ED ने रॉबर्ट वाड्रा पर कसा शिकंजा! संजय भंडारी मनी लॉन्ड्रिंग केस में बने नौवें आरोपी; 6 दिसंबर को अहम सुनवाई, कांग्रेस बोली—“राजनीतिक प्रतिशोध”, विशेषज्ञों ने कहा—“2024 के बाद केसों की रफ्तार फिर तेज

बी के झा

नई दिल्ली, 20 नवंबर

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई का दायरा और कस दिया है। ब्रिटेन में रह रहे हथियार कारोबारी संजय भंडारी से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने वाड्रा को नौवां आरोपी बनाते हुए एक विस्तृत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) विशेष पीएमएलए कोर्ट में दाखिल की है।6 दिसंबर को राउज़ एवेन्यू कोर्ट इस चार्जशीट पर सुनवाई करेगी, जो आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल को और गरमा सकती है।

दूसरी चार्जशीट, मामला और गंभीर हुआ यह पहली बार नहीं है जब रॉबर्ट वाड्रा ED के निशाने पर आए हों। इससे पहले जुलाई में एजेंसी ने हरियाणा के शिकोहपुर ज़मीन सौदे में कथित अनियमितताओं को आधार बनाकर उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।

ED के अनुसार:भंडारी और वाड्रा के बीच लंदन की संपत्ति को लेकर वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है।एजेंसी का दावा है कि भंडारी के प्रभाव और सौदों से जुड़े कुछ वित्तीय निशान वाड्रा तक जाते हैं।वाड्रा से पहले भी कई दौर की पूछताछ की जा चुकी है।हालांकि वाड्रा सार्वजनिक रूप से कई बार यह कह चुके हैं कि “लंदन में मेरी कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष संपत्ति नहीं है।

भंडारी का प्रत्यर्पण अटका, लेकिन जांच जारी हथियार डीलर संजय भंडारी साल 2016 में आयकर विभाग की रेड के बाद लंदन भाग गया था।ब्रिटेन की अदालत पहले ही उसका प्रत्यर्पण अनुरोध खारिज कर चुकी है।जुलाई 2024 में दिल्ली की अदालत ने उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था।ED ने 2017 में भंडारी पर PMLA के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था, जो 2015 के ब्लैक मनी कानून में दाखिल आयकर आरोप-पत्र पर आधारित था।

कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया—“चुनाव आते ही ED सक्रिय हो जाती है”

ED की नई चार्जशीट पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को कड़े शब्दों में घेरा।कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा—

यह सत्ता का दुरुपयोग है।

हर चुनाव या किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से पहले ED को आगे कर विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश होती है। रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ केसों को बार-बार खींचकर BJP अपना राजनीतिक एजेंडा चलाना चाहती है।

कांग्रेस प्रवक्ता सुहैल खान का बयान—“यह जांच नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध का नया अध्याय है। भाजपा के खिलाफ बोलने का यही परिणाम होता है। लेकिन सच्चाई अंत में सामने आएगी।

BJP की प्रतिक्रिया—“कानून सबके लिए बराबर”वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा—अगर कोई निर्दोष है तो अदालत में साबित कर दे। कांग्रेस हर भ्रष्टाचार के केस को राजनीतिक रंग देती है। देश जानता है कि वाड्रा परिवार के सौदों पर गंभीर सवाल पहले से उठते रहे हैं।”

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?“

एक केस से दूसरे केस तक धारा जोड़ने की ED रणनीति”*

*राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ED की नई चार्जशीट केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभावों से भी भरी हुई है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डॉ. मनीषा सिंह का कहना है—2024 लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष की एकजुटता बढ़ी है। ऐसे में ED और CBI की गतिविधियों का अचानक तेज होना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है। लेकिन यह भी साफ है कि एजेंसियां अब ‘लिंक्ड इन्वेस्टिगेशन’ की नीति पर काम कर रही हैं—एक केस से निकलकर दूसरे केस का रास्ता खोलती हुई।”

पूर्व ब्यूरोक्रेट और कानूनी विशेषज्ञ अजय तिवारी का मत—अगर भंडारी की संपत्तियों और वाड्रा से जुड़े दस्तावेजों में मजबूत सबूत मिलते हैं, तो यह केस राजनीतिक हलचलों के केंद्र में आ सकता है। अभी मामला शुरुआती अवस्था में है, लेकिन यह आने वाले महीनों में बड़ा रूप ले सकता है।”क्या 2025-27 की राजनीति पर पड़ेगा असर?

रॉबर्ट वाड्रा किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, लेकिन—वे गांधी परिवार के दामाद हैं,प्रियंका गांधी वाड्रा सक्रिय राजनीति में हैं,और कांग्रेस में वाड्रा परिवार की भूमिका हमेशा चर्चा में रहती है।इसलिए यह केस केवल कानूनी मसला नहीं, बल्कि सियासी हलकों में बड़ी बहस का केंद्र बन सकता है।

कई विश्लेषक इसे आने वाले सभी चुनावों—हरियाणा, दिल्ली, यूपी और 2027 लोकसभा के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानते हैं।

निष्कर्ष—

वाड्रा पर बढ़ती कानूनी घेराबंदी, कांग्रेस बनाम बीजेपी में फिर टकराव, और राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ानई चार्जशीट ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है।अब सबकी निगाहें 6 दिसंबर की सुनवाई पर टिकी हैं—

जहाँ तय होगा कि वाड्रा के खिलाफ ED की कार्रवाई कितनी आगे बढ़ेगी और इसका राजनीतिक असर किस दिशा में जाएगा।

NSK

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