जेडीयू में टिकट बंटवारे पर ‘महायुद्ध’! सांसद अजय मंडल ने दी इस्तीफे की धमकी, बोले– “मेरी राय का कोई महत्व नहीं रहा”

बी के झा

NSK

पटना / नई दिल्ली, 14 अक्टूबर

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में टिकट बंटवारे को लेकर गहरी नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। भागलपुर के जेडीयू सांसद अजय कुमार मंडल ने टिकट वितरण प्रक्रिया में स्थानीय नेताओं की अनदेखी से क्षुब्ध होकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस्तीफे की अनुमति के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि “जब मेरी राय का कोई महत्व ही नहीं रह गया, तो सांसद पद पर बने रहने का क्या औचित्य है।“स्थानीय सांसद होते हुए भी मुझसे कोई सलाह नहीं ली गई”

सांसद अजय मंडल ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा,माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी, कृपया मुझे सांसद पद से त्यागपत्र देने की अनुमति प्रदान करें।

टिकट वितरण में मेरी राय नहीं ली गई। स्थानीय सांसद होने के बावजूद मुझे दरकिनार किया गया है, इसलिए इस पद पर बने रहना मेरे आत्मसम्मान के खिलाफ है।अजय मंडल ने कहा कि वे पिछले दो दशकों से पार्टी और संगठन के लिए समर्पित हैं, लेकिन अब जेडीयू के भीतर कुछ लोग बाहरी हस्तक्षेप के जरिए टिकट तय कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों का पार्टी से कोई संबंध नहीं रहा, उन्हें टिकट दिए जा रहे हैं, जबकि वर्षों से संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की आवाज दबा दी जा रही है।

गोपाल मंडल भी उतरे मैदान में, सीएम आवास के बाहर धरना

भागलपुर जिले से ही जेडीयू के विवादित विधायक गोपाल मंडल ने भी टिकट कटने की आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना दे दिया। उनका कहना है कि “हमसे मिलने तक नहीं दिया जा रहा है और हमारी राय की कोई कीमत नहीं रह गई है।

”गोपाल मंडल ने कहा कि वे जनता के वोट से जीते हैं, किसी नेता के आशीर्वाद से नहीं। उन्होंने दावा किया कि कुछ शीर्ष नेता पार्टी में टिकट के नाम पर गुटबाजी और मनमानी कर रहे हैं।

पत्र में छलका दर्द — “जब संगठन की राय की कोई अहमियत नहीं, तो पद पर बने रहना व्यर्थ”

अजय मंडल के पत्र में लिखा गया है—मैंने 20-25 वर्षों से जेडीयू को अपने परिवार की तरह माना है। विधायक और सांसद रहते हुए हमेशा जनता के बीच रहा, लेकिन अब टिकट वितरण में मेरी राय को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। संगठन की कमान ऐसे हाथों में चली गई है जो पार्टी की जड़ों को कमजोर कर रहे हैं।

”उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पार्टी इसी राह पर चली, तो “इसका नुकसान सीधे तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की साख पर पड़ेगा।”अजय मंडल ने यह भी कहा कि 2019 में जब वे सांसद बने थे, तब उनके नेतृत्व में भागलपुर उपचुनाव में जेडीयू की एकमात्र जीत दर्ज हुई थी, जो उनकी निष्ठा और जनता के विश्वास का प्रमाण थी।“

मुझे सीएम से मिलने नहीं दिया जा रहा”सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि वे कई दिनों से मुख्यमंत्री से मुलाकात की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने पत्र में लिखा—मैं न तो नाराज हूं, न विरोध में हूं। मेरा उद्देश्य सिर्फ पार्टी को भविष्य की हानि से बचाना है। लेकिन अगर पार्टी में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जाती रही तो जेडीयू अपनी पहचान खो देगी।”

संजय झा पर गंभीर आरोप

अजय मंडल के करीबी नेताओं ने जेडीयू कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा पर भी खुला हमला बोला है।उन्होंने कहा,संजय झा आज तक अपने जीवन में एक पंचायत चुनाव भी नहीं लड़े, लेकिन आज हेलीकॉप्टर से उतरकर पूरी पार्टी पर कब्जा कर चुके हैं। उनका रवैया जारी रहा तो जेडीयू जल्द ही बीजेपी का ‘सहयोगी संगठन’ बनकर रह जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अजय मंडल और गोपाल मंडल का बगावती तेवर नीतीश कुमार के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार,जेडीयू जिस एकता और अनुशासन पर गर्व करती थी, अब वहीं टूट के कगार पर है। अगर टिकट वितरण में असंतोष बढ़ा तो पार्टी का आंतरिक संकट सार्वजनिक रूप ले सकता है।

”पार्टी में सियासी भूचाल की आहट

जहां एक ओर एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर पहले से ही तनाव है, वहीं अब जेडीयू के अंदरूनी असंतोष ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

अजय मंडल और गोपाल मंडल जैसे प्रभावशाली नेताओं का खुला विरोध यह संकेत देता है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जेडीयू को न केवल विपक्ष से, बल्कि अपने ही घर से बड़ी चुनौती मिलने वाली है।

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