LPG सिलेंडर के लिए लंबी कतारों के बीच सरकार की अपील: घबराएं नहीं, घर बैठे 5 तरीकों से करें बुकिंग

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 14 मार्च

देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर बनी चिंताजनक स्थिति के बीच केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े होने के बजाय घर बैठे उपलब्ध डिजिटल और टेलीफोनिक माध्यमों से सिलेंडर बुक करें।मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अब पांच अलग-अलग तरीकों से आसानी से की जा सकती है। इसके लिए उपभोक्ताओं को गैस एजेंसी तक जाने या घंटों लाइन में खड़े रहने की आवश्यकता नहीं है।हालांकि जमीनी स्तर पर हालात यह हैं कि गैस की संभावित कमी की खबरें सामने आते ही देश के कई शहरों में लोगों ने एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी कतारें लगा दीं। कई जगहों पर तो सुबह तीन बजे से ही लोग सिलेंडर पाने की उम्मीद में लाइन में खड़े दिखाई दिए। कुछ लोगों का कहना है कि वे लगातार कई दिनों से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाया है।

घर बैठे LPG सिलेंडर बुक करने के 5 तरीके

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार उपभोक्ता निम्नलिखित पांच तरीकों से घरेलू एलपीजी सिलेंडर बुक कर सकते हैं:

1. WhatsApp के माध्यम से बुकिंगतेल विपणन कंपनियों ने व्हाट्सएप के जरिए सिलेंडर बुक करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। उपभोक्ता अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर बुकिंग कर सकते हैं।

2. मिस्ड कॉल सुविधाकई गैस कंपनियां मिस्ड कॉल देकर सिलेंडर बुक करने की सुविधा भी देती हैं। उपभोक्ता निर्धारित नंबर पर मिस्ड कॉल देकर बुकिंग की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

3. IVRS और SMS सेवाटेलीफोन के जरिए भी सिलेंडर बुक किया जा सकता है। उपभोक्ता IVRS नंबर पर कॉल कर या SMS भेजकर अपनी बुकिंग दर्ज करा सकते हैं।

4. मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम सेतेल कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल ऐप के जरिए भी बुकिंग की जा सकती है, जैसेHello BPCLIndianOil ONEHP Pay5. आधिकारिक वेबसाइट के जरिएउपभोक्ता कंपनियों की वेबसाइट पर जाकर भी सिलेंडर बुक कर सकते हैं। इसके लिए प्रमुख पोर्टल हैं:

my.ebharatgas.comcx.indianoil.inmyhpgas.in

मंत्रालय का कहना है कि इन डिजिटल और टेलीफोनिक विकल्पों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुविधाजनक सेवा प्रदान करना और गैस एजेंसियों के बाहर लगने वाली भीड़ को कम करना है।

अफवाहों से बढ़ी चिंता

हाल के दिनों में एलपीजी की संभावित कमी को लेकर फैली खबरों और अफवाहों के कारण कई शहरों में अचानक मांग बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी आवश्यक वस्तु की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता पैदा होती है तो उपभोक्ता स्वाभाविक रूप से अतिरिक्त भंडारण करने लगते हैं, जिससे बाजार में अस्थायी दबाव बढ़ जाता है।ऊर्जा क्षेत्र के एक आर्थिक विश्लेषक का कहना है कि“भारत जैसे विशाल उपभोक्ता बाजार में एलपीजी की मांग बहुत बड़ी है। यदि किसी कारण से आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव पड़ता है या लोगों में कमी की आशंका पैदा होती है तो मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ना स्वाभाविक है।”

राजनीतिक बहस भी तेज

एलपीजी संकट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी में कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि संकट की स्थिति में सरकार को पहले से बेहतर तैयारी करनी चाहिए थी ताकि आम जनता को इस तरह की अफरा-तफरी का सामना न करना पड़े।हालांकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और जमाखोरी तथा कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों की राय

सार्वजनिक नीति और प्रशासन का अध्ययन करने वाले शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसी स्थितियां केवल आपूर्ति की समस्या नहीं होतीं बल्कि सूचना प्रबंधन और वितरण प्रणाली की पारदर्शिता से भी जुड़ी होती हैं।एक वरिष्ठ शिक्षाविद के अनुसार,“किसी भी आवश्यक वस्तु के संकट में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि लोगों को भरोसा दिलाया जाए कि आपूर्ति बनी रहेगी। यदि सूचना स्पष्ट और भरोसेमंद नहीं होती तो बाजार में घबराहट और अफवाहें तेजी से फैलती हैं।”

कानूनविदों का दृष्टिकोण

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तु की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार के पास कई कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।आवश्यक वस्तु अधिनियम और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े नियमों के तहत प्रशासन को अधिकार है कि वह अवैध भंडारण और ऊंचे दामों पर बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे।

सामाजिक संगठनों की चिंता

कई सामाजिक संगठनों ने भी एलपीजी संकट पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि रसोई गैस अब केवल शहरी सुविधा नहीं बल्कि ग्रामीण और गरीब परिवारों की बुनियादी जरूरत बन चुकी है।संगठनों का मानना है कि यदि वितरण प्रणाली में थोड़ी भी गड़बड़ी होती है तो उसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ता है।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

विश्लेषकों के अनुसार वर्तमान स्थिति में सरकार के सामने दोहरी चुनौती है।पहली, एलपीजी की आपूर्ति और वितरण को सुचारु बनाए रखना।दूसरी, अफवाहों और घबराहट को रोकते हुए लोगों का भरोसा बनाए रखना।यदि इन दोनों मोर्चों पर संतुलित तरीके से काम किया जाता है तो स्थिति जल्द सामान्य हो सकती है।

जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश

विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है। सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए डिजिटल और टेलीफोनिक माध्यमों का उपयोग करके आसानी से सिलेंडर बुक किया जा सकता है।

गैस एजेंसियों के बाहर भीड़ लगाने के बजाय यदि लोग इन सुविधाओं का उपयोग करें तो न केवल उनका समय बचेगा बल्कि वितरण व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव भी कम होगा।

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