बी के झा
नई दिल्ली/वॉशिंगटन/बीजिंग, 14 अक्टूबर
भारत आने वाले दिनों में एक बार फिर अपनी सैन्य शक्ति का लोहा मनवाने जा रहा है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारत 15 से 17 अक्टूबर के बीच बंगाल की खाड़ी में लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण करेगा। माना जा रहा है कि यह ‘अग्नि’ सीरीज की अत्याधुनिक मिसाइल हो सकती है, जो परमाणु हमला करने में सक्षम है। भारत के इस कदम से न केवल चीन, बल्कि अमेरिका तक में हलचल मच गई है।
भारत सरकार ने इस परीक्षण के लिए 3,550 किलोमीटर तक का इलाका ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ घोषित कर दिया है और एक NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया है। यह वही इलाका है जहां भारत अपने रणनीतिक परमाणु प्रतिरोधक कार्यक्रम के तहत नियमित रूप से मिसाइल परीक्षण करता है।
भारत ने बढ़ाई मिसाइल की रेंज, घबराए ड्रैगन और अंकल सैमभारत ने पहले जो NOTAM जारी किया था, उसकी रेंज 1,480 किलोमीटर थी। लेकिन अगले 72 घंटे में इसे लगातार तीन बार संशोधित कर रेंज को 3,550 किलोमीटर तक बढ़ा दिया गया।विशेषज्ञों का कहना है कि यह किसी नए या अपग्रेडेड मिसाइल वर्ज़न का संकेत है —
संभवतः ‘अग्नि-V’ या उससे भी लंबी दूरी की ‘अग्नि-VI’।भारत की अग्नि सीरीज मिसाइलों की रेंज 700 से लेकर 5,000 किलोमीटर तक है, और यह देश की परमाणु नीति का केंद्र है। हाल ही में भारत ने अग्नि-प्राइम मिसाइल का ट्रेन से लॉन्च किया गया सफल परीक्षण किया था, जिसे ‘चाइना किलर’ कहा जाता है।
हिंद महासागर में मंडरा रहे दो जासूस — एक अमेरिकी, एक चीनीभारत के इस परीक्षण से पहले ही हिंद महासागर में हलचल तेज हो गई है।सूत्रों के अनुसार, चीन का जासूसी जहाज ‘युआन वांग-5’ मलेशिया के रास्ते हिंद महासागर पहुंच चुका है। यह वही जहाज है जिसने 2022 में भी श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर पहुंचकर चर्चा बटोरी थी।वहीं, अमेरिका ने भी अपने ‘ओसेन टाइटन’ (Ocean Titan) नामक उन्नत सर्वेक्षण और खुफिया जहाज को भारत के पश्चिमी तट के पास तैनात किया है। यह जहाज अत्याधुनिक हाई-टेक सोनार सिस्टम और डेटा मॉनिटरिंग सेंसर से लैस है, जो मिसाइल प्रक्षेपण से जुड़ी रेडियो तरंगों, ऊँचाई, तापमान और दिशा जैसी सूचनाओं को कैप्चर करने में सक्षम है।विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और अमेरिका दोनों का उद्देश्य भारत के मिसाइल प्रोग्राम की तकनीकी क्षमताओं और सटीकता का आकलन करना है।
भारत की रणनीति: ‘विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोधक क्षमता’भारत की रक्षा नीति हमेशा से “नो फर्स्ट यूज़” यानी ‘पहले हमला नहीं’ के सिद्धांत पर आधारित रही है। लेकिन भारत यह भी सुनिश्चित करता है कि किसी भी आक्रामक राष्ट्र को जवाब देने की क्षमता उसके पास हमेशा बनी रहे।डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित अग्नि मिसाइलें भारत की इस नीति की रीढ़ हैं।रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (से.नि.) पीके चक्रवर्ती कहते हैं —भारत अब उस स्थिति में है कि वह न केवल एशिया, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी रणनीतिक संतुलन कायम कर सकता है। अग्नि सीरीज की मिसाइलें भारत को ‘दूसरी स्ट्राइक कैपेबिलिटी’ देती हैं — यानी अगर कोई परमाणु हमला करता है, तो भारत पूरी ताकत से जवाब दे सके।
परमाणु त्रिकोण में भारत की स्थिति भारत, चीन और अमेरिका — ये तीनों देश विश्व के शीर्ष परमाणु शक्तियों में गिने जाते हैं।हालिया आंकड़ों के अनुसार:भारत के पास लगभग 180 परमाणु बम हैं,चीन के पास 600 से अधिक,और पाकिस्तान, जो चीन का रणनीतिक साथी है, उसके पास 170 परमाणु बम हैं।भारत की बढ़ती परमाणु क्षमता, खासकर मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म और सबमरीन-बेस्ड मिसाइल सिस्टम के साथ, अब क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को बदलने लगी है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ से लेकर ‘मिशन अग्नि’ तक: भारत का आत्मनिर्भर शक्ति पथहाल के वर्षों में भारत ने लगातार अपनी मिसाइल तकनीक को स्वदेशी बनाया है।‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में परमाणु हथियार ले जाने वाली INS अरिहंत क्लास पनडुब्बियों को सक्रिय किया।अब, अग्नि प्राइम, अग्नि V और संभावित अग्नि VI जैसे परीक्षणों से भारत अपनी सुरक्षा कवच को अभेद्य बना रहा है।
अमेरिका-चीन की चिंता का कारण क्या है?भारत का हर सफल परीक्षण न केवल तकनीकी प्रगति का प्रतीक है, बल्कि यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करता है।अमेरिका नहीं चाहता कि भारत पूरी तरह स्वावलंबी होकर एक स्वतंत्र रक्षा शक्ति बन जाए, जबकि चीन को डर है कि भारत की बढ़ती मिसाइल रेंज उसकी पूर्वी और दक्षिणी सीमाओं तक पहुंच चुकी है — जिसमें बीजिंग भी शामिल है।
निष्कर्ष:
भारत का संदेश — ‘हम शांति चाहते हैं, पर कमजोरी नहीं’भारत का संदेश स्पष्ट है
हम शांति के पक्षधर हैं, लेकिन आत्मरक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार हैं।”भारत का यह परीक्षण न केवल उसकी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि यह दुनिया को यह भी दिखाता है कि भारत आज किसी के दबाव में नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों के लिए निर्णय लेता है।
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