बी के झा
NSK


नई दिल्ली / मद्रास , 10 दिसंबर
संसद के शीतकालीन सत्र का बुधवार राजनीतिक तापमान के चरम पर पहुंच गया। लोकसभा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव सुधारों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर “झूठ फैलाने” और “देश को भ्रमित करने” का आरोप लगाते हुए कहा—“क्या घुसपैठिए तय करेंगे कि भारत का मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कौन बनेगा?”
वहीं सदन में कंगना रनौत ने अपने-खड़े बेबाक अंदाज़ में कहा कि “नरेंद्र मोदी EVM नहीं हैक करते, वो तो लोगों के दिल हैक करते हैं।”दूसरी ओर, बिहार के सीतामढ़ी में HIV के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।इसके अलावा शाम की सबसे बड़ी हलचल रही—राहुल गांधी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से हुई दो घंटे की बंद कमरे की बैठक, जिसने राजनीतिक गलियारों में नए कयासों को जन्म दे दिया है।और इसी बीच, विपक्ष ने मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का नोटिस देकर न्यायपालिका से संसद तक हलचल पैदा कर दी।
1. “SIR पर झूठ फैलाया गया”—लोकसभा में अमित शाह का प्रसार लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि—अनुच्छेद 327 चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से वोटर लिस्ट तैयार करने का अधिकार देता है।
SIR कोई राजनीतिक हथियार नहीं, बल्कि “मतदाता सूची को शुद्ध रखने की संवैधानिक प्रक्रिया” है।विदेशी नागरिकों को वोट का अधिकार नहीं दिया जा सकता—“यह लोकतंत्र का सबसे बुनियादी सिद्धांत है।”उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि—“
कुछ दलों को जनता वोट नहीं देती। और जब मिलते हुए भी वोट कट जाएँ, तो मैं उनकी पीड़ा समझ सकता हूँ।”
राजनीतिक विश्लेषकों की दृष्टि दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजनीति विशेषज्ञ डॉ. रमेश भटनागर कहते हैं—“अमित शाह जिस आक्रामक अंदाज़ में बात कर रहे हैं, उससे साफ है कि भाजपा SIR को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बनाना चाहती है। विपक्ष इसे राजनीति समझता है, पर भाजपा इसे राष्ट्रवाद और ‘डेमोग्राफिक इंटेग्रिटी’ की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है।”
2. कंगना रनौत का तंज—“मोदी दिल हैक करते हैं, EVM नहीं”बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने सदन में कांग्रेस पर तीखा वार करते हुए कहा—“कांग्रेस EVM को दोष देती है, पर असलियत ये है कि मोदी जी लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं।”उन्होंने राहुल गांधी द्वारा सदन में दिखाई गई तस्वीर का भी मज़ाक उड़ाया—“जिस महिला को लेकर बवाल मचा, उसने खुद कहा है कि वो कभी भारत नहीं आई। विपक्ष का एजेंडा भ्रम फैलाना है।
”हिंदू संगठनों की प्रतिक्रियाविश्व हिन्दू परिषद के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा—“कंगना ने जो कहा, वह जनता की भावना का प्रतिनिधित्व करता है। प्रधानमंत्री मोदी को रद्दी बहसों में घसीटना विपक्ष की आदत है, लेकिन जनता सच्चाई देख रही है।
3. “कांग्रेस की हार का कारण वोटर लिस्ट नहीं, नेतृत्व है”—अमित शाहगृह मंत्री ने कहा कि—“भारतीय जनता पार्टी भी कई चुनाव हारी है, पर हमने कभी EVM या वोटर लिस्ट को दोष नहीं दिया। कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण की जरूरत है।”उन्होंने तीखे शब्दों में कहा—“एक दिन कांग्रेस के कार्यकर्ता खुद राहुल गांधी से पूछेंगे कि हार का असली कारण क्या है।”
