सुप्रीम कोर्ट में ‘जूता कांड’ के बाद CJI गवई ने तोड़ी चुप्पी, बोले – “जो हुआ, वह स्तब्ध कर देने वाला था”

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर

देश की सर्वोच्च अदालत में हाल ही में घटी “जूता फेंकने” की शर्मनाक घटना ने पूरे न्यायिक तंत्र को हिला कर रख दिया था। अब इस घटना पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी. वाई. चंद्रचूड़ नहीं बल्कि सीजेआई बी.आर. गवई ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा,जो भी हुआ, उससे मैं और मेरे विद्वान साथी बेहद स्तब्ध हैं। हमारे लिए यह एक भुला दिया गया अध्याय है।”अदालत में मचा था हंगामासोमवार को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान वकील राकेश किशोर (71) ने अचानक मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। अदालत कक्ष में अफरातफरी मच गई, सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उन्हें हिरासत में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, किशोर को यह कहते सुना गया—सनातन का अपमान नहीं सहेंगे!”सूत्रों के अनुसार, वह पिछले महीने खजुराहो में विष्णु प्रतिमा के पुनर्स्थापन से जुड़ी याचिका पर सीजेआई की टिप्पणी से नाराज़ था।“यह मज़ाक नहीं, संस्था का अपमान है” – जस्टिस भुइयांघटना के दौरान बेंच में मौजूद जस्टिस उज्जल भुइयां ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा—यह कोई मज़ाक नहीं है। यह भारत के मुख्य न्यायाधीश पर हमला है, यानी न्यायपालिका की संस्था का अपमान है।”वकील की सदस्यता और लाइसेंस निलंबितइस घटना के तुरंत बाद, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने राकेश किशोर की सदस्यता को “गंभीर कदाचार” मानते हुए तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया।बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी वकील का लाइसेंस निलंबित कर दिया।SCBA ने अपने बयान में कहा —किशोर का निंदनीय और असंयमित व्यवहार न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। यह पेशेवर नैतिकता और सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा का गंभीर उल्लंघन है।”एसोसिएशन की कार्यकारी समिति ने यह भी कहा कि,ऐसा आचरण अदालत की कार्यवाही की पवित्रता और बार-बेंच के बीच पारस्परिक सम्मान के दीर्घकालिक रिश्ते पर प्रहार है।”सोशल मीडिया पर सीजेआई को निशाना बनाने वालों पर कार्रवाईइसी बीच, पंजाब पुलिस ने सीजेआई को लेकर की जा रही आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट्स पर सख्त रुख अपनाया है। पुलिस ने बुधवार को राज्य के विभिन्न जिलों में 100 से अधिक सोशल मीडिया खातों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।पुलिस प्रवक्ता के अनुसार,सीजेआई को निशाना बनाने से जुड़ी आपत्तिजनक और अवैध सामग्रियों की जांच कर, संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं।”न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल नहींमुख्य न्यायाधीश गवई ने घटना को भले ही “भुला दिया गया अध्याय” बताया हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा और अदालतों में अनुशासन को लेकर फिर एक बार बहस तेज हो गई है।कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि“ऐसे मामलों में कड़ी सज़ा देकर यह संदेश देना ज़रूरी है कि न्यायपालिका की गरिमा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं।

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