“मेरी तो कमाई ही खत्म हो गई, मुझे पैसा चाहिए” — मोदी सरकार के मंत्री बोले, छोड़ना चाहता हूं पद

बी के झा

NSK

त्रिशूर/नई दिल्ली , 13 अक्टूबर

मोदी सरकार के मंत्री सुरेश गोपी ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।फिल्मी पर्दे से राजनीति में आए इस अभिनेता-नेता ने कहा है कि वे अपना मंत्री पद छोड़ना चाहते हैं, क्योंकि मंत्री बनने के बाद उनकी कमाई पूरी तरह से बंद हो गई है।गोपी का साफ कहना है —मुझे पैसों की जरूरत है, इसलिए मैं दोबारा फिल्मों में लौटना चाहता हूं।

“मैं कभी मंत्री बनना नहीं चाहता था”केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने रविवार को केरल के कन्नूर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।उन्होंने कहा,मैंने 2008 में भाजपा जॉइन की थी, लेकिन राजनीति में आने के बाद भी मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे मंत्री बनना चाहिए। मैं हमेशा सिनेमा से जुड़ा रहना चाहता था। अब मंत्री बनने के बाद मेरी इनकम बंद हो गई है, जो मेरे लिए चिंता की बात है।”उन्होंने यहां तक कहा कि अगर पार्टी चाहे तो उनकी जगह राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर को केंद्र सरकार में जिम्मेदारी दी जा सकती है।

“प्रजा शब्द पर भी विवाद क्यों?”सुरेश गोपी ने भाषण के दौरान मीडिया और विरोधियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा,आजकल कुछ लोग शब्दों का गलत मतलब निकालने में माहिर हो गए हैं। मैंने जब अपने क्षेत्र के लोगों के लिए ‘प्रजा’ शब्द का इस्तेमाल किया, तो उस पर भी विवाद खड़ा कर दिया गया। अगर यह प्रजातंत्र है तो ‘प्रजा’ शब्द अपमानजनक कैसे हो गया?उन्होंने कहा कि “मेरा मकसद किसी को नीचा दिखाना नहीं था, लेकिन मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।

फिल्मी करियर शानदार रहासुरेश गोपी दक्षिण भारतीय सिनेमा का एक बड़ा नाम हैं।उन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाई हैं।उनकी फिल्मों में कमिश्नर, एझुपुन्ना थाराकन, लल सलाम, ओरु सीबीआई डायरी कुरिप्पु जैसी ब्लॉकबस्टर शामिल हैं।उन्होंने 1965 में बाल कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया था और 1986 में पहली बार एक प्रमुख अभिनेता के तौर पर बड़े पर्दे पर दिखे।इसके अलावा वे पार्श्व गायक भी हैं और कई सामाजिक अभियानों में सक्रिय रहे हैं।

2016 में राजनीति में एंट्री, 2024 में सांसद बनेसुरेश गोपी ने 2016 में राजनीति की ओर रुख किया और भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाई।2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने केरल की त्रिशूर सीट से शानदार जीत दर्ज कर भाजपा को राज्य में एक बड़ी सफलता दिलाई।उनकी जीत को दक्षिण भारत में भाजपा की बढ़ती पकड़ का संकेत माना गया था।

अभिनेता से मंत्री अब फिर कलाकार बनने की चाह

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सुरेश गोपी का यह बयान केवल “थकान” या “आर्थिक चिंता” का संकेत नहीं, बल्कि यह उस संघर्ष की झलक भी है जिसका सामना फिल्मी पृष्ठभूमि से आए नेता अक्सर करते हैं।मंत्री बनने के बाद गोपी को फिल्मों से दूरी बनानी पड़ी

ना शूटिंग, ना एंडोर्समेंट, ना रॉयल्टी

अब वे फिर से अपने पहले प्यार — सिनेमा की ओर लौटना चाहते हैं।उन्होंने कहा,मैं कलाकार हूं, और कला से ही मेरी पहचान है। अगर मैं कला से दूर रहूंगा तो खुद को अधूरा महसूस करूंगा।

सार

सुरेश गोपी का बयान यह दिखाता है कि राजनीति के मंच पर आने वाले कलाकारों के लिए सत्ता की जिम्मेदारी और निजी जुनून के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल हो जाता है।जहां एक ओर वे जनसेवा के प्रति समर्पित हैं, वहीं दूसरी ओर जीविका और आत्मिक संतोष के लिए उन्हें अपने पुराने पेशे — सिनेमा — की पुकार सुनाई दे रही है।

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