SIR पर ममता का तीखा वार: “NRC की तैयारी… और डर का माहौल बनाने की कोशिश” बंगाल की राजनीति में ‘संविधान दिवस’ पर उठा नया तूफान

बी के झा

NSK

नई दिल्ली / कोलकाता , 26 नवंबर

संविधान दिवस के मौके पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रेड रोड स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद पत्रकारों से बातचीत में ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को “लोकतंत्र पर सीधा हमला” बताते हुए आरोप लगाया कि इसके पीछे की असली मंशा “पिछले दरवाजे से NRC लागू करना और आम नागरिकों में असुरक्षा का माहौल पैदा करना” है।

अपने हाथ में संविधान की प्रति लिए ममता ने कहा—“मैं दुख के साथ देख रही हूं कि लोगों के मताधिकार छीने जा रहे हैं, धार्मिक अधिकारों पर हमला हो रहा है। गंदी भाषा का इस्तेमाल हो रहा है। दलित, अल्पसंख्यक, यहां तक कि साधारण हिंदू मतदाता भी नहीं बचे हैं।”उन्होंने दावा किया कि SIR के नाम पर ऐसी स्थितियां बनाई जा रही हैं जिनसे कई नागरिकों को वर्षों पुरानी अपनी पहचान और नागरिकता साबित करने की मजबूरी खड़ी हो सकती है।“एनआरसी लागू करने की छिपी कोशिश” —

ममता का आरोप

मुख्यमंत्री ने सीधे आरोप लगाया कि SIR के पीछे का उद्देश्य “एनआरसी की तैयारी” है।उनके अनुसार—“जो लोग दशकों से इस मिट्टी पर काम कर रहे हैं, खेती कर रहे हैं, रह रहे हैं—उन्हीं को अपने भारतीय होने का सबूत देने को कहा जा रहा है। यह डर का माहौल बनाना है।”इसके साथ ही ममता ने ‘धर्मनिरपेक्षता’ और ‘संघवाद’ पर मंडरा रहे कथित खतरे की बात कही और कहा कि संविधान देश की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।संविधान दिवस पर राजनीतिक संदेशों की बौछार एक्स (पूर्व ट्विटर) पर किए गए अपने पोस्ट में भी ममता बनर्जी ने मौजूदा हालात पर चिंता जताई।

उन्होंने लिखा—“जब लोकतंत्र खतरे में हो, जब संघीय ढांचा कमजोर किया जा रहा हो, तब हमें संविधान के मार्गदर्शन को बचाना होगा।”उन्होंने संविधान सभा में बंगाल के योगदान का भी विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की आत्मा विविधता, सहअस्तित्व और समान अधिकारों पर आधारित है।बंगाल की सियासत में नया मोड़:

NRC का डर या राजनीतिक रणनीति?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, SIR को लेकर ममता बनर्जी की यह तीखी प्रतिक्रिया केवल प्रशासनिक चिंता नहीं, बल्कि 2026 विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक संदेश भी है — ख़ासकर उन समुदायों के लिए जो NRC, नागरिकता कानून और पहचान से जुड़े मुद्दों को लेकर संवेदनशील रहे हैं।विपक्ष के एक विश्लेषक ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“ममता बनर्जी को डर इसलिए है क्योंकि SIR से फर्जी मतदाता, अवैध रोहिंग्या और घुसपैठियों के नाम हट सकते हैं। अपने मुख्य वोट बैंक में असुरक्षा का माहौल बनाकर ममता फिर से पुराने भय को जगाना चाहती हैं।

यह साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं।”विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में SIR बनाम NRC की बहस बंगाल में राजनीतिक तापमान को और बढ़ाएगी।जहां केंद्र और चुनाव आयोग दावा करते हैं कि SIR सिर्फ एक नियमित और तकनीकी प्रक्रिया है, वहीं ममता बनर्जी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही हैं।स्पष्ट है कि यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति का नया रण बन चुका है।

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