बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर
पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के एक हालिया बयान ने कांग्रेस पार्टी के भीतर सियासी भूचाल खड़ा कर दिया है।चिदंबरम ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि “ऑपरेशन ब्लू स्टार एक गंभीर भूल थी, जिसकी राजनीतिक कीमत देश और पार्टी को चुकानी पड़ी।”उनके इस बयान के बाद कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कहा कि “ऐसे बयान न केवल पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उनके इरादों पर भी सवाल उठाते हैं।”अल्वी का पलटवार: “क्या उन पर दबाव बनाया जा रहा है?”
एजेंसी एएनआई से बात करते हुए वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने कहा,ऑपरेशन ब्लू स्टार सही था या गलत था, यह अलग बात है। लेकिन 50 साल पुरानी घटना को लेकर कांग्रेस पार्टी और इंदिरा गांधी पर हमला करने की क्या जरूरत है? आखिर इस समय इस तरह का दावा करने का क्या मतलब है?
उन्होंने आगे कहा,पी. चिदंबरम पर अभी भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या उन पर किसी तरह का दबाव बनाया जा रहा है कि वे कांग्रेस को निशाना बनाएं?अल्वी ने आरोप लगाया कि चिदंबरम ‘भाजपा की भाषा’ बोल रहे हैं और उनके बयान से साफ है कि वह विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय भाजपा की लाइन पर चल रहे हैं।“
भाजपा देश को 11 साल से बर्बाद कर रही है, और चिदंबरम पुरानी बातें उठा रहे हैं”राशिद अल्वी ने चिदंबरम के रवैये पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा,आज जब देश में बेरोजगारी, महंगाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमले जैसी गंभीर चुनौतियाँ हैं, तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का ध्यान 50 साल पुरानी घटनाओं पर केंद्रित होना निराशाजनक है।”उन्होंने कहा कि चिदंबरम को भाजपा की विफलताओं और प्रधानमंत्री की नीतियों की आलोचना करनी चाहिए, न कि अतीत की घटनाओं को लेकर अपनी ही पार्टी पर हमला बोलना चाहिए।पार्टी में बढ़ रही असहजतासूत्रों के अनुसार, चिदंबरम के बयान के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में असहजता बढ़ गई है।“
10 जनपथ” से जुड़े सूत्रों ने बताया कि कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे “अनुशासनहीनता की सीमा” बताया है।कांग्रेस की केंद्रीय टीम में इस मुद्दे पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है।एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —जब देश में भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने की जरूरत है, तब अपने ही वरिष्ठ नेता का पार्टी की पुरानी गलतियों पर सार्वजनिक चर्चा करना बिल्कुल अनुचित है। इससे भाजपा को ही फायदा मिलेगा।”
ऑपरेशन ब्लू स्टार पर विवाद का पुनर्जीवन
गौरतलब है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984) तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर से आतंकियों को बाहर निकालने के लिए किया गया था।यह ऑपरेशन उस समय बेहद विवादास्पद रहा था, जिसके बाद देश में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे और अंततः इंदिरा गांधी की हत्या उसी वर्ष उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा की गई थी।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उस दौर की घटनाएँ आज भी भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील हैं। इसलिए चिदंबरम जैसे वरिष्ठ नेता का बयान पार्टी की छवि पर नकारात्मक असर डाल सकता है।चिदंबरम की चुप्पी और राजनीतिक संदेशहालांकि चिदंबरम ने इस विवाद पर अब तक कोई नई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कांग्रेस के भीतर इसे लेकर हलचल तेज है।पार्टी के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि चिदंबरम शायद कांग्रेस के अतीत की नीतियों की समीक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं, मगर उनकी भाषा और समय दोनों ही “राजनीतिक रूप से अनुचित” हैं।
वहीं भाजपा के कुछ नेताओं ने चिदंबरम के बयान का स्वागत करते हुए इसे “सत्य की स्वीकारोक्ति” बताया है।विश्लेषण: आत्ममंथन या राजनीतिक दबाव?राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पी. चिदंबरम का यह बयान सिर्फ एक इतिहासिक टिप्पणी नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर “विचारधारा के संघर्ष” का संकेत है।कुछ लोगों का मानना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता अब “आत्ममंथन” की राह पर हैं, जबकि अन्य का कहना है कि यह कदम अनजाने में भाजपा के प्रचार को बल दे सकता है।
निष्कर्ष
चिदंबरम के बयान ने कांग्रेस में नई खींचतान को जन्म दे दिया है।राशिद अल्वी जैसे वरिष्ठ नेताओं का सार्वजनिक रूप से उन पर सवाल उठाना यह दिखाता है कि पार्टी के भीतर मतभेद अब सतह पर आने लगे हैं।अब देखना यह होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है —क्या यह मामला “आंतरिक संवाद” तक सीमित रहेगा या “सार्वजनिक अनुशासनात्मक कार्रवाई” में बदलेगा।
