बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 22 नवंबर
केरल में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होना अधिकारियों के लिए खतरे की घंटी बन गया। तिरुवनंतपुरम सिटी साइबर पुलिस ने इस मामले में गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह सिर्फ एक वीडियो का मामला नहीं, बल्कि चुनावी माहौल को भ्रमित करने की कोशिश का संकेत माना जा रहा है।
कैसे पकड़ा गया फर्जी वीडियो?अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को नियमित साइबर गश्त (Cyber Patrol) के दौरान एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह संदिग्ध वीडियो मिला।वीडियो में—CEC ज्ञानेश कुमार की फर्जी तस्वीर और मोर्फ्ड वीडियो इस्तेमाल किया गया था स्थानीय निकाय चुनावों के बारे में झूठी जानकारी फैलाई जा रही थी जांच अधिकारियों का अनुमान है कि यह वीडियो अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित किया गया होगा, जिसके कारण स्कैनिंग तेज कर दी गई है।
कड़ी धाराओं में केस दर्ज अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।इसके साथ ही आईटी एक्ट की धारा 66C (Identity Theft) भी जोड़ी गई है।यह धारा डिजिटल पहचान चुराने और किसी की तस्वीर/वीडियो को फर्जी तरीके से उपयोग करने पर लागू होती है।अधिकारियों के अनुसार यह अपराध—चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप मतदाताओं को गुमराह करना संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने का प्रयासके बराबर माना जाता है।
फर्जी वीडियो हटाने के लिए साइबर पुलिस सक्रियराज्य में चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी तैयारियों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने साइबर निगरानी कड़ी कर दी है।अब तक—विभिन्न प्लेटफॉर्म से कई फर्जी फोटो व वीडियो हटाए गए दुष्प्रचार से जुड़े कंटेंट की पहचान के लिए विशेष टीम बनाई गई सोशल मीडिया ट्रैफ़िक का “रियल-टाइम स्कैनिंग” हो रहा हैअधिकारियों के अनुसार यह कदम आवश्यक था, क्योंकि चुनावी सीजन में फेक कंटेंट मतदाताओं को भ्रामक सूचना देकर प्रभावित कर सकता है।
चुनावी विशेषज्ञों की राय—“Election Manipulation की नई चाल”चुनावी विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटना दर्शाती है कि अब चुनावों को प्रभावित करने के लिए डीपफेक और मॉर्फिंग जैसे आधुनिक तकनीकों का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है।विशेषज्ञों का कहना है—“CEC या अन्य संवैधानिक अधिकारी की पहचान का दुरुपयोग लोकतंत्र पर सीधा हमला है। चुनाव आयोग को ऐसे मामलों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनानी चाहिए।”
सख्त कार्रवाई की तैयारी पुलिस का कहना है कि वीडियो बनाने वालों उसे एडिट करने वालोंऔर इसके प्रसार में शामिल व्यक्तियों को जल्द ही चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।सीनियर अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल फोरेंसिक टीम की मदद से वीडियो की “सोर्स ट्रैकिंग” शुरू हो चुकी है।
सार
यह मामला सिर्फ एक फर्जी वीडियो का नहीं, बल्कि चुनावी माहौल में दुष्प्रचार को लेकर बढ़ती डिजिटल चुनौती का बड़ा उदाहरण है। केरल पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई कर यह साफ कर दिया है कि चुनाव संबंधी गलत सूचना फैलाने वालों पर अब कड़ी कानूनी कार्रवाई तय है।
