बिहार चुनाव की बड़ी खबर: प्रशांत किशोर नहीं लड़ेंगे विधानसभा चुनाव, राघोपुर से जन सुराज ने उतारा चंचल सिंह को उम्मीदवार, तेजस्वी यादव के खिलाफ मैदान में उतरने का दावा, अब उठे कई राजनीतिक सवाल

बी के झा

NSK

पटना / नई दिल्ली, 15 अक्टूबर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है।जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) ने इस बार खुद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है।

लंबे समय से यह अटकलें चल रही थीं कि वे राघोपुर सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं — वही सीट, जहां से राजद नेता तेजस्वी यादव चुनाव लड़ते हैं।लेकिन अब इन अटकलों पर विराम लग गया है, क्योंकि जन सुराज पार्टी ने राघोपुर से अपने उम्मीदवार के रूप में चंचल सिंह का नाम घोषित कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?प्रशांत किशोर ने कुछ महीने पहले ऐलान किया था कि वे या तो करगहर (रोहतास) या राघोपुर (वैशाली) सीट से चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं।करगहर सीट पर पहले ही पार्टी उम्मीदवार का ऐलान हो चुका था।राघोपुर को लेकर उन्होंने खुद कहा था कि वे वहां जाकर जनता की राय के बाद फैसला करेंगे।लेकिन सोमवार देर रात जन सुराज पार्टी की ओर से जारी सूची में जब राघोपुर से चंचल सिंह का नाम आया, तो यह स्पष्ट हो गया कि प्रशांत किशोर खुद मैदान में नहीं उतरेंगे।इस फैसले के साथ ही कई राजनीतिक समीकरणों और चर्चाओं ने नया मोड़ ले लिया है।

जन सुराज पार्टी की अब तक की तैयारी जन सुराज पार्टी अब तक 116 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है।इनमें 25 आरक्षित सीटें और 91 सामान्य सीटें शामिल हैं।इन 91 सीटों में से 31 उम्मीदवार अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) से,21 ओबीसी समुदाय से और21 मुस्लिम उम्मीदवार हैं।पार्टी ने 9 अक्टूबर 2025 को अपनी पहली लिस्ट जारी की थी जिसमेंकर्पूरी ठाकुर की पोती,पूर्व केंद्रीय मंत्री RCP सिंह की बेटी,और एक भोजपुरी गायक को टिकट दिया गया था।दूसरी लिस्ट में 65 नए नाम जोड़े गए, जिससे पार्टी के चुनावी नेटवर्क और रणनीति का दायरा काफी बढ़ गया।जन सुराज का लक्ष्य बिहार की सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना है।

बिहार चुनाव की तारीखेंचुनाव आयोग के मुताबिक,बिहार में पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को होगी,दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को,और 14 नवंबर को मतगणना होगी।जन सुराज ने कई सीटों पर पहले से ही प्रचार अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन राघोपुर से प्रशांत किशोर के मैदान में न उतरने से उनके समर्थकों में हल्की निराशा देखी जा रही है।

JDU का हमला: “धन के बदले कमजोर उम्मीदवार”प्रशांत किशोर के चुनाव न लड़ने के फैसले पर जेडीयू की प्रतिक्रिया तीखी रही।जेडीयू प्रवक्ता अनुप्रिया ने कहा —प्रशांत जी का राघोपुर सीट से खुद न लड़ना और एक कमजोर उम्मीदवार उतारना कोई संयोग नहीं, बल्कि सौदेबाजी का परिणाम है।तेजस्वी यादव से ‘मोटी रकम’ लेकर उन्होंने केवल दिखावे के लिए उम्मीदवार दिया है।वे खुद को बिहार की राजनीति बदलने वाला बताते हैं, लेकिन असल में राजनीति को ‘धन कमाने का माध्यम’ बना लिया है।”

अनुप्रिया ने यह भी कहा कि प्रशांत किशोर “दूसरे केजरीवाल” साबित हो रहे हैं, जो एक ओर बदलाव की बात करते हैं, और दूसरी ओर उन्हीं पुरानी राजनीतिक चालों में उलझ जाते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय: ‘PK का फैसला रणनीतिक भी, जोखिमभरा भी’राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत किशोर का मैदान में न उतरना एक रणनीतिक कदम भी हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषक अजय कुमार सिंह का कहना है —PK ने शायद यह समझा कि इस चुनाव में व्यक्तिगत जीत से ज्यादा पार्टी के संगठन विस्तार पर ध्यान देना जरूरी है।लेकिन यह भी सच है कि राघोपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से पीछे हटना उनके समर्थकों और विरोधियों — दोनों को संकेत देता है कि PK इस चुनाव में सीधी लड़ाई से बचना चाहते हैं।”

कई विश्लेषकों ने यह भी माना कि तेजस्वी यादव के खिलाफ न उतरना PK की राजनीतिक छवि को कमजोर कर सकता है, क्योंकि वे लगातार तेजस्वी की नीतियों पर हमलावर रहे हैं।

अंदरखाने क्या है राजनीति?बिहार के सियासी गलियारों में चर्चा है कि राघोपुर सीट से चंचल सिंह को टिकट देना “PK और तेजस्वी के बीच किसी अंदरूनी समझौते” का हिस्सा हो सकता है।हालांकि जन सुराज पार्टी के सूत्र इसे सिरे से खारिज करते हैं।

पार्टी के प्रवक्ता ने कहा —हम किसी गठजोड़ के तहत नहीं, बल्कि जनता की राय से उम्मीदवार तय करते हैं।प्रशांत किशोर का ध्यान इस बार पार्टी की जीत और भविष्य की बड़ी राजनीतिक भूमिका पर है।”

निष्कर्ष:

‘PK’ का अगला कदम क्या होगा?प्रशांत किशोर ने इस बार भले ही चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया हो, लेकिन उनकी पार्टी का अभियान जारी है।वे लगातार बिहार के जिलों का दौरा कर रहे हैं और जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं।राजनीतिक हलकों में अब सबसे बड़ा सवाल यही है —

क्या PK भविष्य में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं या यह चुनाव उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक अभ्यास है?

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