मोकामा की जंग फिर हुई गर्म, अनंत सिंह बोले — “जीत का अंतर होगा एक लाख, विरोधियों की जमानत जब्त करवा दूंगा”

बी के झा

NSK

पटना/मोकामा / नई दिल्ली, 15 अक्टूबर

बिहार विधानसभा चुनाव के एलान के बाद अब मैदान में उतर चुके उम्मीदवारों के तेवर भी तेज हो गए हैं।मोकामा सीट पर हमेशा से ही बाहुबल और जनबल की सियासत का जलवा रहा है — और इस बार भी तस्वीर कुछ वैसी ही बनती दिख रही है।जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह ने सोमवार को नामांकन दाखिल करने के बाद जो बयान दिया, उसने मोकामा के चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।

“जीत का अंतर होगा एक लाख वोट” — अनंत सिंह का दावानामांकन के बाद मीडिया से बात करते हुए अनंत सिंह ने आत्मविश्वास भरे लहजे में कहा —मेरी जीत का अंतर एक लाख से कम नहीं होगा। विरोधियों की जमानत जब्त हो जाएगी। नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे और भाजपा गठबंधन की सरकार बनेगी।उनका यह बयान न केवल उनके आत्मविश्वास को दिखाता है बल्कि यह भी संकेत देता है कि इस बार मोकामा में मुकाबला कितना तीखा होने वाला है।

सूरजभान सिंह पर सीधा वारअनंत सिंह ने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी सूरजभान सिंह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा —सूरजभान की आज से कोई चर्चा नहीं है। वह पहले भी लड़े हैं, लेकिन हर बार जनता ने उन्हें नकारा है। इस बार भी विरोधियों का दम फूल जाएगा।”

गौरतलब है कि अनंत सिंह और सूरजभान सिंह के बीच दो दशक पुराना राजनीतिक और व्यक्तिगत मतभेद रहा है।साल 2000 के चुनाव में जब सूरजभान जेल में थे, तब उन्होंने अनंत सिंह के बड़े भाई और तत्कालीन मंत्री दिलीप कुमार सिंह को 80,000 वोटों से हराया था।इसके बाद अनंत सिंह ने मोकामा सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली और 2005 से लेकर 2020 तक इस सीट पर लगातार अपना दबदबा कायम रखा।

इस बार मुकाबला क्यों खास है?मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी इस बार आरजेडी के टिकट पर मैदान में उतर सकती हैं।ऐसे में मोकामा की सियासत एक बार फिर “सिंह बनाम सिंह” के अंदाज में बदल सकती है।जहां एक तरफ जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के मजबूत उम्मीदवार अनंत सिंह हैं, वहीं दूसरी ओर आरजेडी के बैनर तले सूरजभान परिवार की वीणा देवी चुनौती पेश करेंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर वीणा देवी मैदान में आती हैं, तो मुकाबला सीधा और बेहद दिलचस्प होगा —एक तरफ नीतीश का चेहरा और अनंत का जनाधार, दूसरी तरफ लालू की परंपरा और सूरजभान का प्रभाव।

मोकामा में अब भी कायम है ‘अनंत फैक्टर’मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का नाम एक भावनात्मक जुड़ाव के रूप में देखा जाता है।वे गरीब और ग्रामीण तबके में बेहद लोकप्रिय हैं।उनकी शैली सीधी, बोलचाल आम जनता की भाषा में, और इलाके में “अपनेपन” की छवि ने उन्हें “छोटे सरकार” की उपाधि दिलाई।हालांकि विवादों और मुकदमों ने उनकी राजनीतिक यात्रा को बार-बार चुनौती दी है, लेकिन हर बार उन्होंने चुनावी मैदान में अपनी पकड़ मजबूत की है।2020 के चुनाव में जब उन्होंने निर्दलीय के तौर पर जीत हासिल की थी, तब भी उनके प्रभाव का अंदाजा पूरे बिहार को हुआ था।

बिहार में दो चरणों में मतदान बिहार में इस बार विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे।पहले चरण में 6 नवंबर और दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होगा।14 नवंबर को नतीजों की घोषणा की जाएगी।मोकामा उन सीटों में से एक है जहां मतदान के साथ-साथ माहौल का हर लम्हा सुर्खियों में रहता है।

मोकामा की जनता क्या कहती है?

स्थानीय मतदाताओं के बीच बातचीत में यह साफ झलकता है कि मोकामा की राजनीति अब भी व्यक्ति आधारित है।यहां विकास के मुद्दों से ज्यादा असर व्यक्तित्व और जुड़ाव का पड़ता है।

एक बुजुर्ग किसान ने कहा —अनंत भैया हमरे गांव के आदमी हैं, सुख-दुख में साथ रहते हैं। उनका तरीका भले सीधा-सादा ना हो, पर दिल साफ है।”वहीं युवाओं का कहना है कि अब मोकामा को “नई राजनीति” चाहिए — अपराध और बाहुबल से ऊपर उठकर विकास की बात।

निष्कर्ष: “

सिंह बनाम सिंह” की जंगबिहार के इस विधानसभा चुनाव में मोकामा फिर से सबसे चर्चित सीटों में से एक बन गया है।जहां एक ओर अनंत सिंह दावा कर रहे हैं कि “विरोधियों की जमानत जब्त हो जाएगी”, वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमे में रणनीति तेज है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि 14 नवंबर को जब मतगणना होगी, तो क्या अनंत सिंह अपने ‘एक लाख वोट के अंतर’ के वादे को सच साबित कर पाएंगे,या मोकामा की जनता इस बार कोई नया इतिहास लिखेगी।

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