बी के झा
NSK


नई दिल्ली / हावर्ड , 16 फरवरी
अमेरिका के प्रतिष्ठित शैक्षणिक मंच पर 14-15 फरवरी 2026 को आयोजित ‘हार्वर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026’ इस बार केवल एक बौद्धिक संगोष्ठी नहीं, बल्कि भारत की बदलती आकांक्षाओं और वैश्विक उपस्थिति का जीवंत उत्सव बन गया।
छात्र-आयोजित इस सम्मेलन की थीम थी— “The India We Imagine” — यानी “वह भारत जिसकी हम कल्पना करते हैं”।इस सम्मेलन में भारत से दो विशिष्ट हस्तियों को वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया— प्रखर वक्ता और कांग्रेस सांसद शशि थरूर तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पहचान को सशक्त स्वर देने वाली अभिनेत्री, प्रोड्यूसर और UNICEF की गुडविल एंबेसडर Priyanka Chopra।मंच साझा करने की उम्मीद, लेकिन सत्र रहे अलग
सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में दोनों के नाम एक साथ प्रदर्शित होने से यह कयास लगाए जा रहे थे कि राजनीति और सिनेमा के दो प्रभावशाली चेहरे एक ही मंच पर संवाद करते दिखाई देंगे। किंतु आयोजन संरचना के अनुसार दोनों ने अलग-अलग सत्रों में भाग लिया।इसी संदर्भ में शशि थरूर ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक संक्षिप्त किंतु प्रभावशाली टिप्पणी की—“
But not together, alas!”अर्थात— “अफसोस, साथ में नहीं!”उनकी यह चुटीली प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गई। यूजर्स ने इसे थरूर की विशिष्ट ‘विट’ शैली का उदाहरण बताया। कुछ ने आयोजकों की योजना पर हल्के-फुल्के तंज कसे, तो कुछ ने प्रियंका के पति Nick Jonas को लेकर मजाकिया टिप्पणियाँ भी कीं। देखते ही देखते मीम्स की बाढ़ आ गई और यह टिप्पणी डिजिटल बहस का विषय बन गई।विचारों का भारत, युवा ऊर्जा का मंचहल्की-फुल्की चुटकी से परे, सम्मेलन का मूल स्वर गंभीर और प्रेरणादायी रहा।
अपने संबोधन में शशि थरूर ने भारत की लोकतांत्रिक परंपरा, वैश्विक कूटनीतिक भूमिका और युवाओं की निर्णायक भागीदारी पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य को लेकर युवाओं का उत्साह और बौद्धिक जिज्ञासा उन्हें गहराई से प्रेरित करती है।प्रियंका चोपड़ा ने भी अपने सत्र में भारतीय सृजनात्मकता, वैश्विक प्रतिनिधित्व और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर प्रभावशाली विचार साझा किए। एक कलाकार और सामाजिक दूत के रूप में उनका अनुभव श्रोताओं के लिए प्रेरणास्रोत बना।
डिजिटल युग का संवाद
यह प्रसंग इस तथ्य को रेखांकित करता है कि आज सार्वजनिक जीवन केवल मंच तक सीमित नहीं है। एक संक्षिप्त टिप्पणी भी वैश्विक चर्चा का केंद्र बन सकती है। थरूर की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि गंभीर विमर्श के बीच भी विनोद का संतुलन किस प्रकार संवाद को जीवंत बना सकता है।
हार्वर्ड की धरती पर हुआ यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि भारत केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक विचार, एक संभावना और एक उभरती वैश्विक शक्ति है—
और उसकी कल्पना करने वाली युवा पीढ़ी पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है।
