LPG सिलेंडर संकट: जमाखोरी पर सरकार का शिकंजा, लेकिन सवालों के घेरे में व्यवस्था

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बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 14 मार्च

देशभर में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर पैदा हुए संकट ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। एक तरफ जहां गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लगी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ जमाखोरी और कालाबाजारी के मामलों ने प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारत समेत दुनिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है। ऊर्जा आपूर्ति की वैश्विक श्रृंखला प्रभावित होने के कारण एलपीजी की उपलब्धता पर भी दबाव बढ़ा है। हालांकि केंद्र सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे पैनिक बुकिंग से बचें, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।लोग सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। कई लोग तो अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर एक सिलेंडर की उम्मीद में घंटों इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कई बार शाम तक भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

जमाखोरी के खिलाफ देशभर में कार्रवाई

एलपीजी संकट के बीच सरकार ने जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि गैस की अवैध जमाखोरी और महंगे दामों पर बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है और बड़ी मात्रा में सिलेंडर बरामद किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आपदा के समय मुनाफाखोरी करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

भोपाल में बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बंद पड़ी गैस एजेंसी से 668 सिलेंडर बरामद किए। जांच के दौरान वहां तीन ट्रक सिलेंडर भी मिले।इसके अलावा 1574 सिलेंडर ऐसे पाए गए जो रजिस्टर में दर्ज ही नहीं थे। प्रशासन का आरोप है कि बंद पड़ी एजेंसी के माध्यम से इन सिलेंडरों को महंगे दामों पर बेचा जा रहा था। अधिकारियों ने इसे संकट के समय की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक बताया है।

मुंबई में भी काला बाजारी का खुलासा

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी प्रशासन ने एलपीजी की काला बाजारी के खिलाफ अभियान चलाया है। वर्ली इलाके में छापेमारी के दौरान घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर जब्त किए गए।रेड के दौरान 5 किलो के 6 भरे हुए और 58 खाली सिलेंडर बरामद हुए। आरोप है कि यहां अवैध तरीके से सिलेंडर भरकर ऊंचे दामों पर बेचने का धंधा चल रहा था।एलपीजी संकट का असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर भी पड़ रहा है। कई बड़े रेस्टोरेंट्स अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं, जबकि कुछ होटल अब इंडक्शन, कोयला और लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेकर काम चला रहे हैं।

यूपी में एजेंसियों पर छापे

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है। मुरादाबाद में जिलापूर्ति अधिकारी ने एक गैस एजेंसी पर छापा मारा और गड़बड़ी मिलने के बाद गोदाम को सील कर दिया।जांच में गैस बुकिंग और सिलेंडर डिलीवरी में हेराफेरी के संकेत मिले हैं। नोएडा समेत कई शहरों में लोग गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में 741 सिलेंडर जब्त

छत्तीसगढ़ में भी प्रशासन ने जमाखोरी के खिलाफ अभियान चलाया। राज्य के अलग-अलग जिलों में 102 जगहों पर छापेमारी की गई, जिसमें कुल 741 सिलेंडर जब्त किए गए।रायपुर में सबसे ज्यादा 392 सिलेंडर बरामद हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि एलपीजी की अवैध जमाखोरी करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

संकट के पीछे व्यवस्था की कमजोरी?

हालांकि सरकारी कार्रवाई जारी है, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति केवल बाजार की समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक निगरानी की कमजोरी का भी परिणाम है।कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संकट के समय अक्सर राजनीतिक संरक्षण, व्यापारिक हित और प्रशासनिक लापरवाही का गठजोड़ सक्रिय हो जाता है, जिससे कालाबाजारी को बढ़ावा मिलता है।एक वरिष्ठ शिक्षाविद के अनुसार,“जब भी आपूर्ति संकट पैदा होता है, तब बाजार में जमाखोरी और कृत्रिम कमी की स्थिति बन जाती है। ऐसे समय में केवल छापेमारी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी भी जरूरी होती है।”

विपक्ष का सरकार पर हमला

एलपीजी संकट को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र और कई राज्य सरकारों को घेरा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की नीतियों और निगरानी की कमी के कारण जमाखोरी और काला बाजारी को बढ़ावा मिला है।कुछ विपक्षी नेताओं ने कोविड काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की कीमतों को लेकर गंभीर आरोप लगे थे और आम जनता को भारी आर्थिक और मानसिक संकट का सामना करना पड़ा था।हालांकि सरकार का कहना है कि वह जमाखोरी और काला बाजारी के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है।

चुनावी राजनीति में भी बन सकता है मुद्दा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एलपीजी संकट आने वाले चुनावों में भी एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। खासकर जिन राज्यों में जल्द चुनाव होने वाले हैं, वहां विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहा है।एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि“भारत में अक्सर संकट और राजनीति साथ-साथ चलते हैं। अगर विपक्ष इस मुद्दे को संगठित तरीके से उठाने में सफल होता है तो यह बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। लेकिन अगर विपक्ष बिखरा रहा, तो सत्ताधारी दल इसे भी अपने राजनीतिक नैरेटिव में बदल सकता है।”

आम जनता के लिए सबसे बड़ी चिंता

राजनीतिक बहसों के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम नागरिकों को हो रही है। रोजमर्रा की रसोई गैस पर निर्भर लाखों परिवारों के लिए एलपीजी की उपलब्धता जीवन की मूलभूत जरूरत से जुड़ा सवाल बन गई है।सरकार लगातार आश्वासन दे रही है कि आपूर्ति व्यवस्था को जल्द सामान्य किया जाएगा, लेकिन फिलहाल देश के कई हिस्सों में लोग गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

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