ने टिकट कटने के बाद अपनी नाराजगी सोशल मीडिया पर भी जाहिर की। मंगलवार (14 अक्टूबर) को उन्होंने अपने ‘X’ पोस्ट में लिखा—2020 के विधानसभा चुनाव में मैंने औराई से 48 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी, जो पूरे बिहार में सबसे बड़ा अंतर था। 5 वर्षों में मैंने क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया। फिर भी पार्टी ने टिकट काटकर उन लोगों की पत्नी को टिकट दे दिया, जिन्होंने हाल ही में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस से चुनाव लड़ा और हारे।
पार्टी को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
”नेताओं पर गंभीर आरोप, पार्टी ने बताई ‘आरजेडी की साजिश’रामसूरत राय के समर्थकों ने प्रदेश नेतृत्व पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि “उपमुख्यमंत्री सम्राट सिंह, विनोद तावड़े और धर्मेंद्र प्रधान ने मिलकर 6-6 करोड़ में टिकट बेचे हैं।”
उनका दावा है कि पार्टी में टिकट बंटवारे की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और “पैसे वालों को प्राथमिकता” दी गई।हालांकि बीजेपी नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। एक वरिष्ठ बीजेपी प्रवक्ता ने कहा-यह सब आरजेडी की साजिश है। हमारे कार्यकर्ता नहीं, बल्कि विपक्ष ने अपने गुर्गों को भेजकर पार्टी दफ्तर में हंगामा कराया ताकि एनडीए गठबंधन की छवि खराब की जा सके।”
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि टिकट बंटवारे को लेकर उठ रहे सवाल बीजेपी के लिए चिंता का विषय हैं, खासकर तब जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले से ही बीजेपी नेतृत्व से नाराज़ बताए जा रहे हैं।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अरुणेश मिश्रा कहते हैं—चुनावी सीज़न में टिकटों का लेन-देन कोई नई बात नहीं है। यह आज की राजनीति की कड़वी सच्चाई बन चुकी है—जो जितना बड़ा दल, उसकी टिकट की कीमत उतनी ज्यादा।
लेकिन यह विवाद बीजेपी के संगठन अनुशासन और छवि दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।
निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 के पहले चरण से पहले ही बीजेपी के भीतर उठी यह बगावत पार्टी नेतृत्व के लिए सिरदर्द साबित हो रही है। रामसूरत राय जैसे पुराने नेता का असंतोष और समर्थकों का सड़क पर उतरना न केवल पार्टी की एकता को चुनौती दे रहा है, बल्कि विपक्ष को भी हमले का नया मौका दे रहा है। अब देखना होगा कि पार्टी इस ‘टिकट विवाद’ पर क्या कदम उठाती है—सुलह या सर्जरी।
