Gold Price Today: ऐतिहासिक गिरावट के बाद सोना–चांदी की अग्निपरीक्षा, बजट स्पेशल MCX सत्र में निवेशकों की धड़कनें तेज

बी के झा

नई दिल्ली, 1 फरवरी 2026

घरेलू कमोडिटी बाजार में बीते कुछ सत्रों से जारी उथल–पुथल ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। सोना और चांदी, जिन्हें परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश का सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है, हालिया कारोबारी सत्रों में ऐसी बिकवाली के शिकार हुए हैं, जो दशकों में शायद ही कभी देखने को मिली हो। खासतौर पर चांदी में दर्ज की गई एकदिनी ऐतिहासिक गिरावट ने बाजार की धारणा को झकझोर कर रख दिया है।इसी पृष्ठभूमि में बजट 2026 के दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आयोजित विशेष रविवार सत्र पर पूरे बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या बजट के दिन सोना-चांदी एक बार फिर निवेशकों को राहत देंगे या बिकवाली का यह दौर अभी और लंबा खिंच सकता है?

रिकॉर्ड ऊंचाई से अचानक फिसलन

जनवरी के आखिरी सप्ताह तक सोना और चांदी दोनों ही रिकॉर्ड रैली पर सवार थे। वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और महंगाई के डर ने निवेशकों को कीमती धातुओं की ओर आकर्षित किया, जिसके चलते MCX पर दोनों धातुएं अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गईं।लेकिन 30 जनवरी का कारोबारी दिन बाजार के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।चांदी में एक ही सत्र में लगभग 30 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसे 1980 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट माना जा रहा है।

वहीं सोने में भी पिछले दस वर्षों की सबसे तेज एकदिनी गिरावट देखने को मिली।इस तेज टूटन के बाद चांदी की कीमत गिरकर करीब 2.9 लाख रुपये प्रति किलो, जबकि सोना लगभग 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। जो भाव एक दिन पहले तक रिकॉर्ड के बेहद करीब थे, वे अचानक जमीन पर आ गिरे।

आखिर क्यों टूटा कीमती धातुओं का बाजार?

विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि कई कारकों का संयुक्त असर रहा—मुनाफा वसूली की तेज लहर लंबे समय से जारी जबरदस्त तेजी के बाद निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफा बुक करना शुरू किया। जैसे ही बिकवाली बढ़ी, कीमतों पर दबाव गहराता चला गया।

अमेरिकी डॉलर की मजबूती

अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत होने से सोना-चांदी जैसी धातुएं महंगी पड़ने लगीं, जिससे वैश्विक मांग कमजोर हुई।ट्रेडिंग मार्जिन में बढ़ोतरी

विदेशी एक्सचेंजों द्वारा मार्जिन बढ़ाए जाने से बड़े ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन घटानी पड़ी। इससे बाजार में अचानक सप्लाई बढ़ गई और दाम तेजी से नीचे आए।

रिकॉर्ड स्तर पर ओवरबॉट स्थिति तकनीकी तौर पर भी बाजार ओवरबॉट ज़ोन में था, जहां से करेक्शन की आशंका पहले से जताई जा रही थी।

बजट डे पर बाजार की अग्निपरीक्षा

अब सभी की नजरें बजट 2026 पर टिकी हैं। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो बजट के दिन टैक्स, इंपोर्ट ड्यूटी और फिस्कल संकेतों के चलते सोना-चांदी में तेज हलचल देखने को मिलती है। अगर सरकार की ओर से कीमती धातुओं पर कोई बड़ा ऐलान होता है, तो बाजार की दिशा तय हो सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि—शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का अवसर भी साबित हो सकती है, बशर्ते जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश किया जाए।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

मौजूदा हालात में विशेषज्ञ जल्दबाजी से बचने की सलाह दे रहे हैं। बजट के बाद बाजार की दिशा साफ होने की संभावना है। तब तक सोना और चांदी दोनों ही उच्च वोलैटिलिटी के दौर से गुजर सकते हैं।

निष्कर्षतः,

ऐतिहासिक गिरावट के बाद सोना-चांदी एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं।

बजट स्पेशल MCX सत्र यह तय कर सकता है कि यह गिरावट सिर्फ एक अस्थायी करेक्शन थी

या फिर बाजार में किसी बड़े ट्रेंड बदलाव की शुरुआत।

NSK

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *