बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 14 अक्टूबर
बिहार चुनाव 2025 की सुगबुगाहट के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीट बंटवारे को लेकर जारी खींचतान अब खुलकर सामने आ चुकी है। जहां एक ओर भाजपा ने दावा किया है कि “99 प्रतिशत सीटें तय हो चुकी हैं”, वहीं जेडीयू और लोजपा (रामविलास) के बीच कई सीटों को लेकर पेंच अब भी फंसा हुआ है। इस बीच बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने पटना में बड़ा बयान देते हुए कहा कि एनडीए एकजुट है और “14 नवंबर के बाद बिहार में फिर एनडीए की सरकार बनेगी।”
धर्मेंद्र प्रधान बोले – 99% सीटें तय, बाकी पर जल्द निर्णयपत्रकारों से बातचीत में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा –एनडीए के घटक दलों के बीच यह लगभग तय हो चुका है कि कौन सी पार्टी किस सीट से चुनाव लड़ेगी। 99 प्रतिशत सहमति बन चुकी है। शेष सीटों पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि भाजपा, जेडीयू, लोजपा (रामविलास), राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा — सभी दलों में “सकारात्मक बातचीत अंतिम चरण में है।
”प्रधान ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि “विपक्ष को अपनी हार पहले ही दिखाई दे रही है, इसलिए भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।
”जेडीयू और बीजेपी के भीतर मचा घमासान लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है।भागलपुर के जेडीयू सांसद अजय मंडल ने सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखकर सांसद पद से इस्तीफे की अनुमति मांगी है।वहीं, विधायक गोपाल मंडल भी टिकट कटने की आशंका में मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए हैं।दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह ने भी सीट शेयरिंग को लेकर असंतोष जताया है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुछ सीटों पर जेडीयू ने एलजेपी के हिस्से की सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे अंदरूनी कलह और बढ़ गई है।
उपेंद्र कुशवाहा भी नाराज, पर बोले– NDA एकजुट राजग के एक अन्य घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर लिखा –सीटों की संख्या तय हो गई है। कौन दल किस सीट से लड़ेगा, इसकी बातचीत अंतिम दौर में है। मोदी जी और नीतीश जी के नेतृत्व में NDA पूरी तरह एकजुट है।हालांकि, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अंदरखाने असंतोष की लहर जारी है।
“एकजुटता” के ट्वीट दरअसल “संकट प्रबंधन” का हिस्सा हैं।नीतीश-शाह के रिश्ते:
सियासी दोस्ती में छिपी रणनीति राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि इस बार भाजपा ने नीतीश कुमार पर भरोसा नहीं करने का फैसला किया है।
गृहमंत्री अमित शाह, जो लंबे समय से नीतीश कुमार की “पलटी राजनीति” से खिन्न बताए जाते हैं, अब उनके ही दांव से उन्हें घेरने की तैयारी में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शाह ने बिहार में वही खेल खेला है, जो उन्होंने महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार के साथ खेला था।
नीतीश कुमार को शतरंज का माहिर खिलाड़ी समझने वालों को इस बार अमित शाह ने उनके ही चाल में मात दे दी है।
”चिराग पासवान बने अमित शाह के तुरुप का इक्का
बिहार की सियासत में तेजी से उभरते चिराग पासवान इस बार भाजपा के “हथियार” बन गए हैं।
कुछ दिन पहले चिराग ने कहा था –बिहार की राजनीति में ऊपर आसमान है तो नीचे पासवान।”और यह कथन अब सच साबित होता दिख रहा है।
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार की पारंपरिक सीट भी चिराग पासवान के खाते में डाली गई है, जो भाजपा की दूरगामी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
अमित शाह अब चिराग को “भविष्य के सहयोगी स्तंभ” के रूप में देख रहे हैं, ताकि नीतीश कुमार के किसी भी पलटी कदम का मुकाबला तुरंत किया जा सके।
भविष्य की राजनीति पर बड़ा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के लिए यह सबसे कठिन दौर है।उनके अपने दल में असंतोष है, सहयोगी दलों में अविश्वास है और भाजपा की रणनीति अब पूरी तरह “स्वनिर्भर” होती जा रही है।अगर इस चुनाव में जेडीयू अपने सम्मानजनक सीटें भी बचा ले, तो इसे “राजनीतिक जीत” माना जाएगा
धर्मेंद्र प्रधान का दावा– “बनेगी NDA की सरकार”धर्मेंद्र प्रधान ने कहा,14 नवंबर के बाद बिहार में फिर NDA की सरकार बनेगी। मोदी जी के नेतृत्व में बिहार विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
बिहार देश की राजनीतिक पाठशाला है — बिना बिहार को समझे, कोई राष्ट्रीय राजनीति को नहीं समझ सकता।”प्रधान ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट मानना है कि पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी राज्यों के विकास का मार्ग बिहार से होकर गुजरता है।
निष्कर्ष
बिहार की सियासत इस वक्त अंदरूनी असंतोष, रणनीतिक चालों और भविष्य की गठबंधनों की पुनर्रचना के दौर से गुजर रही है। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान के “एकजुटता” के दावे हैं, तो दूसरी ओर गठबंधन के भीतर की “खामोश जंग” बिहार की राजनीतिक जमीन को और गर्मा रही है।
