बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 13 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही विपक्षी महागठबंधन में सीट बंटवारे और सत्ता-संघर्ष को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। रविवार को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव दिल्ली से लौटते ही एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन पर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया।तेजस्वी यादव दिल्ली में IRCTC मामले की पेशी के लिए गए थे, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात किए बिना पटना लौट आए। इसके तुरंत बाद राजद सांसद मनोज झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक रहिम का दोहा साझा किया। दोहे में लिखा था:रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर न मिले, मिले गांठ परिजाय।मनोज झा ने लिखा, “हर अवसर के लिए प्रासंगिक…
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दोहे के माध्यम से मनोज झा ने राजद-कांग्रेस गठबंधन की नाजुक स्थिति की ओर इशारा किया है। दोहे का भाव स्पष्ट है: संबंध नाजुक होते हैं, झटके में टूट जाने पर उन्हें जोड़ना मुश्किल होता है और अगर जुड़ भी जाए तो गांठ रह जाती है। इसके जरिए यह संकेत दिया गया कि महागठबंधन का समीकरण किसी भी झटके से प्रभावित हो सकता है।
सीट बंटवारे को लेकर तनातनी
महागठबंधन में सीट बंटवारे पर लंबे समय से खींचतान चल रही है। राजद का मानना है कि कांग्रेस को केवल उतनी सीटें मिलनी चाहिए, जितनी उन्होंने 2020 में सफलतापूर्वक लड़ी थीं। 2020 में राजद ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि महागठबंधन को सरकार बनाने में 12 सीटों का अंतर पड़ गया था।कांग्रेस ने बिहार में अपने प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और राहुल गांधी की यात्राओं के जरिए राजद पर दबाव बढ़ाया है। इससे ना केवल मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सहमति बन पाई है, बल्कि सीटों के बंटवारे पर भी अंतिम निर्णय नहीं हो पा रहा है।
मुकेश सहनी ने भी जताया महागठबंधन की अस्वस्थता
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के नेता मुकेश सहनी ने हाल ही में कहा कि महागठबंधन अस्वस्थ है, लेकिन “दिल्ली के इलाज से सब ठीक हो जाएगा।” सहनी ने यह भी इशारा किया कि जब तेजस्वी को ही मुख्यमंत्री पद के लिए सहमति नहीं मिल रही, तो उनके और डिप्टी सीएम के पदों की मांग का सवाल ही नहीं उठता।
मनोज झा का ट्वीट और राजनीतिक संदेश
राजनीतिक गलियारों में मनोज झा के ट्वीट को महागठबंधन में किसी प्रकार की नाराजगी और असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि राजद का दावा है कि गठबंधन बने रहेगा और सीट बंटवारे का औपचारिक ऐलान शीघ्र ही किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार के चुनावी रण में गठबंधन की मजबूती और चुनावी रणनीति पर अब कांग्रेस के रुख का असर काफी महत्वपूर्ण होगा। दोहरे संदेश और सोशल मीडिया के माध्यम से दिए गए संकेतों ने राजनीतिक चर्चा को नया आयाम दे दिया है।
