बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 16 अक्टूबर
भाजपा का ‘चुनावी महायुद्ध’: 40 स्टार प्रचारकों की सेना तैयार बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सबसे ताकतवर टीम मैदान में उतार दी है। पार्टी ने गुरुवार को अपने 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे दिग्गजों के साथ-साथ भोजपुरी सिनेमा के चार बड़े सितारे—पवन सिंह, रवि किशन, मनोज तिवारी और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ शामिल हैं।बीजेपी की यह सूची किसी चुनावी दस्तावेज़ से अधिक एक रणनीतिक चार्ट की तरह है—जहां हर चेहरा अपने क्षेत्र, जातीय समीकरण और जनभावना के हिसाब से ‘वोट बूस्टर’ की भूमिका निभाएगा।
मोदी-शाह-योगी: भाजपा के तीन इक्के
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी के पास तीन ऐसे चेहरे हैं, जो हर चुनाव में विपक्ष के लिए ‘त्रिशूल’ साबित होते हैं —नरेंद्र मोदी, जिनका नाम अपने आप में ब्रांड है;अमित शाह, जो रणनीति के शतरंज के उस्ताद हैं;और योगी आदित्यनाथ, जिनकी आक्रामक छवि जनसभा में आग लगा देती है।इन तीनों की एक-एक रैली बिहार के किसी भी जिले में चुनावी हवा बदलने की क्षमता रखती है। भाजपा नेताओं का कहना है कि “बिहार में एनडीए की रैलियों का केंद्र बिंदु यही तीन चेहरे रहेंगे।”
5 राज्यों के सीएम करेंगे प्रचार बीजेपी ने अपने स्टार प्रचारकों में 5 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल कर राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश भी दिया है।
इनमें यूपी के योगी आदित्यनाथ, असम के हिमंता बिस्वा सरमा, मध्यप्रदेश के मोहन यादव, महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस और दिल्ली की रेखा गुप्ता शामिल हैं।इन नेताओं की रैलियां राज्यवार जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के साथ-साथ बीजेपी के ‘डबल इंजन सरकार’ के संदेश को और मजबूत करेंगी।
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ की रैलियों की मांग सबसे अधिक है — दर्जनों प्रत्याशी अपनी सभा में “योगी का आशीर्वाद” पाने की मांग कर रहे हैं।
भोजपुरी सितारों से चमका प्रचार मंच भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह, मनोज तिवारी, रवि किशन और निरहुआ बिहार की जनता के दिलों में खास जगह रखते हैं।बीजेपी ने इस बार इन चारों को स्टार प्रचारक बनाकर यह साफ कर दिया है कि वह ‘सांस्कृतिक कनेक्शन’ के जरिये हर वर्ग तक पहुंचना चाहती है।पवन सिंह के हालिया बीजेपी जॉइन करने के बाद से पार्टी का युवा वर्ग और भोजपुरी बेल्ट में उत्साह दोगुना हुआ है।मनोज तिवारी और रवि किशन पहले से ही भाजपा के लोकप्रिय चेहरे हैं, जबकि निरहुआ की लोकप्रियता पूर्वांचल से लेकर सीमांचल तक मजबूत मानी जाती है।
अश्विनी चौबे और गिरिराज सिंह जैसे पुराने योद्धा भी शामिलबीजेपी ने अपने वरिष्ठ नेताओं को भी स्टार प्रचारक सूची में प्रमुखता दी है।पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, गिरिराज सिंह, नंदकिशोर यादव, राजीव प्रताप रूडी और रवि शंकर प्रसाद जैसे अनुभवी चेहरे भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती देंगे।इन नेताओं को खासतौर पर उन इलाकों में जिम्मेदारी दी गई है जहां बीजेपी के पुराने वोट बैंक को पुनः सक्रिय करना है।
विपक्ष अब भी ‘फंसा’ बंटवारे मेंजहां बीजेपी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर चुकी है, वहीं विपक्षी महागठबंधन अब तक यह तय नहीं कर पाया है कि कौन कितनी सीट पर लड़ेगा।तेजस्वी यादव, कांग्रेस और वीआईपी के बीच अभी भी “सीट बंटवारे की गुत्थी” सुलझी नहीं है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि “जहां बीजेपी का हर प्रचारक मैदान में उतर चुका है, वहीं महागठबंधन के नेता अब भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की तारीखें बदलने में व्यस्त हैं।”एक वरिष्ठ विश्लेषक के शब्दों में —राजनीति में रणनीति से ज्यादा समय मायने रखता है। बीजेपी ने मैदान कब्जा लिया है, विपक्ष अभी नक्शा बना रहा है।”
भाजपा की ‘वन मैन मिशन’ को टीम मिशन में बदला गयाबीजेपी की यह सूची इस बात का भी संकेत है कि अब पार्टी सिर्फ मोदी इफेक्ट पर निर्भर नहीं, बल्कि कलेक्टिव लीडरशिप पर भरोसा कर रही है।हर प्रचारक को क्षेत्रवार रणनीति के साथ जोड़ा गया है — कोई युवा मतदाता, कोई महिला वर्ग, तो कोई जातीय समीकरण संभालेगा।यानी यह केवल प्रचार नहीं, बल्कि “माइक्रो पॉलिटिकल इंजीनियरिंग” का एक शानदार उदाहरण है।
निष्कर्ष:
जब एक तरफ बीजेपी के 40 रणबांकुरे युद्धभूमि में तैयार हैं, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन अब भी अपने शिविर की सीमाएं तय कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने यह फिर साबित कर दिया है कि चुनाव किसी भी स्तर का हो, बीजेपी उसे “पूर्ण युद्ध” की तरह लड़ती है।अगर विपक्ष जल्द एकजुट नहीं हुआ, तो राजनीतिक विशेषज्ञों की चेतावनी सच साबित हो सकती है —बिहार 2025 का चुनाव बीजेपी के लिए औपचारिकता और विपक्ष के लिए अस्तित्व की परीक्षा बन सकता है।”
