बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 17 अक्टूबर
एक टीवी चैनल के “चुनावी मंच 2025” पर बिहार की राजनीति उस समय गरमा गई जब पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने मंच से एक के बाद एक तीखे बयान दिए।कभी खुद को गरीबों का सच्चा साथी बताने वाले पप्पू यादव ने इस बार न केवल लालू और तेजस्वी यादव पर खुलकर टिप्पणी की, बल्कि खुद को भगवान कृष्ण का वंशज भी बताया।
उनकी वाणी में राजनीतिक जोश और आत्मविश्वास दोनों झलक रहा था —पप्पू यादव नचाता है, नाचता नहीं। मैं किसी भीड़ का मोहताज नहीं।ताकतवरों से वोट नहीं मांगता, सिर्फ गरीबों के आंसू पोंछता हूं।”“
लालू यादव तेजस्वी से कई गुना बेहतर
”जब मंच संचालक ने उनसे पूछा कि लालू यादव और तेजस्वी यादव में कौन बेहतर नेता हैं, तो पप्पू यादव ने बिना झिझक कहा —लालू यादव तेजस्वी से कई गुना बेहतर हैं।
तेजस्वी इस जन्म में तो लालू नहीं बन सकते।उन्होंने आगे कहा —तेजस्वी जननायक नहीं हैं, असली जननायक तो कर्पूरी ठाकुर हैं। मैं उन्हें सम्मान देता हूं, यह मेरा संस्कार है।इस बयान ने न केवल मंच पर बैठे लोगों को चौंकाया बल्कि बिहार की सियासत में हलचल मचा दी।“
मैं भगवान कृष्ण का वंशज हूं” — पप्पू यादव का दावाअपनी पहचान पर बोलते हुए पप्पू यादव ने कहा —मैं भगवान कृष्ण का वंशज हूं। बुद्ध मेरे संस्कार हैं।मैं हर जाति के गरीबों से प्यार करता हूं, हर जाति के युवाओं के लिए जीता हूं।
उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति जाति या धर्म पर नहीं, इंसानियत पर आधारित है।मैंने कभी किसी की जाति नहीं पूछी, न बाढ़ के समय, न कोरोना के दौरान।मदद करते समय मैंने सिर्फ इंसान देखा, न हिंदू, न मुसलमान।”“रोबिनहुड नहीं, इंसानियत का सिपाही हूं”खुद को ‘रोबिनहुड’ कहे जाने पर उन्होंने कहा —मुझे किसी का मसीहा बनने का शौक नहीं है।मैं रोबिनहुड नहीं हूं, मैं सिर्फ इंसानियत का सिपाही हूं।
उन्होंने दावा किया कि उनके जीवन का मकसद सत्ता नहीं, सेवा है —मुझे किसी का टिकट नहीं चाहिए। मेरे सबसे अच्छे रिश्ते जनता के साथ हैं।”
बिहार चुनाव 2025: नेताओं का जमावड़ा, सियासत का महासंग्राम टीवी चैनल के इस चुनावी मंच पर दिनभर बिहार के प्रमुख नेताओं का जमावड़ा लगा रहा।
कार्यक्रम के दौरान पप्पू यादव ने न केवल खुद को चर्चा के केंद्र में लाया, बल्कि कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन के बीच चल रही “भीतरी खींचतान” को भी हवा दे दी।
बिहार में दो चरणों में मतदान होना है —पहला चरण 6 नवंबर, दूसरा चरण 11 नवंबर, और मतगणना 14 नवंबर को होगी।ऐसे में पप्पू यादव का यह बयान कांग्रेस-राजद गठबंधन पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषण — “आवाज़ पप्पू की, पटकथा राहुल गांधी की
”राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पप्पू यादव के बयान का असर सीधा राजद-कांग्रेस गठबंधन पर पड़ सकता है।
एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा —आवाज़ पप्पू यादव की थी, लेकिन पटकथा राहुल गांधी की लग रही थी।बिहार की राजनीति में पप्पू यादव आज राहुल गांधी के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।उनका मंच से तेजस्वी यादव पर हमला यह संकेत है कि कांग्रेस अब लालू परिवार से दूरी बनाना चाहती है।
”विश्लेषक ने यह भी कहा कि पप्पू यादव के “हम नाचते नहीं, नचाते हैं” जैसे शब्द राजनीतिक शालीनता की सीमा से परे हैं, लेकिन यह उनके भीतर के आत्मविश्वास और आक्रोश दोनों को दर्शाते हैं।इस बयान से यह तो साफ़ है कि कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन अब नाजुक मोड़ पर है।
चुनावी नतीजों से पहले ही दोनों दलों के रिश्ते दरार की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।
निष्कर्ष —
बयान जिसने सियासत में हलचल मचा दी पप्पू यादव ने जिस बेबाकी से लालू और तेजस्वी दोनों पर टिप्पणी की, उससे यह स्पष्ट है कि वे अब बिहार की राजनीति में किसी के साये में नहीं रहना चाहते।उनकी बातों में ‘जनता से सीधा संवाद’ और ‘व्यवस्था से टकराव’ दोनों का मिश्रण दिखाई देता है।बहरहाल, अब नज़रें इस बात पर हैं कि राजद और कांग्रेस इस बयान पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं।
एक बात तो तय है —“बिहार की राजनीति में पप्पू यादव एक बार फिर केंद्र में हैं, और इस बार सिर्फ नेता नहीं, कहानी के किरदार बनकर।
