बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली,15 अक्टूबर 2025,
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासी सरगर्मियां तेज़ होती जा रही हैं। एनडीए गठबंधन में जहां बीजेपी के टिकट बंटवारे को लेकर अंदरूनी रार की खबरें आ रही हैं, वहीं जनता दल (यूनाइटेड) ने आज अपने पहले उम्मीदवारों की सूची जारी करने का ऐलान किया है।जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर साफ कहा कि “एनडीए में सब कुछ एकदम व्यवस्थित है, किसी तरह का मतभेद नहीं है।
उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी की खबरें पूरी तरह अफवाह हैं।”आज जारी होगा जेडीयू का पहला लिस्ट, नीतीश कल से चुनाव प्रचार में उतरेंगे संजय झा ने बताया कि पहले चरण के उम्मीदवारों की सूची आज दोपहर तक जारी कर दी जाएगी, जबकि दूसरे चरण की सूची कल सार्वजनिक की जाएगी।उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल (16 अक्टूबर) से समस्तीपुर और दरभंगा में अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे।
झा ने कहा—जेडीयू में कोई सिरफुटौवल नहीं है। हर निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जानकारी और सहमति से लिया जाता है। पार्टी में सभी फैसले लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होते हैं, और सभी नेता एकजुट हैं।”
एनडीए में सबकुछ ठीक है—‘यूनिफाइड एलायंस’ पर जोर संजय झा ने दो टूक कहा कि एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग, उम्मीदवारों की घोषणा और प्रचार रणनीति को लेकर सबकुछ तय है।पूरा एनडीए एक है,
हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनाना।उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि महागठबंधन अभी तक सीटों और उम्मीदवारों पर सहमति नहीं बना पाया है, जबकि एनडीए अपनी तैयारी पूरी कर चुका है।
उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी पर बोले—‘सिर्फ मीडिया की कहानी’हाल के दिनों में यह चर्चा जोरों पर थी कि आरएल एसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन से नाराज़ हैं।
इस सवाल पर झा ने साफ कहा—उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी की खबरें सिर्फ मीडिया में गढ़ी जा रही अफवाहें हैं। एनडीए में सबकुछ ठीक है। नीतीश कुमार हमेशा सक्रिय रहते हैं और हर फैसले पर बारीकी से नजर रखते हैं।
उन्होंने आगे जोड़ा—कुछ लोग झूठा नेरेटिव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता चुनाव परिणामों में उन्हें जवाब देगी।”
‘तीन नेताओं ने पार्टी को गिरवी रखा’—आरोपों पर बोले झा, “यह चुनावी ओछी राजनीति”प्रेस वार्ता के दौरान एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि जेडीयू के ही एक वरिष्ठ नेता ने आप, ललन सिंह और विजय सिन्हा पर आरोप लगाया है कि आपने मिलकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अंधेरे में रखकर पार्टी को बीजेपी के हाथों गिरवी रख दिया है।
इस सवाल पर कुछ क्षण मौन रहने के बाद संजय झा ने मुस्कराते हुए कहा—चुनावी मौसम में ऐसे आरोप-प्रत्यारोप आम बात हैं। मैं ऐसी ओछी बातों को नजरअंदाज करना ही बेहतर समझता हूँ।
पार्टी में किसी तरह की गुटबाज़ी नहीं है।”
“चिराग पासवान सीएम फेस हैं?”—इस सवाल पर झा ने देखा आसमान और बोले…जब उनसे यह पूछा गया कि क्या बीजेपी चिराग पासवान को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की तैयारी कर रही है और नीतीश कुमार सिर्फ चुनावी प्रतीक भर हैं, तो झा कुछ देर के लिए आसमान की ओर देखते रहे और फिर बोले—यह सब सिर्फ लफ्फाजी है। सच्चाई यह है कि वर्तमान में भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं और भविष्य में भी वही रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि “नीतीश कुमार न केवल एनडीए के सबसे अनुभवी नेता हैं बल्कि बिहार की जनता का भरोसेमंद चेहरा भी हैं। कोई भी पार्टी उनकी लोकप्रियता से इनकार नहीं कर सकती।”‘
तेजस्वी से बातचीत’ के सवाल पर बोले—‘सफेद झूठ’पत्रकारों ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तेजस्वी यादव और राहुल गांधी से “गुप्त बातचीत” चल रही है ताकि चुनाव बाद महागठबंधन के साथ जाने का रास्ता खुला रहे?
इस पर संजय झा ने हंसते हुए जवाब दिया—यह सब सफेद झूठ है।
ना तो नीतीश कुमार हमसे नाराज़ हैं और ना ही किसी महागठबंधन से कोई बात चल रही है। तेजस्वी परेशान हैं, इसलिए ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं।
”राजनीतिक पंडितों की राय:
अंदरखाने कुछ तो पक रहा है”हालांकि
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार और बीजेपी के रिश्तों में कुछ तल्ख़ी जरूर बनी हुई है।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बीजेपी इस चुनाव में चिराग पासवान को तरजीह देकर भविष्य के नेतृत्व का संकेत दे रही है, जिससे एनडीए के भीतर सत्ता समीकरण बदल सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. देवेंद्र सिंह का कहना है—नीतीश कुमार फिलहाल एनडीए के चेहरा हैं, लेकिन बीजेपी की रणनीति यह इशारा कर रही है कि चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर समीकरण बदल सकते हैं। यही कारण है कि अंदरखाने कुछ न कुछ पक रहा है।
निष्कर्ष:
नीतीश अब भी ‘केंद्र में’, लेकिन सियासी समीकरण बदलते दिख रहे जेडीयू का पहला लिस्ट जारी होने जा रहा है, और एनडीए एकजुटता दिखाने की पूरी कोशिश कर रहा है।हालांकि, संजय झा की मुस्कराहट और सवालों पर आई चुप्पी इस बात का संकेत दे गई कि बिहार की राजनीति इस बार बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है।
अब देखना यह होगा कि टिकट बंटवारे और सीट समीकरणों के बाद क्या नीतीश कुमार वाकई एनडीए के स्थायी चेहरा बने रहेंगे, या 2025 का चुनाव सत्ता का नया समीकरण लिखेगा।
