बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 31 जनवरी
1 फरवरी की सुबह 11 बजे, संसद का केंद्रीय कक्ष केवल एक वित्तीय दस्तावेज़ का गवाह नहीं बनेगा, बल्कि भारत के युवा भविष्य की दिशा तय करने वाले ऐलानों का मंच बनेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब वित्त वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी, तो करोड़ों युवाओं की निगाहें एक ही सवाल पर टिकी होंगी—
क्या यह बजट सिर्फ आंकड़ों का होगा या अवसरों का?शिक्षा और रोजगार: NEP 2020 की अग्निपरीक्षाराष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू हुए पांच वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। अब सवाल नीति का नहीं, नतीजों का है। शिक्षाविदों का मानना है कि बजट 2026, NEP की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है।
वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. (डॉ.) अनिल त्रिपाठी कहते हैं—“नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य रोजगारोन्मुख शिक्षा है। लेकिन इसके लिए केवल सिलेबस बदलना काफी नहीं, शिक्षकों की ट्रेनिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री–अकादमिक लिंक पर बड़े निवेश की जरूरत है।”युवाओं के बीच सबसे बड़ी उम्मीद स्किल-बेस्ड एजुकेशन और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन को लेकर है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में।AI स्किल: बजट का गेमचेंजर?
लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल (LSSC) के सर्वे ने सरकार के सामने एक स्पष्ट मांग रखी है—
AI स्किल बजट में कम से कम 40% की बढ़ोतरी।10 शहरों और 160 कंपनियों पर आधारित इस सर्वे के मुताबिक, आने वाले वर्षों में सबसे ज्यादा रोजगार उन्हीं युवाओं को मिलेगा जिनके पास:AI और मशीन लर्निंगडेटा एनालिटिक्सऑटोमेशन और उभरती टेक्नोलॉजीवर्टेक्स ग्रुप के संस्थापक गगन अरोड़ा का कहना है—“बेरोजगारी दर भले ही 5 प्रतिशत पर स्थिर हो, लेकिन स्किल गैप आज भी बड़ी चुनौती है। अगर AI स्किल पर आक्रामक निवेश नहीं हुआ, तो डेमोग्राफिक डिविडेंड बोझ बन सकता है।”
राजनीतिक विश्लेषण: युवाओं को संदेश या चुनावी निवेश?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि युवा मतदाताओं के लिए सरकार का संदेश भी है।राजनीतिक विश्लेषक संजय दीक्षित मानते हैं—“सरकार जानती है कि 2029 की राजनीति की नींव अभी से युवाओं के भरोसे पर रखी जा रही है। रोजगार और स्किल पर फोकस, एक दीर्घकालिक राजनीतिक निवेश है।”वित्त मंत्री द्वारा बजट के बाद 30 कॉलेज विद्यार्थियों से सीधा संवाद भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है—ताकि सरकार ‘नीति निर्माता’ नहीं, बल्कि ‘युवा संवादकर्ता’ के रूप में दिखे।
केंद्र सरकार का पक्ष: भविष्य की तैयारी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बजट में:AI और डिजिटल स्किल मिशन का विस्तारइंडस्ट्री-लिंक्ड स्किल प्रोग्रामशिक्षकों की री-स्किलिंगटियर-2 और टियर-3 शहरों में टेक्नोलॉजी हबजैसे कदमों पर जोर हो सकता है।एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक—“भारत को सिर्फ जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनाना लक्ष्य है। AI स्किलिंग उसी दिशा में निवेश है।
”विपक्ष का हमला: “नारे बहुत, नौकरियां कम”
हालांकि विपक्ष सरकार के दावों से सहमत नहीं दिखता।कांग्रेस और वाम दलों ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे बजट में ठोस रोजगार आंकड़ों और जमीनी असर की कमी पर सवाल उठाएंगे।एक विपक्षी नेता का कहना है—“AI की बात अच्छी लगती है, लेकिन सवाल यह है कि गांव और कस्बों का युवा कब तक केवल ‘भविष्य की तैयारी’ करता रहेगा?
उसे आज नौकरी चाहिए।”विपक्ष यह भी मांग कर रहा है कि:सरकारी भर्तियों की समयबद्ध घोषणाअप्रेंटिसशिप और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी निजी क्षेत्र को रोजगार सृजन के लिए बाध्यकारी प्रोत्साहन जैसे उपाय बजट में शामिल हों।
निष्कर्ष:
आंकड़ों से आगे, अवसरों की जरूरत
Budget 2026 युवाओं के लिए सिर्फ सब्सिडी या स्कीमों का पुलिंदा नहीं होना चाहिए, बल्कि स्पष्ट रोडमैप होना चाहिए—कौन सी स्किल?कितनी नौकरियां?
किस समय-सीमा में?अगर यह बजट AI, शिक्षा और रोजगार को जोड़ने में सफल होता है, तो यह केवल वित्तीय वर्ष नहीं, बल्कि भारत के युवा भविष्य का टर्निंग पॉइंट बन सकता है।
अब सबकी नजरें 1 फरवरी पर हैं—
क्या यह बजट युवाओं के सपनों को उड़ान देगा या फिर उम्मीदें एक बार फिर भाषणों में सिमट जाएंगी?
