बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर
गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान ने एक बार फिर देश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। ‘घुसपैठियों’ को लेकर शाह के बयान के बाद कांग्रेस ने उन पर करारा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों से पहले ध्रुवीकरण (Polarization) की राजनीति को हवा दे रही है।शाह ने शुक्रवार को ‘दैनिक जागरण’ के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन की स्मृति में आयोजित एक व्याख्यान में कहा था कि “कुछ राजनीतिक दल घुसपैठियों को अपने वोट बैंक की तरह देखते हैं। गुजरात और राजस्थान की सीमाओं पर घुसपैठ क्यों नहीं होती?”इस बयान के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि अमित शाह देश के भीतर नफरत और भय का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
जयराम रमेश का तंज: ‘शाह ने बना लिए दो स्वदेशी हथियार’कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा —अमित शाह अब दो स्वदेशी रूप से विकसित जनसंहारक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं —पहला, Weapon of Mass Disinformation (व्यापक दुष्प्रचार का हथियार)और दूसरा, Weapon of Intermediate Mass Polarization (वृहद स्तर पर ध्रुवीकरण का हथियार)।
”रमेश ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके नेता अब जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक और सांप्रदायिक बहसें खड़ी कर रहे हैं।पवन खेड़ा का सवाल: “11 साल से गृह मंत्री क्या कर रहे थे?”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी अमित शाह पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि गृह मंत्री ने 10 अक्टूबर को हिंदू-मुस्लिम विवाद को हवा देने वाली टिप्पणी कर चुनावी ध्रुवीकरण की कोशिश की।खेड़ा ने कहा,अगर जैसा शाह दावा करते हैं कि मुस्लिम आबादी घुसपैठ के कारण बढ़ी है, तो पिछले 11 वर्षों से देश के गृह मंत्री के तौर पर वे क्या कर रहे थे?
क्या यह उनकी नाकामी नहीं है?”खेड़ा ने आरोप लगाया कि अमित शाह ने जल्दबाजी में बयान दिया और जब उन्हें एहसास हुआ कि यह उल्टा पड़ सकता है, तो उन्होंने अपना पोस्ट तुरंत हटा लिया।कांग्रेस ने रखे आंकड़े, भाजपा पर पलटवार कांग्रेस ने अपने बचाव में ठोस आंकड़े भी पेश किए।खेड़ा ने कहा कि 2005 से 2013 के बीच कांग्रेस सरकारों ने 88,792 बांग्लादेशी नागरिकों को निर्वासित किया था, जबकि भाजपा के 11 वर्षों के शासनकाल में यह संख्या 10,000 से भी कम रही।उन्होंने तंज कसते हुए कहा —खाली बर्तन ज्यादा खड़कते हैं। भाजपा सिर्फ बातें करती है, काम के आंकड़ों में पीछे है।”
भाजपा की रणनीति पर सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमित शाह का यह बयान आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की “परीक्षित रणनीति” का हिस्सा हो सकता है।भाजपा लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे को अपने कोर एजेंडे के रूप में रखती आई है। लेकिन कांग्रेस का कहना है कि इस बार पार्टी को ध्रुवीकरण के जरिए लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
निष्कर्ष
अमित शाह के बयान ने जहां भाजपा के समर्थकों में उत्साह जगाया है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी ध्रुवीकरण का नया अध्याय बता रहा है।सवाल यह है कि क्या घुसपैठ का मुद्दा चुनावी माहौल में फिर एक बार “हिंदू-मुस्लिम” बहस का रूप ले लेगा, या जनता इस बार रोटी-रोज़गार और विकास जैसे सवालों को प्राथमिकता देगी?देश की निगाहें अब आगामी चुनावी रैलियों और भाजपा के अगले कदम पर टिकी हैं।
