सोनागाछी की आवाज़: “हम भी नागरिक हैं… हमारे नाम भी मतदाता सूची में जोड़ो”, SIR प्रक्रिया के बीच पश्चिम बंगाल की सेक्स वर्कर्स का बड़ा सवाल— पहचान कब मिलेगी?

बी के झा

NSK

कोलकाता, 16 नवंबर

कोलकाता के सोनागाछी की गलियों में इन दिनों सिर्फ शाम की हलचल या चहल-पहल नहीं, बल्कि एक नई तरह की आवाज़ गूंज रही है—“हम भी इस देश की नागरिक हैं, हमें भी वोट देने का हक चाहिए।”पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल समरी रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान यहां की हजारों महिला सेक्स वर्कर्स सरकार से अपील कर रही हैं कि उनके नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएं।

मुद्दा केवल वोटर कार्ड का नहीं—मुद्दा नागरिक पहचान का है… अस्तित्व का है… और उस हक़ का है जो हर भारतीय को मिलता है।

“कागज़ नहीं है… तो क्या हम देश के नागरिक नहीं?

”सोनागाछी में सेक्स वर्कर्स के बीच काम करने वाले प्रतिष्ठित NGO की सचिव बिशाखा लस्कर ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक औपचारिक पत्र सौंपा है।

उनकी मांग साफ है—

सोनागाछी के अंदर ही स्पेशल वेरिफिकेशन कैंप लगाया जाए, ताकि सेक्स वर्कर्स मौके पर ही अपने दस्तावेजों की जांच करवा सकें और मतदाता सूची में नाम जोड़वा सकें।लस्कर कहती हैं—

अधिकांश सेक्स वर्कर्स अपने परिवार से वर्षों पहले ही अलग हो चुकी हैं।बचा ही क्या है उनके पास? न मायका, न सहारा, और अब पहचान भी छिनने का डर।”बहुत-सी महिलाओं के पास जन्म प्रमाणपत्र, पुराने एड्रेस प्रूफ या परिवार से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं हैं,

क्योंकि उनका परिवार तो उनसे कब का नाता तोड़ चुका है।2002 में पहली बार मिला वोटर कार्ड—

अब क्यों फंसा मामला?दिलचस्प लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सेक्स वर्कर्स को पहली बार 2002 में वोटर आईडी कार्ड जारी किए गए थे।इससे पहले उन्हें मतदान का अधिकार भी लगभग छिन चुका था।

लस्कर बताती हैं—हम 2002 के बाद ही आधिकारिक रूप से वोट डाल सके। इससे पहले नाम ही नहीं था। अब समस्या यह है कि SIR में फिर से कागज़ मांगे जा रहे हैं, जो कई महिलाओं के पास हैं ही नहीं।”आज समुदाय की कई महिलाओं के पासआधार, पैन, राशन कार्ड, पासपोर्ट, बिजली बिल जैसे वैध दस्तावेज मौजूद हैं।

लेकिन उनकी मांग है कि सरकार इन उपलब्ध दस्तावेजों को मान्यता दे और वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की प्रक्रिया आसान करे।“

हम भी लोकतंत्र का हिस्सा हैं… सिर्फ छाया नहीं”सोनागाछी का समाज भारत के सबसे बड़े और सबसे जटिल रेड लाइट इलाकों में से एक है। यहां रहने वाली महिलाएं ना केवल सामाजिक उपेक्षा झेलती हैं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी लगातार दरकिनार की जाती रही हैं।

उनकी मांग बेहद मूलभूत है—

उन्हें नागरिक माना जाए, उन्हें पहचान दी जाए, उन्हें लोकतंत्र में हिस्सेदारी दी जाए।NGO की मांग— दफ्तर मत बुलाइए, कैंप यहीं लगाइए NGO का कहना है कि महिलाएं अपने काम, बच्चों और सुरक्षा कारणों से बार-बार सरकारी दफ्तर नहीं जा सकतीं।इसलिए चुनाव आयोग को चाहिए कि सोनागाछी के अंदर ही स्पेशल रजिस्ट्रेशन कैंप लगाया जाए।

ये कैम्प ना केवल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाएंगे बल्कि सेक्स वर्कर्स को एक सम्मानजनक और सुरक्षित माहौल भी देंगे।अंत में सवाल वही— क्या देश की सबसे हाशिए पर रहने वाली महिलाएं कभी पूरी नागरिक मानी जाएंगी?

सोनागाछी की महिलाओं की यह मांग सिर्फ एक दस्तावेज की मांग नहीं है।यह सम्मान की मांग है, पहचान की मांग है और उस लोकतांत्रिक अधिकार की मांग है जो हर भारतीय को मिलना चाहिए।सरकार SIR में कितनी संवेदनशीलता दिखाती है—

यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।लेकिन इतना तय है कि सोनागाछी की आवाज अब दबने वाली नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *