बी. के. झा
NSK

नई दिल्ली, 23 नवंबर
नई दिल्ली में जारी जी 20 शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक सहयोग, तकनीकी समानता और सतत विकास को आधार बनाकर छह नई पहलों का प्रस्ताव रखा। “लचीला विश्व—आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन, न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन और खाद्य प्रणालियाँ” विषय पर बोलते हुए मोदी ने कहा कि “भारतीय मूल्य पूरी दुनिया को प्रगति के नए रास्ते दिखा सकते हैं।”प्रधानमंत्री के भाषण का केंद्र बिंदु—
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का लोकतांत्रिक उपयोग
महत्वपूर्ण खनिजों की चक्रीय अर्थव्यवस्था
खाद्य सुरक्षा व पोषण आधारित वैश्विक रोडमैप
ग्लोबल साउथ के लिए विशेष सहायक तंत्रइन पहलों को विशेषज्ञ “भारत के नेतृत्व में उभरते वैश्विक एजेंडे का नया अध्याय” बता रहे हैं।
1. G20 ओपन सैटेलाइट डेटा पार्टनरशिप—अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी ‘सभी के लिए’प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए अंतरिक्ष डेटा उपलब्ध कराने की नई पहल की घोषणा की।उन्होंने कहा—“भारत मानता है कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी मानवता की साझा संपत्ति है। इसलिए हम G20 ओपन सैटेलाइट डेटा पार्टनरशिप का प्रस्ताव रखते हैं।”इस साझेदारी के तहत—G20 देशों की अंतरिक्ष एजेंसियाँ अपना डेटा साझा करेंगी जलवायु, कृषि, आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण निगरानी में उपयोग होगा गरीब और विकासशील देशों के लिए यह डेटा मुफ़्त या सुलभ दरों पर उपलब्ध होगा विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल “ग्लोबल साउथ को स्पेस इक्विटी प्रदान करने वाला ऐतिहासिक कदम” बन सकती है।
2. G20 क्रिटिकल मिनरल्स सर्कुलर इनिशिएटिव—कचरे से खनन की नई क्रांति स्वच्छ ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग पर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:“क्रिटिकल मिनरल्स मानवता की साझी पूंजी हैं। हमें इन्हें चक्रीय अर्थव्यवस्था में बदलना होगा।”भारतीय प्रस्ताव में शामिल है—रिसाइक्लिंग और अर्बन माइनिंग को बढ़ावा सेकंड-लाइफ बैटरी जैसी तकनीकें ग्लोबल साउथ में पायलट मटेरियल रिकवरी प्लांटसाझा अनुसंधान और तकनीकी मानक मोदी ने चेताया कि यदि चक्रीयता नहीं बढ़ी तो भविष्य की ऊर्जा आपूर्ति कुछ चुनिंदा देशों के नियंत्रण में रह जाएगी।
3. कृषि, जलवायु और आपदा जोखिम—वैश्विक खतरे और भारतीय समाधान पर्यावरण और जलवायु जोखिमों के कारण कृषि क्षेत्र पर मंडरा रहे संकट का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा—“खाद्य सुरक्षा अब केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता का प्रश्न बन चुका है।
”उन्होंने बताया कि कई देशों में किसानों को—उर्वरक,तकनीक,ऋण व बीमा,बाज़ार तक पहुँचमें भारी चुनौतियाँ झेलनी पड़ रही हैं।भारत के मॉडल पर बात करते हुए उन्होंने कहा—विश्व का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम – PMGKAYसबसे बड़ा स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम – आयुष्मान भारतसबसे बड़ी फसल बीमा योजना – PMFBYऔर श्री-अन्न (मिलेट्स) को मिले वैश्विक महत्व का उदाहरण
मोदी ने कहा—“भारत ने मिलेट्स को सुपरफूड के रूप में दुनिया के सामने रखा। यह पोषण और पर्यावरण—दोनों के लिए अनमोल हैं।”
4. “डेक्कन प्रिंसिपल्स” पर आधारित G20 रोडमैप की मांगदिल्ली G20 शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाए गए “डेक्कन सिद्धांतों” को आधार बनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा—“अब समय आ गया है कि इन सिद्धांतों पर आधारित एक विस्तृत, क्रियान्वयन योग्य G20 रोडमैप तैयार किया जाए।”यह रोडमैप शामिल करेगा—जलवायु लचीलापनखाद्य सुरक्षापोषण व सार्वजनिक स्वास्थ्यसतत कृषिआपदा तैयारी और पुनर्प्राप्ति तंत्र
5. “लचीलापन अकेले नहीं बनता”—मोदी का वैश्विक संदेशप्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में चेतावनी और आशा दोनों का संदेश दिया—“लचीलापन किसी एक देश द्वारा नहीं बनाया जा सकता। G20 को एक ऐसा ढांचा तैयार करना होगा जो पूरी मानवता की सुरक्षा का आधार बने।”उन्होंने जोर दिया कि भविष्य की दुनिया—
हरित ऊर्जा
तकनीकी समानता
डेटा की खुली पहुँच
और निष्पक्ष खनिज आपूर्ति के बिना टिकाऊ नहीं रह सकती
निष्कर्ष:
भारत G20 में अब केवल भागीदार नहीं—बल्कि वैश्विक एजेंडा गढ़ने वाला नेतृत्व बन गया है।ओपन सैटेलाइट डेटा से लेकर चक्रीय खनिज अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा तक—आज पेश किए गए मोदी के प्रस्तावों को विशेषज्ञ “न्यू एज डेवलपमेंट मॉडल” कह रहे हैं।भारत का संदेश स्पष्ट है—तकनीक, संसाधन और प्रगति—सबकी पहुँच में होने चाहिए।तभी एक लचीला, सुरक्षित और सतत विश्व संभव है।
