बारात किसी की, दूल्हा नीतीश कुमार — अब कहानी बदली! NDA के ‘बराबरी फॉर्मूले’ से शुरू हुआ बिहार की राजनीति का नया युग

बी के झा

NSK

पटना/ नई दिल्ली, 12 अक्टूबर

बिहार की राजनीति में एक युग समाप्त हो गया है। वह दौर जब कहा जाता था “बारात किसी की भी हो, दूल्हा नीतीश कुमार ही होंगे” — अब इतिहास बनने जा रहा है।2025 के विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सीट बंटवारे का फार्मूला तय कर दिया है — भाजपा (BJP) और जेडीयू (JDU) अब बराबर-बराबर 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। इस फॉर्मूले ने न केवल बिहार की सियासत का संतुलन बदल दिया है, बल्कि नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य की दिशा भी तय कर दी है।

NDA का नया संतुलन: बराबरी का सौदा, बदला समीकरण पिछले 90 घंटों से चली लंबी बातचीत के बाद जो फार्मूला सामने आया है, वह बिहार की सत्ता समीकरण का चेहरा बदलने वाला है।भाजपा ने “बराबरी के सम्मान” का सिद्धांत अपनाते हुए अब स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार अब ‘बड़े भाई’ नहीं, बल्कि ‘समान साझेदार’ हैं।इसके साथ ही चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को 6 सीटें, और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 6 सीटें मिली हैं।इस बार का बंटवारा सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेतों का है — संकेत यह कि बिहार अब ‘नीतीश मॉडल’ से ‘मोदी मॉडल’ की तरफ बढ़ चुका है।

“बड़े भाई” का युग खत्म — नीतीश की घटती ताकत का संकेतनीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा हमेशा “केंद्र में छोटा, बिहार में बड़ा” के फॉर्मूले पर टिकी रही है।लेकिन इस बार का बंटवारा बताता है कि भाजपा अब उन्हें बराबरी पर रखकर मैदान में उतार रही है।2020 के विधानसभा चुनावों में जेडीयू केवल 43 सीटों तक सिमट गई थी — जो उसके इतिहास का सबसे कमजोर प्रदर्शन था।यह वही चुनाव था जिसने भाजपा को बिहार में निर्णायक बना दिया और नीतीश को मजबूर किया कि वे एक और यू-टर्न लेकर लालू यादव के पाले में चले जाएं।अब भाजपा ने उस इतिहास को याद रखकर रणनीति बनाई है। पार्टी का मानना है कि “जनता अब नीतीश नहीं, मोदी के चेहरे पर वोट देगी।”राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि “2025 का चुनाव नीतीश कुमार का नहीं, नरेंद्र मोदी का चुनाव होगा।

संकेत पहले ही मिल चुके थेइस बदलाव के संकेत उस वक्त ही मिल गए थे, जब ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत 75 लाख महिलाओं के खातों में ₹10,000 की राशि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भेजी गई।यह पहली बार था जब किसी मुख्यमंत्री की योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री के हाथों हुआ — और नीतीश कुमार मंच पर सहभागी भर रहे।नीतीश के एक करीबी नेता ने तब सफाई दी थी —नीतीश जी चाहते हैं कि योजना की गूंज पूरे देश में सुनाई दे।”लेकिन जानकारों के मुताबिक यह राजनीतिक परिपक्वता नहीं, राजनीतिक विवशता थी।नीतीश अब भाजपा के ‘नेतृत्व वाले NDA’ में एक सीनियर पार्टनर नहीं, सहयोगी पार्टनर बन चुके हैं।

“बारात किसी की, दूल्हा नीतीश कुमार” — अब अतीत का नारा1990 के दशक से लेकर 2015 तक बिहार की राजनीति में एक स्थायी वाक्य था — “बारात किसी की भी हो, दूल्हा नीतीश कुमार होंगे।”मतलब यह कि चाहे गठबंधन कोई भी बने, अंततः मुख्यमंत्री कुर्सी नीतीश कुमार को ही मिलती थी।पर अब यह लॉजिक टूट चुका है।2025 के चुनावों में चेहरा नरेंद्र मोदी का होगा, मंच नीतीश कुमार का, लेकिन नियंत्रण भाजपा का।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह चुनाव नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर का ‘अंतिम अध्याय’ साबित हो सकता है।

भाजपा की रणनीति: “स्थिरता और साझा नेतृत्व”भाजपा ने इस बार सीटों के साथ-साथ नैरेटिव भी अपने पक्ष में कर लिया है।पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा का लक्ष्य नीतीश को सम्मान के साथ मंच देना है, लेकिन असली चेहरा ‘डबल इंजन की सरकार’ के रूप में मोदी को बनाना है।पार्टी को उम्मीद है कि महिला वोट, युवा वर्ग और पिछड़े तबकों में मोदी का करिश्मा निर्णायक साबित होगा।

निष्कर्ष:

नीतीश का आख़िरी चुनाव?2025 का बिहार चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि ‘विरासत बनाम भविष्य’ की जंग होगी।नीतीश कुमार अब भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, लेकिन बिहार की राजनीति में अब स्टेयरिंग भाजपा के हाथ में है।यह वही क्षण है जब ‘नीतीश युग’ समाप्त और ‘NDA का नया युग’ शुरू हो गया है।बारात अब भी वही है, पर दूल्हा बदल गया है —और इस बार, दूल्हा है “नरेंद्र मोदी”।

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