NEET विवाद ने पकड़ा तूल: NTA के जवाब से असंतुष्ट आर्या दिल्ली रवाना, पिता बोले— ‘सच सामने आए बिना नहीं हटेंगे’

बी के झा

कानपुर/नई दिल्ली, 21 जुलाई

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) के परिणाम को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। कानपुर की छात्रा आर्या सिंह और उनके पूर्व सैनिक पिता राकेश सिंह ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए दिल्ली कूच कर दिया है। दोनों ने ऐलान किया है कि वे एनटीए मुख्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना देकर जवाब मांगेंगे। उनका कहना है कि जब तक पूरे मामले की पारदर्शी जांच नहीं होगी और सभी सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

यह मामला अब केवल एक छात्रा के अंकों का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और परीक्षा प्रणाली पर जनविश्वास से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।”हमें जवाब चाहिए, बहाने नहीं”पूर्व सैनिक राकेश सिंह का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि मेहनत करने वाले लाखों छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करें। उनका आरोप है कि एनटीए ने उनके सवालों का तथ्यात्मक उत्तर देने के बजाय दावा खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, “यदि हमारी आपत्ति गलत है तो एजेंसी यह बताए कि पहले भेजी गई ओएमआर शीट में त्रुटियां कैसे थीं? बाद में संशोधित प्रति किस आधार पर भेजी गई? यदि सब कुछ सही था तो बदलाव किसने किया?”राकेश सिंह का कहना है कि न्यायिक विकल्प भी खुले हैं, लेकिन अदालत जाने से पहले वे एनटीए से प्रत्यक्ष जवाब चाहते हैं।

क्या है पूरा विवाद?

आर्या सिंह का दावा है कि NEET-UG 2026 का परिणाम घोषित होने के बाद उनके अंक अचानक बदल गए। उनके अनुसार, परिणाम जारी होने की रात उन्हें 570 अंक दिखाई दिए, जबकि अगले दिन वही परिणाम 167 अंक में बदल गया।आर्या का कहना है कि उन्होंने पहले भी ओएमआर शीट में कई विसंगतियों की शिकायत एनटीए को रजिस्टर्ड ईमेल के माध्यम से भेजी थी। उनका आरोप है कि प्रारंभिक ओएमआर में प्रश्न क्रमांक संबंधी त्रुटियां थीं, जिन्हें बाद में स्वयं एनटीए ने संशोधित कर नई प्रति भेजी। संशोधित ओएमआर के आधार पर उनके अंक 600 से अधिक बन रहे थे, जबकि अंतिम परिणाम इससे बिल्कुल अलग आया।

NTA का स्पष्ट पक्ष

दूसरी ओर, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने अपने आधिकारिक जवाब में कहा है कि सभी तकनीकी और प्रशासनिक स्तरों पर जांच पूरी की जा चुकी है। एजेंसी का कहना है कि छात्रा द्वारा प्रस्तुत ओएमआर वैध नहीं है और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 167 अंक वाला परिणाम ही सही है। एनटीए ने इसी प्रकार की अन्य शिकायतों पर भी स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप संपन्न हुई है।अब दिल्ली में होगा अगला चरणआर्या और उनके पिता ने स्पष्ट किया है कि वे दिल्ली में एनटीए कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना देंगे। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि निष्पक्ष सुनवाई और पारदर्शिता सुनिश्चित कराना है।उनका कहना है कि यदि आवश्यक हुआ तो वे न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे, लेकिन पहले एजेंसी को सार्वजनिक रूप से अपने निर्णय का आधार स्पष्ट करना चाहिए।

आंदोलन के मद्देनज़र प्रशासन सतर्क

दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन और संभावित विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।डीजीपी राजीव कृष्ण ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि—सभी धरना-प्रदर्शन केवल निर्धारित स्थलों पर ही होने दिए जाएं।कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार निगरानी रखी जाए।संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल और नियमित पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए।किसी भी प्रकार की अफवाह या हिंसक गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

शिक्षा विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की सबसे बड़ी पूंजी विश्वसनीयता होती है। यदि किसी अभ्यर्थी को परिणाम या मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर संदेह है, तो परीक्षा एजेंसी को अधिकतम पारदर्शिता के साथ तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए ताकि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बना रहे।विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी त्रुटियों की संभावना कम होती है, लेकिन यदि कोई विवाद सामने आता है तो उसका समाधान भी उतनी ही पारदर्शिता से होना चाहिए।

कानूनविदों की राय

संवैधानिक मामलों के जानकारों के अनुसार प्रत्येक नागरिक को अपनी शिकायत दर्ज कराने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। यदि किसी परीक्षार्थी को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो वह संबंधित एजेंसी के समक्ष पुनर्विचार, सूचना के अधिकार, न्यायालय अथवा अन्य वैधानिक मंचों का सहारा ले सकता है।हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अंतिम सत्य का निर्धारण केवल उपलब्ध दस्तावेजों, तकनीकी साक्ष्यों और न्यायिक परीक्षण के आधार पर ही संभव होगा।

बड़ा सवाल

देशभर के लाखों छात्र हर वर्ष NEET परीक्षा के माध्यम से अपने डॉक्टर बनने के सपने को आकार देते हैं। ऐसे में इस प्रकार के विवाद केवल एक छात्र या एक परिवार तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर देते हैं।अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एनटीए आर्या सिंह के आरोपों पर और विस्तृत स्पष्टीकरण देगा, क्या मामला न्यायालय तक पहुंचेगा, अथवा संवाद के माध्यम से इसका समाधान निकलेगा।

फिलहाल इतना तय है कि यह विवाद शिक्षा जगत, प्रशासन और राजनीति—तीनों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन चुका है।

NSK News

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