RJD सीटों पर पिछड़ी, मगर वोट के मैदान में नंबर-1: भाजपा से 15 लाख अधिक वोट, दो पैमानों पर सबसे बड़ी पार्टी

बी के झा

NSK

पटना, 15 नवंबर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ने एक तरफ़ एनडीए को ऐतिहासिक 202 सीटों का जनादेश दिया, तो दूसरी ओर महागठबंधन के लिए यह बुरी खबरों का पुलिंदा बनकर आया। आरजेडी, कांग्रेस और वामदलों को मिलाकर कुल सीटें 35 तक सिमट गईं। इनमें भी आरजेडी मात्र 25 सीटों पर सिमट कर 2020 की अपनी सबसे बड़ी पार्टी वाली पहचान से बहुत दूर रह गई।

लेकिन—हारकर भी आरजेडी दो अलग पैमानों पर बिहार की नंबर-1 पार्टी बनकर उभरी है। यही इस चुनाव के आंकड़ों का सबसे बड़ा दिलचस्प मोड़ है।

1. वोट शेयर में नंबर-1: सबसे अधिक हिस्सेदारी, सबसे बड़ी पसंद सीटें कम आईं, लेकिन वोट प्रतिशत के मामले में आरजेडी ने सबको पछाड़ दिया।आरजेडी का वोट शेयर: 23%

यही इसे इस चुनाव में बिहार की सबसे पसंदीदा पार्टी बनाता है।

जबकि —भाजपा: 20.08%

जेडीयू: 19.25%

कांग्रेस: 8.71%चुनाव में आरजेडी सबसे ज्यादा सीटों पर लड़ी, इसलिए उसका वोट बैंक सीधा और व्यापक दोनों रहा। यही वजह है कि हारते हुए भी वह वोट प्रतिशत में सबसे आगे निकल गई।

2. कुल वोटों में नंबर-1: लालटेन पर सबसे ज्यादा अंगुलियां वोटों की वास्तविक संख्या देखें, तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है। पोस्टल बैलेट + EVM मिलाकर:आरजेडी को मिले 1,15,46,055 वोट — जो बिहार की किसी भी पार्टी से सबसे अधिक हैं।

दूसरी ओर भाजपा को मिले—1,00,81,143 वोट, यानी आरजेडी से करीब 15 लाख कम।

ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि जमीन पर आरजेडी का जन-समर्थन आज भी बहुत बड़ा है, लेकिन उसका वोट सीट में नहीं बदल सका, जबकि भाजपा ने 89 सीटें और जेडीयू ने 85 सीटें जीतकर सीट-टू-वोट कन्वर्ज़न में बाज़ी मारी।

अन्य दलों की स्थिति

जेडीयू: 96,67,118 वोट

कांग्रेस: 43,74,579 वोट सीट बनाम वोट का गणित: क्यों हारी RJD, पर फिर भी नंबर-1?

आरजेडी का वोट फैलाव व्यापक रहा, लेकिन ‘विनिंग पॉकेट्स’ कम रहे।

कई सीटों पर आरजेडी दूसरे स्थान पर रही—मतलब हार बहुतों में मामूली अंतर से हुई भाजपा और जेडीयू ने अपने परंपरागत और नए दोनों क्षेत्रों में उच्च सोशल इंजीनियरिंग के कारण ज़्यादा सीटें कन्वर्ट कीं

एनडीए का वोट बहुत ‘कंसॉलिडेटेड’ था, जबकि महागठबंधन का वोट कई जगहों पर बिखरा इसलिए:वोट में नंबर-1 होने के बावजूद सीटों में पिछड़ी आरजेडी।

चुनाव का सबसे बड़ा संदेश

बिहार ने इस चुनाव में दो स्पष्ट संकेत दिए—

1. जनादेश एनडीए को, और वह भी ऐतिहासिक स्तर का।

2. लेकिन जनसमर्थन में आरजेडी अभी भी बड़ी शक्ति है।यह परिणाम बताता है कि बिहार की राजनीति में आरजेडी भले सत्ता से दूर हो गई हो, मगर सामाजिक समीकरण, वोट बैंक और जनपक्षधरता के पैमाने पर वह आज भी पहली पंक्ति की पार्टी है।

निष्कर्ष:

कौन जीता, कौन बड़ा?जीता — एनडीएबड़ी पार्टी वोट में — आरजेडीसीटों में — भाजपा और जेडीयूराजनीति में — बिहार की जनता चुनाव खत्म हो चुके हैं, लेकिन वोटों और सीटों का यह रोमांचक अंतर आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में नए समीकरण, नई बहसें और नई रणनीतियों को जन्म देगा।

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