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लोकतंत्र का अधूरा सपना: चुनावी शुचिता, वैचारिक पतन और भारतीय गणराज्य पर हामिद अंसारी की कठोर टिप्पणी
बी के झा नई दिल्ली, 31 जनवरी भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने देश की लोकतांत्रिक और चुनावी व्यवस्था पर एक गंभीर और असहज करने वाला आत्ममंथन प्रस्तुत किया है। अपनी नई पुस्तक ‘Arguably Contentious: Thoughts on a Divided World’ में अंसारी न केवल भारतीय लोकतंत्र की सीमाओं को रेखांकित करते हैं, बल्कि यह…