शिक्षाविदों का आकलन जेएनयू की प्रोफेसर डॉ. इरा पांडे कहती हैं—“
शाह का यह बयान केवल राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि कांग्रेस में नेतृत्व संकट की ओर भी संकेत है। यह मुद्दा भविष्य की राजनीति में निर्णायक साबित हो सकता है।”4. सीतामढ़ी में HIV का विस्फोट—7400 से अधिक मरीजबिहार के सीतामढ़ी से आई खबर ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है—7400+ HIV पॉजिटिव मरीजहर महीने 40–60 नए केस400 से अधिक बच्चे संक्रमितसदर अस्पताल के डॉ. हसीन अख्तर के अनुसार मुख्य कारण है—“
प्रवासी मजदूरों का असुरक्षित संबंधों के कारण संक्रमित होकर लौटना।”स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनीसार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राधिका मेहता कहती हैं—“यह एक सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर आपदा है। सरकार को त्वरित HIV स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चलाना होगा।”5. राहुल गांधी की दो घंटे की PM–
शाह से बैठक—राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद स्थित PMO कक्ष में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मुलाकात की, जिसमें मुख्य रूप से—CIC के प्रमुख की नियुक्ति8 सूचना आयुक्तों का चयन CVC के महत्वपूर्ण पदों पर नाम तय करना शामिल रहा।राजनीतिक संकेत?
वरिष्ठ पत्रकार अशोक दत्ता लिखते हैं—“दो घंटे की बैठक बताती है कि राजनीतिक टकराव के बीच भी संस्थागत कार्यों को लेकर संवाद जारी है। यह भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता है।”न्यायपालिका में भूचाल: जस्टिस स्वामीनाथन को हटाने की विपक्ष की मांग—
3 गंभीर आरोपविपक्ष के 120 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस देकर मांग की है कि मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए।लगाए गए मुख्य आरोप
:1. एक वरिष्ठ वकील के पक्ष में अनुचित पक्षपात 2. विशिष्ट समुदाय एवं राजनीतिक विचारधारा के प्रति झुकाव
3. संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के विपरीत निर्णयहिंदू धर्मगुरुओं व संगठनों की तीखी प्रतिक्रियाकांची मठ के एक वरिष्ठ आचार्य का बयान—“स्वामीनाथन जी ने केवल धर्म-संरक्षण की बात कही है। हिंदू आस्था पर लगातार प्रहार हो रहे हैं, ऐसे में किसी जज का परंपराओं की रक्षा करना गलत नहीं कहा जा सकता।”
विश्व हिंदू परिषद ने कहा—“विपक्ष मंदिर परंपराओं पर कानून का चश्मा नहीं, राजनीतिक चश्मा चढ़ाकर देख रहा है।”कानून विशेषज्ञों की राय—हटाने की प्रक्रिया आसान नहींपूर्व सॉलिसिटर जनरल बी.एन. माथुर बताते हैं—
“जज को हटाना संसद के लिए सबसे कठिन प्रक्रियाओं में से एक है। दो-तिहाई बहुमत और आधे से अधिक कुल सदस्यों का समर्थन जुटाना लगभग असंभव होता है। यह राजनीतिक से अधिक संवैधानिक लड़ाई है।”
निष्कर्ष—
एक ऐसा दिन, जिसने संसद से सड़क तक राजनीति को गरमा दिया SIR पर तीखे वार–पलटवार, कंगना का बेबाक अंदाज़, कांग्रेस–भाजपा के बीच असली राजनीतिक टकराव, बिहार में स्वास्थ्य संकट, और न्यायपालिका पर गंभीर सवाल—
इन पाँचों मोर्चों ने भारतीय लोकतंत्र, समाज और प्रशासन के कई पहलुओं को झकझोर दिया है।आने वाले दिनों में ये बहसें और तीखी होंगी और इनका असर न केवल संसद, बल्कि जनता के मनोविज्ञान और राष्ट्रीय विमर्श पर भी गहरा पड़ेगा।
